नेत्रोत्सव के साथ जगदलपुर में गोंचा महापर्व का आगाज, दिव्य श्रृंगार में हुए भगवान जगन्नाथ के दर्शन, आज निकलेगी भव्य रथयात्रा

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जगदलपुर। बस्तर की सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान गोंचा महापर्व का शुभारंभ भगवान जगन्नाथ के नेत्रोत्सव के साथ हो गया। ऐतिहासिक जगन्नाथ मंदिर में अनशन काल (अनवसर) के बाद भगवान जगन्नाथ, बलभद्र, सुभद्रा और महालक्ष्मी का दिव्य श्रृंगार कर श्रद्धालुओं को दर्शन कराए गए। अब श्रद्धालुओं की नजर आज निकलने वाली भव्य रथयात्रा पर टिकी है। ऐतिहासिक जगन्नाथ मंदिर में नेत्रोत्सव का आयोजन पूरे विधि-विधान और श्रद्धा के साथ संपन्न हुआ। इस अवसर पर भगवान को विशेष रूप से सजाया गया और सुबह से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए मंदिर पहुंचे। मान्यता है कि अनशन काल के बाद इसी दिन भगवान पहली बार अपने भक्तों को दिव्य स्वरूप में दर्शन देते हैं।

धार्मिक मान्यता के अनुसार, नेत्रोत्सव गोंचा महापर्व की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है, क्योंकि इसके अगले दिन भगवान जगन्नाथ रथ पर सवार होकर नगर भ्रमण करते हैं, जिससे सभी वर्गों और समुदायों के लोग उनके दर्शन कर सकें। जगदलपुर का गोंचा महापर्व पुरी की विश्वप्रसिद्ध रथयात्रा की परंपरा का बस्तर में जीवंत स्वरूप माना जाता है। सदियों पुरानी इस परंपरा में सर्व समाज की भागीदारी रहती है। आयोजन को सफल बनाने में 360 आरण्यक ब्राह्मण, उत्कल ब्राह्मण और आदिवासी समाज की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है, जो सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक एकता का संदेश देती है।

भगवान जगन्नाथ, बलभद्र, सुभद्रा और महालक्ष्मी के विग्रहों के साथ आयोजित यह महापर्व बस्तर की आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि कलियुग में भगवान जगन्नाथ अपने भक्तों के बीच स्वयं आकर उन्हें दर्शन देते हैं। ऐसे में आज निकलने वाली भव्य रथयात्रा को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिल रहा है।