प्रदेश में 15 लाख युवाओं के पास कोई काम नहीं

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  • तुमेश साहू

रायपुर। प्रदेश में बेरोजगारों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है।छत्तीसगढ़ में पंजीकृत बेरोजगारों की संख्या 15 लाख से पार हो चुकी है। दुर्ग में सबसे अधिक बेरोजगार पंजीकृत हैं। युवाओं को रोजगार देने के लिए सरकार ने कई घोषणाएं की है। लेकिन जब जमीनी स्थिति की बारी आती है तो आंकड़े केवल कागजों पर ही रह जाते हैं। बावजूद बेरोजगारों की संख्या कम होने का नाम नहीं ले रही है। विभागीय आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश में मौजूदा समय में रोजगार कार्यालयों में पंजीकृत बेरोजगारों की संख्या 15 लाख 32 हजार 80 है। प्रदेश में बढ़ती बेरोजगारी न केवल आर्थिक समस्या है, बल्कि इसका सीधा असर सामाजिक स्थिरता और युवाओं के भविष्य पर भी पड़ रहा है।
जल्द ही प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले समय में यह समस्या और विकराल रूप ले सकती है। हर साल बजट में सरकार युवाओं के रोजगार के लिए करोड़ों का प्रावधान करती है। इसके बावजूद सरकार युवाओं की उम्मीदों पर खरी नहीं उतर पा रही है। सरकार रोजगार मॉडल निवेश पर आधारित है लेकिन उम्मीद के अनुरुप प्रदेश में निवेश नहीं आ पा रहा है। सरकार की कोशिशें बहुत हैं, लेकिन वे कंपनियों के वादे के बाद भी परवान नहीं चढ़ पा रही हैं। अब सरकार रोजगार को लेकर क्या कुछ कदम उठाएगी यह तो आने वाला समय ही बताएगा।

सरकार युवाओं को रोजगार नहीं दे पा रही है

प्रदेश में 15 लाख युवाओं के पास कोई काम नहीं है। वर्तमान सरकार में हर महीने लगभग 15 हजार बेरोजगार बढ़े हैं। इनमें से सरकार लगभग 400-500 लोगों को ही रोजगार दे पाई है। प्रदेश में जब बीजेपी ने सत्ता संभाली थी तब बेरोजगारों की संख्या 11 लाख 39 हजार 656 थी। यह आंकड़ा अप्रैल 2024 का पंजीयन कार्यालय में रजिस्टर्ड युवाओं का है। इसके करीब ढाई साल बाद यानी 6 मई 2026 में यह संख्या 15 लाख 32 हजार 80 हो गई है।

ढाई सालों में बेरोजगारों की संख्या बढ़कर लगभग 4 लाख के करीब हुई

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार ढाई साल में बेरोजगारों की संख्या लगभग 4 लाख के करीब हो गई है। जिस हिसाब से बेरोजगारों की संख्या बढ़ी है उस तरह से छत्तीसगढ़ सरकार कोई रोजगार मॉडल नहीं बना पाई है।

बेरोजगारी में टॉप 10 जिले…

दुर्ग,बिलासपुर, रायपुर, राजनांदगांव, बालोद जांजगीर चांपा, जशपुर कबीरधाम, धमतरी, महासमुंद

स्थानीय लोगों को रोजगार देने में कोताही

जानकारी के अनुसार प्रदेश में स्थानीय लोगों को रोजगार देने में कोताही बरती जा रही है। जिस वजह से प्रदेश की अधिकतम नागरिकों को रोजगार नहीं मिल पा रहा है। सरकार के द्वारा स्थानीय लोगों के लिए किसी प्रकार का कोई विशेष प्रावधान नहीं किया गया। जिस वजह से पढ़े-लिखी युवा बेरोजगार घूम रहे हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार

विशेषज्ञों का मानना है कि बेरोजगारी बढ़ने के पीछे कई कारण हैं। औद्योगिक निवेश की धीमी गति, सरकारी भर्तियों में देरी इसका कारण है। साथ ही निजी क्षेत्र में नए अवसरों की कमी और कौशल विकास योजनाओं का अपेक्षित परिणाम न दे पाना प्रमुख वजहें मानी जा रही हैं। युवाओं का कहना है कि सरकार की घोषणाएं कागजों तक सीमित रह गई हैं।