बच्चों में बढ़ती मोबाइल की लत बनी चिंता, विशेषज्ञों ने दी संतुलित दिनचर्या की सलाह

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नई दिल्ली। डिजिटल दौर में स्मार्टफोन और टैबलेट बच्चों की रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुके हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि अत्यधिक स्क्रीन टाइम बच्चों के मानसिक, शारीरिक और सामाजिक विकास पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। बदलती लाइफस्टाइल के बीच यह समस्या अभिभावकों के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही है। बाल विकास विशेषज्ञों के अनुसार, कई बच्चे अपना अधिकांश समय मोबाइल पर वीडियो देखने, गेम खेलने और ऑनलाइन कंटेंट में बिताते हैं। इससे उनकी एकाग्रता प्रभावित हो सकती है, नींद की समस्या बढ़ सकती है और सामाजिक व्यवहार में भी बदलाव देखने को मिल सकता है। साथ ही, आउटडोर गतिविधियों में कमी के कारण शारीरिक फिटनेस पर भी असर पड़ता है।

विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि माता-पिता बच्चों के स्क्रीन टाइम की सीमा तय करें और उन्हें खेलकूद, किताबें पढ़ने तथा रचनात्मक गतिविधियों में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करें। इससे बच्चों का मानसिक और शारीरिक विकास बेहतर हो सकता है। तकनीक आज के समय की आवश्यकता है, लेकिन इसका संतुलित और जिम्मेदार उपयोग ही बच्चों के स्वस्थ भविष्य के लिए जरूरी माना जाता है। परिवार का सकारात्मक माहौल और अभिभावकों की सक्रिय भूमिका बच्चों में अच्छी आदतें विकसित करने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती है।