यरूशलम। इस्राइल में आम चुनाव को अब महज तीन दिन का समय रह गया है। इस बीच सियासी दलों ने अपने प्रचार अभियान को तेज कर दिया है। इस्राइल में इस बार 38 सियासी दल मैदान में हैं, जिनमें सत्तासीन लिकुड पार्टी, विपक्षी याशर और ब्लू एंड व्हाइट पार्टी सबसे आगे हैं। हालांकि, अगर प्रधानमंत्री पद के लिए मुकाबले की बात की जाए तो नेतन्याहू के लिए सबसे बड़ी चुनौती एक साल पहले अस्तित्व में आए दल याशर के मुखिया गादी आइजेनकॉट बनते दिख रहे हैं। आइजेनकॉट की लोकप्रियता कितनी तेजी से बढ़ी है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कई चुनावी सर्वेक्षणों में उन्हें नेतन्याहू से आगे बताया जा रहा है।
ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर गादी आइजेनकॉट कौन हैं? उनका व्यक्तिगत और पारिवारिक इतिहास क्या रहा है? आइजेनकॉट का सैन्य करियर कैसा रहा है? कैसे वे सेना प्रमुख बनने के बाद सियासत में आए और नेतन्याहू के अंतर्गत काम करते रहे? अब इस्राइल के पीएम पद के लिए उनका उभार कैसे हुआ और नेतन्याहू के खिलाफ उनकी दावेदारी कितनी मजबूत है? आइये जानते हैं…
पहले जानें- कौन हैं गादी आइजेनकॉट?:
- गादी आइजेनकॉट मोरक्को से आए मिजराही यहूदी अप्रवासी माता-पिता के बेटे हैं। उनका पालन-पोषण इस्राइल के तिबेरियास और इलात शहरों में एक साधारण कामकाजी परिवार में हुआ। वे अपने माता-पिता के नौ बच्चों में दूसरे नंबर पर आते हैं।
- आइजेनकॉट की सेना में भर्ती हाईस्कूल के बाद ही हो गई थी। अपने चार दशक लंबे सैन्य करियर के दौरान उन्होने पढ़ाई जारी रखी और तेल अवीव यूनिवर्सिटी से इतिहास में बीए और फिर हाइफा यूनिवर्सिटी से राजनीति विज्ञान में परास्नातक हुए।
- गाजा युद्ध के दौरान उनके परिवार को भारी व्यक्तिगत क्षति पहुंची। दिसंबर 2023 में उनके सबसे छोटे बेटे, गाल मीर आइजेनकॉट (25) की गाजा में एक सैन्य अभियान के दौरान हमास के बम की चपेट में आकर मौत हो गई थी।
- इसके अलावा, युद्ध के दौरान ही उनके दो भतीजों की भी मौत हुई। अपने बेटे की कब्र पर उन्होंने यह संकल्प लिया था कि उनके परिवार का बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा।
- 1978 में इस्राइली सेना की गोलानी ब्रिगेड में एक सामान्य पैदल सैनिक के रूप में शुरुआत करने वाले आइजेनकॉट 40 वर्षों के लंबे सैन्य करियर के दौरान अलग-अलग पदों पर रहते हुए वे 2015 से 2019 तक इस्राइल रक्षा बलों (आईडीएफ) के चीफ ऑफ स्टाफ पद तक पहुंचे।
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कैसे एक साधारण सैनिक से इस्राइल के सेना प्रमुख तक का सफर तय किया?:
- गादी आइजेनकॉट का सैन्य करियर लगभग 40 वर्षों का रहा है, जिसमें वे इस्राइल रक्षा बलों (आईडीएफ) के सबसे निचले पद से सर्वोच्च पद तक पहुंचे।
- 1978 में गोलानी ब्रिगेड में एक सामान्य पैदल सैनिक के तर पर शामिल होने के बाद वे तेजी से उभरे। इस ब्रिगेड में 1992 तक रहते हुए वे स्क्वाड लीडर से लेकर प्लाटून कमांडर तक रहे।
- 1999 में आइजेनकॉट को तत्कालीन प्रधानमंत्री इहुद बराक का सैन्य सचिव नियुक्त किया गया। 2005 में उन्हें इस्राइली अभियानों के निदेशालय में नियुक्ति मिली, जहां वे सैन्य योजनाओं का अहम हिस्सा बन गए।
- उन्होंने दुश्मन की सैन्य क्षमताओं को बिना पूर्ण युद्ध लड़े धीरे-धीरे कमजोर करने वाले गुप्त और कम-तीव्रता वाले सैन्य अभियानों की रणनीति को बढ़ावा दिया, जिससे दुश्मन अंदर से कमजोर हो जाए।
- गादी आइजेनकॉट की युद्ध के मैदान में एक बार फिर एंट्री 2006 में लेबनान युद्ध के दौरान हुई, जब वे उत्तरी कमान के प्रमुख बनाए गए। इसी दौरान उन्होंने अपना प्रचलित दहिया सिद्धांत सामने रखा।
