रायपुर। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिला चिकित्सालय में चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ ने गंभीर स्थिति में भर्ती एक नवजात का सफल उपचार कर मानवीय संवेदनशीलता की मिसाल पेश की है। गौरेला विकासखंड के चुकतीपानी गांव निवासी गोमती के समय से पहले जन्मे शिशु का वजन महज 900 ग्राम था। उसे सांस लेने में परेशानी और गंभीर एनीमिया की समस्या थी। स्थिति को देखते हुए शिशु को अस्पताल की विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाई (एसएनसीयू) में भर्ती कराया गया, जहां विशेषज्ञों ने लगातार निगरानी के साथ उपचार शुरू किया। करीब दो सप्ताह तक ऑक्सीजन सपोर्ट दिया गया और गंभीर एनीमिया के उपचार के लिए दो यूनिट रक्त चढ़ाया गया। साथ ही कंगारू मदर केयर, नियमित फीडिंग और पोषण संबंधी देखभाल पर विशेष ध्यान दिया गया।
लगभग दो महीने तक चले उपचार के बाद शिशु के स्वास्थ्य में सुधार हुआ और उसका वजन 900 ग्राम से बढ़कर 1.35 किलोग्राम हो गया। संतोषजनक स्थिति के बाद 8 अक्टूबर 2026 को उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। इस उपचार में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. रामेश्वर शर्मा के मार्गदर्शन और सिविल सर्जन डॉ. देवेंद्र सिंह पैकरा के निर्देशन में शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. भरत भूषण त्रिपाठी, डॉ. अनिश ताम्रकार, डॉ. श्याम और एसएनसीयू के नर्सिंग स्टाफ ने भूमिका निभाई। यह मामला दूरस्थ वनांचल क्षेत्रों में जिला अस्पतालों की नवजात देखभाल सेवाओं के महत्व को दर्शाता है। गंभीर अवस्था में पहुंचे शिशु के स्वस्थ होकर घर लौटने से परिवार को बड़ी राहत मिली है।
