काँकेर क्षेत्र के पहले होम्योपैथिक डॉक्टर मंगपति राव

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काँकेर । स्वतंत्रता के बाद लगभग 50 के दशक में आन्ध्रप्रदेश से काँकेर पहुंचे स्व. मंगपति राव उस समय की रेलवे की आउट एजेंसी कंपनी जो ओडिशा, आन्ध्रप्रदेश में फल फूल रही थी, उसकी ब्रांच काँकेर में लायी गयी। आन्ध्रप्रदेश के होनहार तीन भाषाओ के ज्ञाता (अंग्रेज़ी, तेलुगु, हिन्दी) इसके अलावा श्रेष्ठ शिकारी और अनेक हुनरों वाले अच्छे व्यक्तित्व के धनी स्व. मंगपति राव साहब को काँकेर तहसील में आउट एजेंसी की ब्रांच खोलने मैनेजर की हैसियत से आँध्रप्रदेश से काँकेर भेजा गया । वर्तमान में जहां ज़िला सहकारी बैंक स्थित है, राजा साहब के भवन को कंपनी ने किराए पर लेकर एस. मंगपति राव साहब को मैनेजर के पद पर भेजा, जहां राव साहब ने बखूबी अपने कर्तव्य को अंतिम सांस तक निभाया।

कचहरी के पास उस आलीशान भवन में राव साहब के नाम से प्रसिद्ध स्व. मंगपति राव मैनेजर का पद सम्हालते हुए शिकार खेलने का शौक भी पूरा करते थे। समाज सेवी प्रवृत्ति के होने के कारण उनकी होम्योपैथी में भी मास्टरी होने से राव साहब ऑफिस कार्य के अलावा सुबह एक घंटा और शाम एक घंटा निःशुल्क होम्योपैथी दवाइयां देना प्रारम्भ किए । देखते ही देखते उनकी प्रसिद्धि इतनी बढ़ गईं कि काँकेर की जनता की भीड़ सरकारी अस्पताल में कम किन्तु डॉ राव साहब के आउट एजेंसी ऑफिस में अधिक होने लगी। उस समय उनके कई कनिष्ठ भी उनसे होम्योपैथी प्रेक्टिस कर उसमें पारंगत हुए जिनमें स्व. सीताराम गुरुजी (रजक )एवं पूरनसिंह परिहार राव साहब के सम्पर्क में थे ,जो आज भी राव साहब के इतिहास के साक्षी हैं। बाद में गलत व्यसन के कारण अल्पायु में ही लिवर गल जाने से राव साहब का देहावसान हो गया।

उनके ज्येष्ठ पुत्र तिरुपति राव (देव सेनापति ) ने अचानक पिता का साया उठ जाने से पारिवारिक ज़िम्मेदारी अपने ऊपर ली । ईश्वर की कृपा तथा पिता के आशीर्वाद से आज वे नई दिल्ली में इस्कॉन अंतर्राष्ट्रीय संस्था में एक बड़े पद पर हैं। छोटे पुत्र मोहन सेनापति प्रदेश के सुविख्यात योग प्रशिक्षक हैं। दुःख की बात यह है कि, उगते सूरज को सभी पूजते हैं किन्तु डूबते सूरज की ओर कोई देखना भी नहीं चाहता। इतने बड़े समाज सेवी प्रसिद्ध डॉक्टर अपने वेतन से खर्च कर गरीबों को निःशुल्क दवाइयां देने के बावजूद आज न तो राव साहब (सेनापति मंगपति राव ) के नाम से कोई रोड या गली है और न ही कोई स्मारक है। नगर पालिका और प्रशासन यदि अपनी इच्छा शक्ति का परिचय दें, तो जहां राव साहब की आउट एजेंसी थी , उस चौक का नामकरण अथवा वहां से कचहरी गेट तक जाने वाले मार्ग का नामकरण सेनापति जी के नाम पर सरलता से किया जा सकता है। आशा की जाती है कि काँकेर के नागरिक तथा शासकीय सेवक इस ओर अवश्य ध्यान देंगे।