- वे 2015 से 2019 तक बेंजामिन नेतन्याहू के कार्यकाल के दौरान इस्राइल रक्षा बलों के चीफ ऑफ स्टाफ यानी सेना प्रमुख रहे। इस दौरान उन्होंने सैन्य अनुशासन और नैतिकता के नए पैमाने गढ़े।
- इसका एक उदाहरण 2016 में आया, जब हेब्रोन में सार्जेंट एलोर अजारिया की ओर से एक घायल फलस्तीनी को गोली मार दी गई। राजनीतिक दबाव के बावजूद तब आइजेनकॉट ने सैन्य अनुशासन और नैतिकता बनाए रखने के लिए कोर्ट-मार्शल और जांच का समर्थन किया।
- 2019 में सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद वे राजनीति में आए और 7 अक्तूबर 2023 के हमलों के बाद नेतन्याहू की आपातकालीन युद्ध कैबिनेट में शामिल हुए, जिसे उन्होंने जून 2024 में स्पष्ट युद्ध रणनीति न होने का हवाला देकर छोड़ दिया।
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क्या है ‘दुश्मन की जमीन को समतल’ करने का ‘दहिया सिद्धांत’?:
- नॉर्दर्न कमांड के प्रमुख के रूप में कार्य करते हुए उन्होंने इस्राइली सेना के लोकप्रिय दाहिया सिद्धांत की नींव रखी। इस रणनीति के तहत इस्राइल पर जहां से भी हमला हो रहा है, वहां उस हमले के जवाब में कई गुना भारी और अनुपात से ज्यादा बल के इस्तेमाल की बात कही गई थी।
- इसी दहिया सिद्धांत के तहत आइजेनकॉट ने स्पष्ट किया था कि अगर हमले आबादी वाले इलाकों से हो रहे हों, तो उन्हें भी निशाना बनाया जाना चाहिए। इसमें नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने की बात कही गई थी, जो कि अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत अवैध है।
- उनके इस दहिया सिद्धांत का पहला प्रदर्शन इस्राइल-लेबनान के 2006 के युद्ध के दौरान दिखा जब यहां के हिज्बुल्ला विद्रोही संगठन के खिलाफ जबरदस्त हमले किए और लेबनान के एक बड़े क्षेत्र को समतल कर दिया गया। हमलों में कई नागरिक ठिकाने भी निशाना बने थे और 1000 से ज्यादा लोगों की जान चली गई थी।
- इंस्टीट्यूट फॉर मिडिल ईस्ट अंडरस्टैंडिंग के मुताबिक, इस्राइली सेना ने इसके बाद समय-समय पर गाजा और लेबनान के खिलाफ दहिया सिद्धांत का इस्तेमाल किया है और बड़े स्तर पर तबाही मचाई है। इसी साल मार्च में आइजेनकॉट ने इस्राइली सरकार से लेबनान में दहिया सिद्धांत को लागू करने की मांग की थी।
कैसे सेना से सियासत में आए, नेतन्याहू के लिए कैसे बने चुनौती?:
- इस्राइली रक्षा बल में 40 साल तक अपनी सेवा देने और 2015 से 2019 तक चीफ ऑफ स्टाफ (सर्वोच्च सैन्य कमांडर) रहने के बाद वे 2019 में सेना से सेवानिवृत्त हुए।
- 2022 में उन्होंने एक और पूर्व सैन्य प्रमुख बेनी गैंट्ज के साथ मिलकर आधिकारिक तौर पर राजनीति में कदम रखा और संसद में एंट्री ली।
- 7 अक्तूबर 2023 को हमास के हमलों के बाद राष्ट्रीय संकट के दौरान वे नेशनल यूनिटी पार्टी के हिस्से के तौर पर बेंजामिन नेतन्याहू की आपात युद्ध कैबिनेट में शामिल हुए।
- गाजा युद्ध के बाद की रणनीति की कमी और 7 अक्तूबर की खुफिया चूक पर सरकारी जवाबदेही जैसे मुद्दों पर मतभेद के बाद उन्होंने जून 2024 में युद्ध कैबिनेट छोड़ दिया।
- इसके बाद वे पूरी तरह से विपक्ष में आ गए और याशर, (जिसका अर्थ है ईमानदार) पार्टी का नेतृत्व किया। वे घरेलू जवाबदेही और सैन्य सुधारों को अपना मुख्य चुनावी मुद्दा बनाकर नेतन्याहू के मुख्य प्रतिद्वंद्वी बने।
- आइजेनकॉट गाजा में अस्पष्ट युद्ध नीति, 7 अक्तूबर 2023 के हमास के हमले में सरकार की चूक, अंतरराष्ट्रीय छवि और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों को लेकर नेतन्याहू को लगातार घेर रहे हैं।
- इन मुद्दों की जनता के बीच पकड़ कितनी मजबूत है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अलग-अलग सर्वेक्षणों में उन्हें नेतन्याहू से आगे बताया जा रहा है। हालांकि, दोनों ही नेता पूर्ण बहुमत से दूर हैं।बेंजामिन नेतन्याहू से कितने अलग हैं गादी आइजेनकॉट?
