मप्र में मुख्यमंत्री की छापेमारी ! – अजय बोकिल

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मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने कार्यकाल के दो साल बाद राज्य मंत्रालय में कर्मचारियों की लेट लतीफी के खिलाफ छापेमारी अभियान छेड़ा है। कर्मचारी ईमानदारी से अपनी ड्यूटी पर आएं, पूरे समय काम करें, इस दृष्टि से इस मुहिम का जनता में सही संदेश जा रहा है, लेकिन कर्मचारियों पर इसका कितना असर होगा और कब रहेगा, कहना मुश्किल है। क्योंकि कर्मचारियों को कसने की कोशिशें तो पहले भी हुई हैं, लेकिन नाकाम रहीं। क्योंकि कर्मचारी लॉबी इतनी पावरफुल है कि सरकार और प्रशासन वास्तव में उन्हीं की मरजी से चलता है। मुख्यमंत्री यादव के पास यह सूचनाएं पहले से थीं कि मंत्रालय (वैसे तो यह सभी सरकारी दफ्तरों की हालत है) में कर्मचारी न तो समय पर आते हैं और न ही ईमानदारी से दिनभर सीट पर बैठकर काम करते हैं। लिहाजा मुख्यमंत्री ने सभी अधिकारियों को सख्त निर्देश दिया कि सभी को ऑफिस टाइम यानी सुबह 10 से शाम छह बजे तक दफ्तर में ही रहना होगा। जो इस दौरान नहीं मिलेंगे उनपर कड़ी कार्रवाई होगी। जनकल्याणकारी योजनाओं और जनता से जुड़े मामलों में कोई भी लापरवाही या देरी बर्दाश्त नहीं होगी। ड्यूटी के दौरान बिना किसी ठोस कारण के ऑफिस से गायब रहने वालों पर कड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी। सीएम के आदेश का उद्देश्य सरकारी फाइलों की गति बढ़ाना और जनता की शिकायतों का समय पर निराकरण करना है। लिहाजा सीएम के निर्देश पर वल्लभ भवन (मंत्रालय) विंध्याचल और सतपुड़ा भवन जैसे कार्यालयों में अधिकारियों-कर्मचारियों की उपस्थिति की औचक जांच शुरू हो गई है। यह जांच सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) की विशेष टीमें कर रही हैं। जो कर्मचारी समय पर अपनी कुर्सी पर नहीं मिले, उनके खिलाफ रिपोर्ट तैयार की जा रही है। जांच टीम के अधिकारियों ने सुबह 10 बजे प्रमुख विभागों में पहुंचकर हाजिरी रजिस्टर जांचें। एसीएस संजय शुक्ला ने औचक निरीक्षण किया व अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को भी अपने-अपने विभागों में उपस्थिति की समीक्षा के निर्देश दिए। मंत्रालय में सुबह 10 से शाम 4 बजे तक अधिकारियों की आवाजाही पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। लंच के बाद दफ्तर से नदारद रहने वाले एसओ से लेकर एडिशनल सेक्रेटरी तक की सूची तैयार कर मुख्यमंत्री सचिवालय को भेजी गई है। सीएम ने साफ कहा है कि यदि कर्मचारियों और अफसरों की सीट से नदारद रहने की आदत नहीं सुधरी तो सप्ताह में छह दिन काम का पुराना पैटर्न फिर शुरू किया जा सकता है। साथ ही नई व्यवस्था में दूसरे और चौथे शनिवार को अवकाश भी नहीं मिलेगा। उल्लेखनीय है कि पूर्व लोक प्रशासन सलाहकार डॉ. आरके मिश्रा के अनुसार, मंत्रालय के एक सेक्शन में रोज 25-40 फाइलें चलती हैं। यदि सेक्शन ऑफिसर 30-45 मिनट देर से आए तो 10-12 फाइलें रुकती हैं। 144 सेक्शनों में 30 प्रतिशत देरी से आएं तो 400-500 फाइलें प्रभावित हो सकती हैं। गौरतलब है कि सरकारी कर्मचारियों को अन्य क्षेत्रों की तुलना में बेहतर वेतन और भरपूर छुट्टियां मिलती है। इसके अतिरिक्त ऊपरी कमाई अलग। प्रदेश में कोरोना के समय से पांच दिन का सप्ताह होने से कर्मचारियों की और पौ बारह हो गई है। यूं ‘फाइव डेज वीकÓ के बाद काम दिनों में एक घंटा बढ़ा दिया गया था, लेकिन कर्मचारियों की मानसिकता में रत्तीभर फरक नहीं पड़ा। वो अपनी मर्जी से आते हैं, बैठते हैं और जाते हैं। आधा समय तो चाय पीने और ठेलों पर नाश्ते पानी में गुजार दिया जाता है। आम नागरिक अपने काम के परेशान होते रहते हैं कि कर्मचारियों अधिकारियों से कहां मिलें। सीएम की पहल अच्छी है, लेकिन इसका फायदा तभी है, जब कुछ सकारात्मक और स्थायी नतीजा निकले।