तमिलनाडु केंद्रीय विश्वविद्यालय के 11वें दीक्षांत समारोह में शामिल हुए उपराष्ट्रपति
1,103 स्नातकों को मिली डिग्रियां, 50 स्वर्ण पदक विजेताओं में 37 छात्राएं
बोले—ज्ञान के उपभोक्ता नहीं, निर्माता बनें; नकल करने वालों के बजाय नवप्रवर्तक और अनुयायी के बजाय नेता बनें
तिरुवरूर। उपराष्ट्रपति श्री सीपी राधाकृष्णन ने सोमवार को तिरुवरूर स्थित तमिलनाडु केंद्रीय विश्वविद्यालय के 11वें दीक्षांत समारोह में हिस्सा लिया। इस अवसर पर उन्होंने स्नातक छात्रों को जीवन की महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करने पर बधाई देते हुए कहा कि दीक्षांत समारोह केवल डिग्री प्राप्त करने का अवसर नहीं, बल्कि शिक्षा की परिवर्तनकारी शक्ति, ज्ञान की खोज, समर्पण, दृढ़ता और संघर्षों से उबरने की क्षमता का उत्सव है।
उपराष्ट्रपति ने डिग्री प्राप्त करने वाले छात्रों के माता-पिता और शिक्षकों को भी बधाई दी। उन्होंने कहा कि माता-पिता और शिक्षकों ने विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य के लिए अपने वर्तमान के अनेक सुख-सुविधाओं का त्याग किया है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की सफलता के पीछे उनके परिवार और शिक्षकों का महत्वपूर्ण योगदान होता है।
तिरुवरूर की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत का उल्लेख
श्री राधाकृष्णन ने तिरुवरूर के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भव्य त्यागराज मंदिर वाला यह पवित्र नगर सदियों से आध्यात्मिकता, विद्वत्ता और कलात्मक उत्कृष्टता का केंद्र रहा है। इस पवित्र भूमि ने संतों, विद्वानों और कर्नाटक संगीत की महान त्रिमूर्ति को जन्म दिया है। उन्होंने कहा कि वास्तविक महानता तभी उभरती है, जब संस्कृति, ज्ञान और मूल्य एक साथ विकसित होते हैं।
केवल परीक्षा और अंकों से नहीं हो शिक्षा का मूल्यांकन
उपराष्ट्रपति ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में देश में उच्च शिक्षा का अभूतपूर्व विस्तार हुआ है। उन्होंने कहा कि विभिन्न दीक्षांत समारोहों में वे अक्सर पुरुषों की तुलना में महिलाओं को अधिक डिग्रियां और पदक प्राप्त करते देखते हैं, जो एक स्वागतयोग्य परिवर्तन है।
उन्होंने कहा कि शिक्षा का मूल्यांकन केवल परीक्षाओं और अंकों के आधार पर नहीं किया जाना चाहिए। शिक्षा का वास्तविक आकलन विद्यार्थियों की स्वतंत्र रूप से सोचने, प्रभावी ढंग से संवाद करने, मिल-जुलकर काम करने और जीवनभर सीखते रहने की क्षमता से होना चाहिए।
उन्होंने बहुविषयक शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार और मूल्य आधारित शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए तमिलनाडु केंद्रीय विश्वविद्यालय की सराहना की। उन्होंने कहा कि बदलती दुनिया में केवल ज्ञान प्राप्त कर लेना पर्याप्त नहीं है। विद्यार्थियों के लिए जीवनभर सीखते रहना, नवाचार करना और बदलती परिस्थितियों के अनुसार स्वयं को ढालना आवश्यक है।
सार्वजनिक परीक्षाओं की निष्पक्षता बनाए रखना जरूरी
उपराष्ट्रपति ने संसद द्वारा हाल ही में पारित सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक का उल्लेख करते हुए कहा कि परीक्षाओं में अनुचित साधनों पर रोक लगाना और ईमानदार विद्यार्थियों के हितों की रक्षा करना सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
झारखंड के राज्यपाल के रूप में अपने कार्यकाल को याद करते हुए उन्होंने बताया कि उस दौरान झारखंड सरकार ने इसी प्रकार का एक विधेयक पारित किया था। तत्कालीन राज्यपाल के रूप में उन्होंने उस विधेयक पर तुरंत हस्ताक्षर कर उसे कानून का रूप दिया था।
उन्होंने कहा कि अच्छे और ईमानदार लोगों के हितों की रक्षा के लिए गलत काम करने वालों को दंडित किया जाना जरूरी है। सार्वजनिक परीक्षाओं की निष्पक्षता और विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए कड़े उपाय किए जाने चाहिए।
‘ज्ञान के उपभोक्ता नहीं, निर्माता बनेंÓ
स्नातक छात्रों का आह्वान करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि वे ज्ञान के केवल उपभोक्ता बनने के बजाय ज्ञान के निर्माता बनें। उन्होंने विद्यार्थियों से नकल करने वालों के बजाय नवप्रवर्तक और अनुयायी के बजाय नेता बनने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत वर्ष 2047 तक विकसित भारत बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने युवाओं से राष्ट्र प्रथम की भावना को सर्वोपरि रखने तथा देश के विकास के लिए अपने ज्ञान, कौशल और नेतृत्व क्षमता का उपयोग करने का आह्वान किया।
नशीले पदार्थों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की अपील
उपराष्ट्रपति ने पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों से मादक पदार्थों के तस्करों तथा नशीले पदार्थों के खतरे को बढ़ावा देने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि नशीले पदार्थों का दुरुपयोग केवल व्यक्ति का जीवन बर्बाद नहीं करता, बल्कि इससे परिवार और पूरा समाज भी प्रभावित होता है।
उन्होंने कहा कि युवाओं को नशीले पदार्थों के खतरे से बचाना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने विद्यार्थियों से ‘नशीली दवाओं को ना कहेंÓ की अपील दोहराते हुए कहा कि वे अपने मित्रों को भी मादक पदार्थों के सेवन से दूर रहने के लिए प्रेरित करें।
1,103 विद्यार्थियों को मिली डिग्री
तमिलनाडु केंद्रीय विश्वविद्यालय के 11वें दीक्षांत समारोह में कुल 1,103 स्नातकों को डिग्रियां प्रदान की गईं। इनमें शैक्षणिक उत्कृष्टता के लिए 50 स्वर्ण पदक विजेता भी शामिल रहे। कुल स्नातकों में 616 छात्राएं हैं, जबकि 50 स्वर्ण पदकों में से 37 स्वर्ण पदक छात्राओं ने हासिल किए।
समारोह के समापन पर उपराष्ट्रपति ने सभी स्नातकों को उनके उज्ज्वल भविष्य, सफलता, संतुष्टिपूर्ण जीवन, अच्छे स्वास्थ्य और समाज में सार्थक बदलाव लाने के लिए शुभकामनाएं दीं।
