100% टैरिफ के खतरे के बीच भारत का दो टूक जवाब, कहा- ऊर्जा सुरक्षा से नहीं करेंगे समझौता

Follow Us

नई दिल्ली। रूस और ईरान से तेल-गैस खरीदने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने का अधिकार देने वाले अमेरिकी विधेयक के बीच भारत सरकार ने अपनी ऊर्जा नीति पर स्पष्ट रुख सामने रखा है। विदेश मंत्रालय ने कहा है कि भारत अपने 140 करोड़ से अधिक लोगों की ऊर्जा जरूरतों को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है और बदलती वैश्विक परिस्थितियों के अनुसार अलग-अलग स्रोतों से तेल और गैस की खरीद जारी रखेगा।विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी कांग्रेस में रूस और ईरान से जुड़े प्रतिबंधों संबंधी विधेयक पारित किए जाने का संज्ञान लेते हुए कहा कि भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करेगा। मंत्रालय के मुताबिक, भारत बाजार की परिस्थितियों के आधार पर ऊर्जा खरीद से जुड़े फैसले करता रहेगा।

अमेरिका को भारत ने पहले ही बता दिया था अपना रुख
विदेश मंत्रालय ने कहा कि इस मुद्दे पर पिछले कुछ महीनों में अमेरिकी अधिकारियों के साथ उच्च स्तर पर बातचीत हुई है। भारत ने अमेरिका के सामने यह भी रखा है कि ऐसे प्रतिबंधों का असर केवल भारत-अमेरिका संबंधों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर भी पड़ सकता है।सरकार का कहना है कि भारत की ऊर्जा जरूरतें बड़े पैमाने पर हैं और इसलिए ऊर्जा आपूर्ति के लिए विभिन्न देशों और स्रोतों पर निर्भर रहना जरूरी है।

दिल्ली कैबिनेट का बड़ा फैसला: GTB अस्पताल में बनेगा 250 बेड का सुपर-स्पेशियलिटी कम ट्रॉमा ब्लॉक

अमेरिकी विधेयक में 100% तक टैरिफ का प्रावधान
रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी संसद में Sanctioning Russia and Iran Act of 2026 नाम से विधेयक पारित किया गया है। इसमें रूस और ईरान से जुड़े ऊर्जा कारोबार करने वाले देशों पर 100% तक आयात शुल्क लगाने का प्रावधान बताया गया है।अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में विधेयक के पक्ष में 262 वोट, जबकि विरोध में 159 वोट पड़े। विधेयक को आगे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हस्ताक्षर के लिए भेजे जाने की बात कही गई है। कानून बनने की स्थिति में इसके प्रावधानों का भारत समेत रूसी तेल खरीदने वाले अन्य देशों पर असर पड़ सकता है।

भारत और चीन पर पड़ सकता है असर
अमेरिकी संसद में हुई चर्चा के दौरान भारत और चीन को रूसी ऊर्जा के प्रमुख खरीदारों के रूप में उल्लेख किए जाने की बात सामने आई है। इसके अलावा तुर्किये, अजरबैजान, हंगरी, स्लोवाकिया, संयुक्त अरब अमीरात, सिंगापुर, कजाकिस्तान और किर्गिस्तान जैसे देशों पर भी प्रस्तावित प्रावधानों का असर पड़ने की संभावना बताई गई है।हालांकि, विधेयक का पारित होना अपने आप में भारत पर तत्काल 100% टैरिफ लागू होने के बराबर नहीं है। इसके लिए कानून के अंतिम प्रावधान, राष्ट्रपति की कार्रवाई और उसके बाद की प्रशासनिक प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी।भारत की ओर से फिलहाल स्पष्ट किया गया है कि उसकी प्राथमिकता देश की ऊर्जा सुरक्षा है और वह वैश्विक बाजार की परिस्थितियों के अनुसार तेल और गैस की खरीद से जुड़े फैसले लेता रहेगा।