- गादी आइजेनकॉट और बेंजामिन नेतन्याहू दोनों सुरक्षा और क्षेत्रीय खतरों के मामले में सख्त दृष्टिकोण रखते हैं, लेकिन चरित्र, शैली, आंतरिक नीतियों और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के मामलों में दोनों के बीच बड़े अंतर हैं।
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1. व्यक्तित्व, शैली और पृष्ठभूमि
- बेंजामिन नेतन्याहू एक अभिजात और राजनीतिक पृष्ठभूमि से आते हैं, जो अपनी रणनीतिक पॉलिश, भाषण शैली और मीडिया पर नियंत्रण के लिए जाने जाते हैं।
- वहीं, आइजेनकॉट मोरक्कन मिजराही अप्रवासी परिवार से आते हैं। उन्हें इस्राइली राजनीति में एक सादगी पसंद, सीधे और याशर छवि वाले नेता के रूप में देखा जाता है।
2. 7 अक्टूबर की जवाबदेही और शासन
- आइजेनकॉट 7 अक्तूबर 2023 के सुरक्षा नाकामी की जांच के लिए आयोग की मांग करते हैं और इसके लिए नेतन्याहू को सीधे जिम्मेदार ठहराते हैं। उन्होंने नेतन्याहू के साथ किसी भी गठबंधन या रोटेशन डील में शामिल होने से स्पष्ट इनकार किया है।
- आइजेनकॉट अति-रूढ़िवादी (हारेदी) यहूदियों के लिए अनिवार्य सैन्य सेवा छूट को खत्म करने का समर्थन करते हैं, जबकि नेतन्याहू का मौजूदा गठबंधन इस छूट की मांग करने वाले धार्मिक दलों पर निर्भर है।
3. वेस्ट बैंक और चरमपंथ पर दृष्टिकोण
याशर पार्टी के नेता ने नेतन्याहू सरकार पर बेजलेल स्मोट्रिच और इतामार बेन-ग्विर जैसे मंत्रियों के जरिए वेस्ट बैंक में यहूदी उग्रवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाया है। वे इन मंत्रियों की नीतियों को पलटने, प्रशासनिक हिरासत लागू करने और सुरक्षा एजेंसियों को चरमपंथियों पर सख्त कार्रवाई का अधिकार देने का वादा करते हैं।
4. गाजा युद्ध रणनीति और कूटनीति
- गाजा युद्ध के दौरान स्पष्ट पोस्ट-वॉर रणनीति न होने और नेतन्याहू पर राजनीतिक कारणों से युद्ध खींचने का आरोप लगाते हुए आइजेनकॉट ने जून 2024 में युद्ध कैबिनेट छोड़ दी थी।
- नेतन्याहू ने गाजा में फलस्तीनी अथॉरिटी (पीए) या किसी भी वैकल्पिक नागरिक निकाय के प्रवेश को रोक दिया था। इसके विपरीत, आइजेनकॉट हमास को सत्ता से हटाने के लिए व्यावहारिक अंतरराष्ट्रीय प्राथमिकताओं और वैकल्पिक नागरिक निकायों के साथ काम करने के पक्षधर हैं।
5. अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय गठबंधन
आइजेनकॉट का मुख्य लक्ष्य अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन और यूरोपीय सहयोगियों के साथ इस्राइल के संबंधों को फिर से मजबूत करना है।
वे मिस्र, जॉर्डन, यूएई और अन्य खाड़ी देशों के साथ संबंधों को सुधार कर ईरान के खिलाफ एक मजबूत क्षेत्रीय सुरक्षा मोर्चा बनाने पर बल देते हैं।
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दोनों के बीच इन मुद्दों पर एक राय:
आइजेनकॉट भी नेतन्याहू की तरह दो-राष्ट्र समाधान और फलस्तीनी राज्य के निर्माण का कड़ा विरोध करते हैं।
वे भी नेतन्याहू की तरह ही दुश्मन के खिलाफ भारी और अनुपात से ज्यादा बल प्रयोग को सही ठहराते हैं।
पांच सवालों में गादी आइजेनकॉट की जानकारी (FAQ):
सवाल-1: गादी आइजेनकॉट कौन हैं और इस्राइली राजनीति में उनकी क्या भूमिका है?
