रायपुर। छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण से जुड़े कानून को लेकर एक बार फिर सियासी हलचल तेज हो गई है। करीब 20 साल पुराने धर्म स्वतंत्रता विधेयक 2006 को राज्यपाल ने पुनर्विचार के लिए विधानसभा को लौटा दिया है। इसके साथ ही अब राज्य सरकार के लिए नया धर्म स्वतंत्रता विधेयक लाने का रास्ता साफ हो गया है।
दरअसल, वर्ष 2006 में तत्कालीन भाजपा सरकार के कार्यकाल में मुख्यमंत्री रमन सिंह के नेतृत्व में धर्म स्वतंत्रता विधेयक विधानसभा से पारित किया गया था। यह विधेयक धर्मांतरण को नियंत्रित करने और अवैध रूप से धर्म परिवर्तन पर रोक लगाने के उद्देश्य से लाया गया था।
हालांकि विधानसभा से पारित होने के बाद यह विधेयक राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा गया था, लेकिन मंजूरी नहीं मिलने के कारण यह लंबित ही रह गया और कानून का रूप नहीं ले सका। अब करीब दो दशक बाद यह विधेयक दोबारा राज्यपाल के पास पहुंचा था। राज्यपाल रामने देखा ने इस विधेयक को पुनर्विचार के लिए वापस विधानसभा को भेज दिया है।
राज्यपाल के इस फैसले के बाद अब विधानसभा में इस विधेयक पर फिर से विचार किया जा सकेगा। साथ ही सरकार के लिए नया धर्म स्वतंत्रता विधेयक लाने का रास्ता भी खुल गया है। सूत्रों के मुताबिक राज्य सरकार पहले ही इस विषय पर नया और सख्त प्रावधानों वाला धर्म स्वतंत्रता विधेयक लाने की तैयारी कर चुकी है। हाल ही में कैबिनेट बैठक में नए धर्म स्वतंत्रता विधेयक के प्रस्ताव को मंजूरी भी दी जा चुकी है।
ऐसे में माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में सरकार संशोधित और नए प्रावधानों के साथ धर्मांतरण को लेकर नया कानून विधानसभा में पेश कर सकती है, जिस पर सियासी बहस तेज होने की संभावना है।
