कॉरपोरेट जगत में हड़कंप: वेदांता ग्रुप पर ED की बड़ी रेड, अनिल अग्रवाल के ठिकानों पर ताबड़तोड़ एक्शन

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नई दिल्ली/रायपुर। देश के बड़े कॉरपोरेट घरानों से जुड़ी एक बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। दिग्गज माइनिंग और मेटल कंपनी ‘वेदांता ग्रुप’ पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शिकंजा कस दिया है। केंद्रीय एजेंसी ने फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट (FEMA) के कथित उल्लंघन के मामले में कंपनी के फाउंडर और चेयरमैन अनिल अग्रवाल के कई ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की है। यह कार्रवाई पिछले कुछ दिनों से लगातार जारी है, जिससे औद्योगिक जगत में हड़कंप मच गया है। हालांकि, इस सर्च ऑपरेशन को लेकर अभी तक ईडी या वेदांता ग्रुप की तरफ से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

यह छापेमारी ऐसे समय में हुई है जब करीब एक महीने पहले ही वेदांता ग्रुप को अपने बड़े डीमर्जर प्लान के लिए कर्जदाताओं से मंजूरी मिली थी, जिसके तहत कंपनी को पांच स्वतंत्र लिस्टेड संस्थाओं में विभाजित किया जाना है। फेमा नियमों के तहत ईडी उन मामलों की जांच करती है जहां विदेश में अवैध रूप से धन भेजने, हवाला या विदेशी निवेश के नियमों के उल्लंघन का संदेह होता है। वैसे यह पहला मौका नहीं है जब यह ग्रुप नियामक जांच के दायरे में आया हो; इससे पहले साल 2004 में भी इसकी सहयोगी कंपनी स्टरलाइट इंडस्ट्रीज को विदेशी मुद्रा नियमों के उल्लंघन का दोषी पाया गया था।

इसके साथ ही, हाल के दिनों में वेदांता ग्रुप की मुश्किलें अन्य मोर्चों पर भी बढ़ी हैं। अप्रैल 2026 में छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले में स्थित वेदांता पावर प्लांट में हुए भीषण बॉयलर ब्लास्ट हादसे में 25 लोगों की मौत के बाद अनिल अग्रवाल के खिलाफ गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज की जा चुकी है। इसके अलावा, पिछले ही महीने ओडिशा में बिना अनुमति नदी से पानी खींचने के आरोप में कंपनी पर 233 करोड़ रुपये से अधिक का भारी-भरकम जुर्माना भी लगाया गया था।