जवाब: गादी आइजेनकॉट इस्राइल के पूर्व सैन्य प्रमुख (आईडीएफ के चीफ ऑफ स्टाफ) हैं और वर्तमान में विपक्ष की याशर पार्टी के नेता हैं। वे आगामी इस्राइली चुनावों में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के सबसे मुख्य चुनावी प्रतिद्वंद्वी के रूप में उभरे हैं।
सवाल-2: उनका सैन्य पृष्ठभूमि और ‘दाहिया सिद्धांत’ क्या है?:
जवाब: उन्होंने 1978 में गोलानी ब्रिगेड में एक पैदल सैनिक के रूप में दाखिला लिया और 2015 से 2019 तक इस्राइल रक्षा बलों (आईडीएफ) के चीफ ऑफ स्टाफ रहे। सैन्य करियर के दौरान उन्होंने दाहिया सिद्धांत की नींव रखी, जो हमलों के जवाब में दुश्मन और उसके ठिकानों पर भारी व अनुपात से ज्यादा बल प्रयोग करने की रणनीति है।
सवाल-3: नेतन्याहू के साथ उनके मुख्य नीतिगत अंतर क्या हैं?:
जवाब: यूं तो नेतन्याहू की तरह उन्हें भी फलस्तीन के मुद्दे पर सख्त नेता माना जाता है, हालांकि कुछ मुद्दों पर उनके इस्राइली पीएम के साथ मतभेद भी हैं, जिन्हें लेकर वे लगातार नेतन्याहू को घेरते रहे हैं।
- जवाबदेही और जांच: आइजेनकॉट 7 अक्तूबर 2023 के सुरक्षा विफलताओं की जांच के लिए एक निष्पक्ष राष्ट्रीय जांच आयोग के गठन का वादा करते हैं और उन्होंने नेतन्याहू के साथ किसी भी रोटेशन समझौते या सरकार में शामिल होने से इनकार किया है।
- सैन्य भर्ती सुधार: वे अति-रूढ़िवादी (हारेदी) यहूदियों के लिए अनिवार्य सैन्य छूट समाप्त करने और सभी नागरिकों के लिए समान सैन्य सेवा का समर्थन करते हैं।
- वेस्ट बैंक में चरमपंथ: वे वेस्ट बैंक (जूडिया और समारिया) में यहूदी उग्रवाद और अराजकता पर सख्त कानून-व्यवस्था और सैन्य नियंत्रण लागू करने के पक्षधर हैं।
सवाल-4: फलस्तीनी राज्य और बस्तियों पर उनका क्या रुख है?
जवाब: आइजेनकॉट दो-राष्ट्र समाधान और स्वतंत्र फलस्तीनी राज्य के निर्माण का स्पष्ट विरोध करते हैं। हालांकि, वे वेस्ट बैंक में बस्तियों का समर्थन करते हैं, वे अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक नुकसान के कारण विवादित ई1 क्षेत्र में नई बस्तियों और अवैध चौकियों का विरोध करते हैं।
सवाल-5: उनकी पार्टी ‘याशर’ और इसका मकसद क्या है?
जवाब: ‘याशर’ का हिब्रू में अर्थ सीधा या ईमानदार होता है। उनकी पार्टी का मुख्य एजेंडा घरेलू जवाबदेही, प्रशासनिक ईमानदारी, सैन्य अनुशासन और पश्चिमी सहयोगियों के साथ इस्राइल के संबंधों को फिर से मजबूत करना है।
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