‘वोट चोरी’ पर राहुल का नया दांव: राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद दावा- मुर्मू ने बात को खारिज नहीं किया

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नई दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी के नेतृत्व में विपक्षी नेताओं का एक प्रतिनिधिमंडल शुक्रवार शाम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मिला। राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद राहुल गांधी ने कहा, “पूरा देश जानता है कि वोट चोरी हो रही है। नरेंद्र मोदी इसके मुख्य सूत्रधार हैं, जबकि अमित शाह और ज्ञानेश कुमार इसे अंजाम दे रहे हैं। आज भारत की राष्ट्रपति ने इस तथ्य को खारिज नहीं किया।”

राहुल गांधी ने कहा कि ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आगामी 12 अक्तूबर को सीजेआई सूर्यकांत को ज्ञापन सौंपेंगे। इससे पहले संसद भवन से मार्च निकाल रहे विपक्षी गठबंधन इंडिया के अन्य सांसदों को पुलिस ने विजय चौक पर रोक दिया था। राष्ट्रपति भवन को प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों के नाम पहले ही भेज दिए गए थे। प्रतिनिधिमंडल राष्ट्रपति मुर्मू को कथित वोट चोरी के मुद्दे पर ज्ञापन सौंपने के लिए गया है।

किन नेताओं ने की राष्ट्रपति मुर्मू से मुलाकात?
खरगे, राहुल गांधी और ममता बनर्जी के अलावा प्रतिनिधिमंडल में जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की नेता सुप्रिया सुले, राष्ट्रीय जनता दल के मनोज झा, वीसीके प्रमुख थोल. थिरुमावलवन, इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के ईटी मोहम्मद बशीर, माकपा महासचिव एमए बेबी और भाकपा के डी राजा भी शामिल थे।

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मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर विपक्षी दलों के सांसदों मे राष्ट्रपति भवन के लिए शुक्रवार की रात ‘लोकतंत्र बचाओ’ मार्च निकाला। इससे पहले इंडिया गठबंधन के सांसद संविधान सदन के सेंट्रल हॉल में एकत्र हुए। यहां उन्होंने कथित “वोट चोरी” के खिलाफ आंदोलन को आगे बढ़ाने और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग को लेकर अपनी रणनीति पर चर्चा की।

राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद क्या बोले मल्लिकार्जुन खरगे?
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात के बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा, “हमारे गठबंधन के सहयोगी दलों के नेताओं ने राष्ट्रपति से मुलाकात की और उन्हें एक ज्ञापन सौंपा। हम विशेष रूप से चार दिन पहले शुरू किए गए वोट चोरी के खिलाफ आंदोलन के बारे में राष्ट्रपति को जानकारी देने गए थे। हमने उनके सामने अपनी बात विस्तार से रखी। हमने वोट चोरी के मुद्दे और ज्ञानेश कुमार की ओर से की गई गंभीर गलती को प्रमुखता से उठाया। हमने मांग की कि ईवीएम को हटाकर बैलेट पेपर के जरिए चुनाव कराए जाएं।”

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उन्होंने आगे कहा, “इसके अलावा, राष्ट्रपति ने वोट चोरी की घटनाओं से जुड़े सबूत मांगे। हम फिलहाल इन सबूतों को एकत्र कर रहे हैं और उन्हें सौंपेंगे। हम अन्य सभी प्रासंगिक जानकारियां भी उपलब्ध कराएंगे। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि हमने राष्ट्रपति के सामने यह मुद्दा उठाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह देश के लोकतंत्र को नष्ट करने पर आमादा हैं और इस दिशा में सक्रिय रूप से कदम उठा रहे हैं।” खरगे ने कहा, “राष्ट्रपति ने हमारी बातें ध्यानपूर्वक सुनीं। उन्होंने कहा कि वह इस मामले की गहनता से जांच करेंगी, संबंधित पक्षों से विचार-विमर्श करेंगी और उचित कदम उठाने के बारे में निर्णय लेंगी।”

ममता बनर्जी ने दी क्या प्रतिक्रिया?
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात के बाद पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा, “हमने राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंप दिया है। हमने इस मुलाकात को सकारात्मक नजरिये से देखा है। उन्होंने कहा कि वह मामले की जांच करेंगी और पूरे विवरण को देखेंगी। इसके लिए उन्हें सबूतों की जरूरत है। उन्होंने हमसे सबूत भेजने को कहा है, जिस पर हमने सहमति जताई है।”

उन्होंने कहा, “पूरा देश इस मुद्दे को लेकर चिंतित है। संविधान के संरक्षक के रूप में आपको उचित ध्यान देना चाहिए, ताकि देश में लोकतंत्र कायम रहे। राष्ट्रपति का रुख काफी सकारात्मक रहा। उन्होंने हमारी बातों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वह मामले की जांच करेंगी।”

