सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर भारी पड़ी ‘धारा 122’: ट्रंप ने कैसे पलटी हारी हुई बाजी?

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वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ पर शुक्रवार को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने करारा वार करते हुए पूरी तरह से अवैध करार दिया और रद्द कर दिया। हालांकि इसके तुरंत बाद ट्रंप ने सभी देशों पर 150 दिनों की अवधि के लिए अमेरिका में आयातित सामान पर 10 प्रतिशत का अस्थायी टैरिफ लगाने का एलान किया। यह शुल्क 24 फरवरी से लागू होगा। बताया जा रहा है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के उलट ट्रंप ने अमेरिकी कानून की धारा 122 का उपयोग करते हुए यह एलान किया। इस बात की जानकारी व्हाइट हाउस ने एक फैक्टशीट जारी कर दी। फैक्टशीट में बताया गया है कि राष्ट्रपति ट्रंप ने ट्रेड एक्ट 1974 की धारा 122 के तहत यह कदम उठाया है। इसके जरिए राष्ट्रपति कुछ आधारभूत अंतरराष्ट्रीय भुगतान समस्याओं को दूर करने के लिए अस्थायी आयात शुल्क और विशेष प्रतिबंध लगा सकते हैं। आपको बता दें कि अमेरिकी कानून धारा 122 के तहत दुनियाभर पर लगाए गए दस प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ 150 दिनों के बाद अपने आप समाप्त हो जाएंगे, जब तक कि कांग्रेस उन्हें बढ़ाने के लिए वोट न करे। वहीं विशेषज्ञों का कहना है कि राष्ट्रपति चाहें तो समय से पहले भुगतान संतुलन आपातकाल की घोषणा कर इन उपायों को दोबारा लागू कर सकते हैं। व्हाइट हाउस की ओर से जारी फैक्टशीट में बताया गया है कि इस टैरिफ की घोषणा के बाद कुछ जरूरी वस्तुओं पर यह शुल्क लागू नहीं होगा। इनमें कुछ महत्वपूर्ण खनिज और धातुएं, ऊर्जा और ऊर्जा उत्पाद, प्राकृतिक संसाधन और उर्वरक, कृषि उत्पाद, फार्मास्यूटिकल्स और संबंधित सामग्री और कुछ इलेक्ट्रॉनिक्स और यात्री वाहन शामिल है।

हालांकि राष्ट्रपति ट्रंप ने अपनी टैरिफ नीति का बचाव करते हुए कई बाड़ी बातें कही। उन्होंने जोर दिया कि अमेरिका को इन दिनों आधारभूत अंतरराष्ट्रीय भुगतान समस्याओं (व्यापार घाटे) का सामना करना पड़ रहा है। घरेलू उत्पादन में कमी के कारण अमेरिका को अधिकांश जरूरतों की वस्तुएं विदेशों से आयात करनी पड़ती हैं, जिससे डॉलर अमेरिका की अर्थव्यवस्था से बाहर चला जाता है। ट्रंप ने अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय को आदेश दिया है कि वह धारा 301 के तहत कुछ ऐसे विदेशी कानून, नीतियां और प्रथाएं जांचें जो अमेरिकी व्यापार पर गलत प्रभाव डालती हैं या उसे रोकती हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, धारा 122 के तहत टैरिफ लगाने के लिए औपचारिक जांच की जरूरत नहीं होती, जिससे राष्ट्रपति तुरंत कार्रवाई कर सकते हैं। इस कदम से अमेरिका अपने व्यापार घाटे और भुगतान संतुलन की चुनौतियों का सामना करने की कोशिश कर रहा है, जबकि वैश्विक व्यापार पर भी इसके असर पड़ने की संभावना है। वहीं दूसरी ओर अमेरिका के वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने स्पष्ट किया है कि शुल्क नीति यानी टैरिफ राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आर्थिक रणनीति का अहम हिस्सा बना रहेगा। सर्वोच्च न्यायालय ने प्रशासन को एक विशेष कानूनी प्रावधान के तहत टैरिफ लगाने के अधिकार के उपयोग पर रोक लगा दी है। हालांकि वित्त मंत्री ने संकेत दिया इससे सरकार की व्यापक व्यापारिक नीति में कोई मूलभूत बदलाव नहीं आएगा।

डलास के इकोनॉमिक क्लब में बोलते हुए वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने सीधे तौर पर अदालत के फैसले पर बात की। उन्होंने कहा कि छह न्यायाधीशों ने स्पष्ट रूप से फैसला सुनाया है कि आईईईपीए (अंतर्राष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्तियां अधिनियम) के तहत मिलने वाले अधिकारों का इस्तेमाल एक डॉलर भी राजस्व जुटाने के लिए नहीं किया जा सकता है। उन्होंने कोर्ट के इस फैसले को झटका बताने वाले आलोचकों को करारा जवाब दिया। बेसेंट ने कहा कि डेमोक्रेट्स, गलत जानकारी देने वाले मीडिया संस्थानों और हमारे औद्योगिक आधार को तबाह करने वाले लोगों के बेबुनियाद जश्न के बावजूद, अदालत ने राष्ट्रपति ट्रंप के टैरिफ के खिलाफ फैसला नहीं सुनाया है। इसके अलावा उन्होंने निरंतरता का संकेत भी दिया।

उन्होंने कहा कि यह प्रशासन आईईईपीए टैरिफ को बदलने के लिए वैकल्पिक कानूनी अधिकारों का सहारा लेगा। उन्होंने धारा 232 और धारा 301 के तहत टैरिफ से संबंधित अधिकारों का हवाला दिया, जिन्हें उन्होंने हजारों कानूनी चुनौतियों के माध्यम से मान्य बताया। बेसेंट ने आगे कहा कि ट्रेजरी के अनुमानों से पता चलता है कि धारा 122 के अधिकार का उपयोग, संभावित रूप से बढ़ाई गई धारा 232 और धारा 301 के टैरिफ के साथ मिलकर, 2026 में टैरिफ राजस्व में लगभग कोई बदलाव नहीं लाएगा। उनकी इन बातों से स्पष्ट है कि व्यापार प्रवर्तन और टैरिफ का प्रभाव आर्थिक सुरक्षा एजेंडा का अभिन्न अंग बना हुआ है। उन्होंने कहा कि आर्थिक सुरक्षा वह आधार है जो किसी देश को अपने लोगों की सुरक्षा के अपने सबसे बुनियादी दायित्व को पूरा करने में सक्षम बनाता है।

इसके साथ ही उन्होंने तर्क दिया कि संयुक्त राज्य अमेरिका को औद्योगिक क्षमता को बहाल करना चाहिए और विदेशी आपूर्ति शृंखलाओं पर अत्यधिक निर्भरता से उत्पन्न कमजोरियों को कम करना चाहिए। ‘चीन संकट’ का जिक्र करते हुए बेसेंट ने कहा कि अमेरिका ने 1999 और 2011 के बीच लगभग 6 मिलियन विनिर्माण नौकरियां खो दीं, जिससे रणनीतिक उद्योग और प्रोडक्टिव फ्लेक्सबिलिटी कमजोर हो गया। उन्होंने कहा कि हमारी नीतियों ने कंपनियों को अपनी सोर्सिंग रणनीतियों का पुनर्मूल्यांकन करने और अमेरिकी विनिर्माण और रणनीतिक क्षेत्रों में खरबों डॉलर का नया निवेश करने के लिए मजबूर किया है।