होली पर हाई अलर्ट : ड्रोन से निगरानी, 5 मिनट में पहुंचेगी पुलिस
रायपुर । राजधानी रायपुर के विभिन्न क्षेत्रों में होलिका दहन का पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। शहर के विभिन्न हिस्सों में पारंपरिक तरीके से होलिका जलाई गई और लोगों ने बुराई पर अच्छाई की जीत के रूप में पूजा-अर्चना की। कहीं -कहीं सदियों से चली आ रही मान्यताओं के साथ यह त्योहार धूमधाम से मनाया गया। कालीबाड़ी चौक सहित विभिन्न इलाकों में पारंपरिक नगाड़ों का खास बाजार सजा रहा । इन बाजारों में अलग-अलग आकार और डिज़ाइनों के नगाड़े की खरीदी-बिक्री किया गया। रायपुर में मान्यता है कि होली के त्यौहार पर नगाड़ों की गूंज के बिना जश्न अधूरा है इसलिए होली के कई दिन पहले से ही इनकी जोरदार बिक्री शुरू हो जाती है। सोमवार सुबह से ही बाजारों में रंग-गुलाल और पिचकारियों की खरीदारी के साथ ही होलिका दहन की तैयारियां शुरू हो गई थी। शहर के विभिन्न चौक-चौराहों पर इस बार अलग-अलग थीम पर होलिका की आकर्षक मूर्तियां बनाई गई हैं। जिनका दहन किया गया।

700 से अधिक स्थानों पर होलिका दहन
जानकारी के अनुसार रायपुर में करीब 700 स्थानों पर होलिका दहन किया गया। सदर बाजार में पिछले 200 सालों से एक विशेष परंपरा का पालन करते हुए सेठ नाथूराम की पूजा के साथ होलिका दहन किया गया । वहीं, शहर के पास लालपुर जैसे क्षेत्रों में अलग-अलग स्थानीय मान्यताओं के अनुसार होलिका दहन किया गया । लोग लकड़ियां उपले आदि एकत्रित कर अग्नि जलाते हैं और उसमें गेहूँ की बालियां अर्पित कर खुशहाली की कामना करते हैं।
हाई-टेक सुरक्षा व्यवस्था लागू, 3000 से ज्यादा पुलिसकर्मी तैनात
रायपुर में होली पर हाई-टेक सुरक्षा व्यवस्था लागू हो गई है। संवेदनशील इलाकों में ड्रोन लगातार निगरानी करेंगे। किसी भी विवाद पर पुलिस महज 5 मिनट में पहुंचेगी। 3000 से ज्यादा पुलिसकर्मी सोमवार शाम से तैनात रहेंगे। 60 चेकिंग पॉइंट पर ड्रिंक एंड ड्राइव और ट्रिपल सवारी पर सख्ती होगी। क्राइम ब्रांच की 150 सदस्यीय टीम अवैध नशे पर नजर रखेगी. कमिश्नर डॉ. संजीव शुक्ला ने शांतिपूर्ण होली मनाने की अपील की है।
रंगों वाली होली 4 मार्च को मनाई जाएगी
वर्ष 2026 में होलिका दहन 2 मार्च की रात को किया गया । चूँकि इस वर्ष पूरी रात भद्रा का साया रहा इसलिए सबसे शुभ समय भद्रा पुच्छ काल यानी रात 12:50 से 2:02 के बीच रहा। इसी बीच में ही होलिका दहन किया गया । इसके अलावा शाम को 6:22 से रात 8:53 बजे तक प्रदोष काल में भी दहन किया गया। वहीं, ज्योतिष आचार्य के अनुसार 3 मार्च को चंद्र ग्रहण लगने के कारण होलिका दहन का कोई अन्य समय नहीं है। 3 मार्च को सुबह 09:39 बजे से सूतक काल शुरू होने के कारण मंदिरों में पूजा बंद रहेगी।
रंगों वाली होली (धुलंडी) 4 मार्च 2026 को मनाई जाएगी।
पौराणिक कथा के अनुरूप होलिका दहन
फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि पर होलिका दहन का त्योहार मनाया जाता है। इस दिन को बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। जो हमें अपने मन के भय को दूर करके आंतरिक परिवर्तन के लिए प्रेरित करने वाला है। ऋषिकेश पंचांग की गणना के अनुसार, इस साल होलिका दहन 2 मार्च, सोमवार के दिन मनाया गया। पुराणों के अनुसार, इसी दिन हिरण्यकश्यप की बहन होलिका विष्णुजी के भक्त प्रह्लाद को अपनी गोद में लेकर जलती हुई चिता पर बैठी थी। लेकिन कुछ ऐसा संयोग बना जिससे होलिका और हिरण्यकश्यप की योजना सफल नहीं हो सकी। पौराणिक कथाओं और मान्यताओं के अनुसार, प्राचीन काल में एक हिरण्यकश्यप नामक शक्तिशाली असुर था। जिसने घोर तपस्या करके ब्रह्माजी से एक विशेष वरदान प्राप्त किया था कि न उसे कोई मनुष्य मार सके, न कोई पशु, न अंदर मारा जा सके, न बाहर, न दिन में मारा जा सके, न रात में और किसी अस्त्र शस्त्र से भी उसकी मृत्यु न हो सके। ऐसा वरदान मिलने के कारण उसने अहंकार में खुद को ईश्वर बताना शुरू कर दिया और अपने राज्य में किसी भी व्यक्ति को भगवान विष्णु की पूजा करने से मना कर दिया।
