बीमारी के डर से महिला को गांव से निकाला, खेत की झोपड़ी में रहने को मजबूर हुई हीरा बाई

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गरियाबंद। जिले के धीगियामुडा गांव में मानवता को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। यहां 48 वर्षीय महिला हीरा बाई नेताम को कथित रूप से बीमारी फैलने के डर से परिवार ने गांव से बाहर खेत में बनी झोपड़ी में रहने के लिए छोड़ दिया। महिला कई दिनों तक अकेले और परेशान हालत में झोपड़ी में रहने को मजबूर रही। मामले की जानकारी मिलने के बाद जिला पंचायत अध्यक्ष गौरी शंकर कश्यप मौके पर पहुंचे और महिला को वहां से निकालकर इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया। फिलहाल महिला का इलाज देवभोग अस्पताल में शुरू किया गया है।

20 साल से पैरों में सूजन और हाथों में घाव की समस्या
जानकारी के अनुसार, धीगियामुडा गांव निवासी हीरा बाई नेताम पिछले करीब 20 वर्षों से स्वास्थ्य संबंधी समस्या से जूझ रही हैं। उन्हें लंबे समय से पैरों में सूजन और हाथों में घाव की परेशानी थी। परिजनों के मुताबिक, महिला का काफी समय तक इलाज कराया गया, लेकिन बीमारी में ज्यादा सुधार नहीं हुआ। पिछले करीब एक साल से इलाज बंद होने के बाद उनकी स्थिति और बिगड़ गई। हाथ-पैरों में फोड़े होने लगे और चलने-फिरने में भी परेशानी होने लगी। इसी बीच गांव के कुछ लोगों ने बीमारी को छूत का रोग समझ लिया और परिवार पर महिला को अलग रखने का दबाव बनाया।

2 जुलाई से खेत की झोपड़ी में रह रही थी महिला
महिला के पति नरसिंह नेताम ने बताया कि गांव वालों के दबाव के बाद 2 जुलाई को हीरा बाई को गांव से करीब आधा किलोमीटर दूर खेत में बनी एक झोपड़ी में रहने के लिए छोड़ दिया गया था। परिवार के सदस्य केवल खाना पहुंचाने के लिए वहां जाते थे और वापस लौट आते थे। महिला कई दिनों तक अकेले उसी झोपड़ी में रहने को मजबूर रही। मामले की जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम के जरिए जिला पंचायत अध्यक्ष गौरी शंकर कश्यप तक पहुंची। इसके बाद उन्होंने तत्काल पहल करते हुए एंबुलेंस की व्यवस्था कराई और खुद मौके पर पहुंचे।

जिला पंचायत अध्यक्ष ने पहुंचाया अस्पताल
मौके पर पहुंचने के बाद जिला पंचायत अध्यक्ष ने महिला की स्थिति देखी और उसे तुरंत इलाज की जरूरत बताई। इसके बाद महिला को झोपड़ी से निकालकर देवभोग अस्पताल पहुंचाया गया। अस्पताल में डॉक्टरों ने महिला की जांच शुरू की। देवभोग के बीएमओ डॉ. प्रकाश साहू ने बताया कि जांच में महिला में गैंगरीन जैसे लक्षण दिखाई दे रहे हैं। फिलहाल प्राथमिक उपचार किया जा रहा है। जरूरत पड़ने पर महिला को बेहतर इलाज के लिए बड़े अस्पताल में रेफर किया जाएगा।

प्रशासन ने इलाज का दिया भरोसा
मामला सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने महिला के समुचित इलाज और हर संभव मदद का आश्वासन दिया है। प्रशासन की ओर से महिला की स्वास्थ्य स्थिति पर नजर रखी जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी बीमारी को केवल आशंका के आधार पर छूत मानकर मरीज को अलग करना गलत है। बीमारी की सही जांच और चिकित्सकीय सलाह जरूरी होती है। हीरा बाई के साथ हुई घटना ने ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य जागरूकता और सामाजिक सोच को लेकर सवाल खड़े किए हैं। प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग अब महिला के इलाज के साथ-साथ लोगों को बीमारी और संक्रमण को लेकर जागरूक करने की दिशा में भी कदम उठा रहा है।