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विजय चौक पर विपक्षी सांसदों का प्रदर्शन
राष्ट्रपति भवन की ओर मार्च के दौरान इंडिया ब्लॉक के कई सांसदों और नेताओं ने विजय चौक पर केंद्र सरकार और सीईसी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नारेबाजी की। इंडिया गठबंधन के सांसदों ने “लोकतंत्र बचाओ” का बड़ा बैनर लेकर संसद भवन से विजय चौक तक मार्च निकाला। हालांकि, वहां पहले से बैरिकेडिंग कर तैनात पुलिसकर्मियों ने उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया।

क्या जारी रहेगा विपक्ष का आंदोलन?
विपक्षी नेताओं ने शुक्रवार को दिल्ली में लोकतांत्रिक विरोध प्रदर्शनों पर पाबंदियां लगाए जाने का आरोप लगाया। संसद पहुंचे कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने कहा कि विपक्ष अपना आंदोलन जारी रखेगा। उन्होंने सरकार पर तानाशाही रवैया अपनाने का आरोप लगाया।

वेणुगोपाल ने कहा, “हम जो भी कदम उठाने का फैसला करेंगे, उसके बारे में आपको बताएंगे। जैसा कि हमने कल कहा था, हम आंदोलन जारी रखेंगे। परसों तक हम अपने फैसले पर कायम रहेंगे।” राष्ट्रीय राजधानी में सार्वजनिक परिवहन और लोगों की आवाजाही पर पाबंदियां लगाए जाने का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा, “दिल्ली में अघोषित आपातकाल लागू है। सभी ट्रेनें और मेट्रो स्टेशन बंद कर दिए गए हैं। सरकार पूरी तरह डरी हुई है।”

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रद्द हो ज्ञानेश कुमार को मिला कानूनी संरक्षण : कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा
कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने कहा, “10 सदस्य ज्ञापन सौंपने के लिए अंदर जा रहे हैं। हमारा शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा। हमारा आंदोलन चलता रहेगा और जब तक हम अपना लक्ष्य हासिल नहीं कर लेते, तब तक नहीं रुकेगा। हमारा लक्ष्य ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा, एसआईआर पर रोक लगाना, 13.8 करोड़ लोगों के नाम मतदाता सूची में बहाल करना और बैलेट पेपर से चुनाव कराना है। इसके अलावा, संसद में पारित उस प्रावधान को भी रद्द किया जाना चाहिए, जिसके तहत ज्ञानेश कुमार को आजीवन कानूनी संरक्षण दिया गया है।”

ममता बनर्जी भी पहुंची संसद
पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी संसद पहुंचीं। उन्होंने कहा कि विपक्षी नेता आपस में चर्चा करने के बाद आगे की रणनीति तय करेंगे। उन्होंने कहा, “हम सभी एक साथ बैठेंगे और फिर आपको आगे की रणनीति के बारे में बताएंगे।”

ममता बनर्जी ने कोलकाता से चलने वाली राजधानी एक्सप्रेस समेत कई ट्रेनों को रद्द होने पर कहा, “ट्रेनों को रद्द किया जाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। कोलकाता से भी राजधानी एक्सप्रेस समेत कई ट्रेनें रद्द कर दी गई हैं। छात्र और युवा वास्तव में संकट का सामना कर रहे हैं।”

राष्ट्रपति से मुलाकात के लिए क्यों मांगा था समय?
विपक्षी दल राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मिलकर चुनाव आयोग और एसआईआर से जुड़े मुद्दे उठाना चाहते थे। कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल के मुताबिक, राष्ट्रपति से मुलाकात के लिए पहला अनुरोध दो अक्तूबर को भेजा गया था। विपक्ष ने 15 सांसदों के प्रतिनिधिमंडल के लिए समय मांगा था। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, राष्ट्रपति से मुलाकात के लिए 10 सांसदों के प्रतिनिधिमंडल को समय दिए जाने की बात सामने आई है।

एसआईआर और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ विपक्ष का प्रदर्शन
विवाद मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को लेकर है। विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग की इस प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि मतदाता सूची में बदलाव के कारण बड़ी संख्या में लोगों के मतदान के अधिकार पर असर पड़ सकता है। इंडिया ब्लॉक के नेता मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।

तीन दिन से सड़कों पर उतर रहे विपक्षी सांसद
इंडिया ब्लॉक का प्रदर्शन छह अक्तूबर को चुनाव आयोग के कार्यालय की ओर मार्च करने की कोशिश के साथ तेज हुआ। इस दौरान पुलिस ने राहुल गांधी और अन्य विपक्षी सांसदों को हिरासत में लिया था। अगले दिन भी विपक्षी सांसदों ने प्रदर्शन जारी रखा और जंतर-मंतर की ओर जाने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक दिया। इसके बाद आठ अक्तूबर को विपक्षी नेताओं ने महात्मा गांधी के स्मारक राजघाट पर धरना दिया।