नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र से पहले परिसीमन विधेयक को लेकर सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के नेता संजय राउत ने संकेत दिए हैं कि यदि केंद्र सरकार विपक्ष के सुझावों को स्वीकार करती है, तो उनकी पार्टी विधेयक का समर्थन करने पर विचार कर सकती है। 20 जुलाई से शुरू होने वाले संसद के मानसून सत्र में केंद्र सरकार द्वारा परिसीमन विधेयक पेश किए जाने की संभावना जताई जा रही है। ऐसे में विभिन्न राजनीतिक दलों की रणनीति और रुख पर सभी की नजर बनी हुई है। नागपुर में मीडिया से बातचीत के दौरान संजय राउत ने कहा कि विपक्ष मौजूदा स्वरूप में परिसीमन विधेयक का विरोध करेगा, लेकिन यदि सरकार इसमें जरूरी संशोधन करती है और विपक्ष की आपत्तियों को दूर करती है, तो पार्टी अपने रुख पर पुनर्विचार कर सकती है।
इससे पहले राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) की सांसद सुप्रिया सुले ने भी कहा था कि उनकी पार्टी विधेयक का अध्ययन करने के बाद ही अंतिम फैसला करेगी। उन्होंने कहा था कि यदि सभी राज्यों में लोकसभा सीटों की संख्या समान रूप से 50 प्रतिशत बढ़ाने का प्रस्ताव होगा, तो इसका समर्थन करने पर विचार किया जा सकता है। परिसीमन विधेयक को लेकर विपक्षी दलों के अलग-अलग रुख सामने आने से राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं। माना जा रहा है कि मानसून सत्र के दौरान इस मुद्दे पर सरकार और विपक्ष के बीच व्यापक बहस देखने को मिल सकती है। फिलहाल केंद्र सरकार की ओर से परिसीमन विधेयक के अंतिम मसौदे या उसे संसद में पेश किए जाने को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
