दुर्ग। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में विशेष पॉक्सो न्यायालय ने सख्त फैसला सुनाया है। अदालत ने शादी का झांसा देकर नाबालिग को अपने साथ ले जाने और दुष्कर्म करने के आरोपी 22 वर्षीय दीपक कुमार जाटव को दोषी ठहराते हुए 20 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही न्यायालय ने पीड़िता को 5 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश भी दिया है। यह फैसला अपर सत्र न्यायाधीश, चतुर्थ एफटीएससी एवं विशेष न्यायालय (पॉक्सो) दुर्ग के पीठासीन अधिकारी अनिष दुबे ने सुनाया। शासन की ओर से विशेष लोक अभियोजक रूपवर्षा दिल्लीवार ने मामले की पैरवी की।
इंस्टाग्राम से हुई थी पहचान
अदालत में पेश किए गए रिकॉर्ड के अनुसार, पीड़िता और आरोपी की पहचान सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम के माध्यम से हुई थी। दोनों के बीच बातचीत शुरू हुई, जिसके बाद आरोपी ने नाबालिग को शादी का झांसा दिया। अभियोजन पक्ष के अनुसार, आरोपी ने पीड़िता को अपने साथ चलने के लिए तैयार किया। इसके बाद 17 जुलाई 2025 को उसे पावर हाउस रेलवे स्टेशन बुलाया गया। वहां से आरोपी उसे रायपुर होते हुए ट्रेन से प्रयागराज और फिर नोएडा लेकर गया।
नोएडा में किया दुष्कर्म
पुलिस जांच के मुताबिक, आरोपी पीड़िता को नोएडा के फेस-1 थाना क्षेत्र स्थित बागवानी मार्केट के पास एक किराए के कमरे में ले गया। वहां 17 जुलाई से 23 जुलाई 2025 के बीच आरोपी ने कई बार नाबालिग के साथ दुष्कर्म किया। इस बीच 19 जुलाई 2025 को पीड़िता की मां ने वैशाली नगर थाना में बेटी के लापता होने की शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की।
तकनीकी साक्ष्यों से हुई बरामदगी
पुलिस ने मोबाइल लोकेशन और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपी और पीड़िता की तलाश शुरू की। जांच के दौरान पुलिस टीम 23 जुलाई 2025 को नोएडा पहुंची, जहां से पीड़िता को बरामद कर लिया गया। मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने पीड़िता की उम्र साबित करने के लिए जन्म प्रमाण पत्र, स्कूल रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेज अदालत में प्रस्तुत किए। इन दस्तावेजों के आधार पर कोर्ट ने माना कि घटना के समय पीड़िता की उम्र 15 वर्ष 5 माह 22 दिन थी। कानून के अनुसार नाबालिग की सहमति को ऐसे मामलों में मान्यता नहीं दी जा सकती।
पीड़िता का बयान माना विश्वसनीय
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि पीड़िता का बयान, बरामदगी की कार्रवाई, दस्तावेज और अन्य साक्ष्य मामले को साबित करने के लिए पर्याप्त हैं। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल फोरेंसिक रिपोर्ट में किसी विशेष साक्ष्य के नहीं मिलने से अपराध समाप्त नहीं हो जाता। यदि अन्य परिस्थितिजन्य और प्रत्यक्ष साक्ष्य मजबूत हैं तो आरोपी को दोषी ठहराया जा सकता है।
बच्चों के खिलाफ अपराध गंभीर चिंता का विषय
फैसला सुनाते हुए अदालत ने बच्चों के खिलाफ होने वाले अपराधों को बेहद गंभीर और समाज के लिए चिंताजनक बताया। न्यायालय ने कहा कि ऐसे अपराधों से बच्चों के मानसिक और शारीरिक विकास पर गहरा प्रभाव पड़ता है। हालांकि आरोपी की उम्र 22 वर्ष होने के कारण उसे कानून में निर्धारित न्यूनतम कठोर सजा दी गई। विशेष न्यायालय ने आरोपी दीपक कुमार जाटव को पॉक्सो एक्ट की धारा 6 के तहत 20 वर्ष के सश्रम कारावास और 1 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। इसके अलावा भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 87 के तहत भी आरोपी को 3 वर्ष के सश्रम कारावास और 500 रुपये अर्थदंड की सजा दी गई है। अदालत ने पीड़िता के पुनर्वास और सहायता के लिए 5 लाख रुपये मुआवजा राशि देने का आदेश जारी किया है।
