रायपुर। राजधानी रायपुर सहित पूरे प्रदेश में सरकारी अस्पतालों की नियमित जांच और निरीक्षण का दावा किया जाता है। लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बायां करती है। वहीं, रायपुर की निजी अस्पतालों की निगरानी व्यवस्था कमजोर पड़ती नजर आ रही है। निजी अस्पतालों के खिलाफ लगातार दर्जनों शिकायतें मिलने के बावजूद ठोस कार्रवाई नहीं हो पा रही है। इससे स्वास्थ्य सेवाओं की पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। मिली जानकारी के अनुसार पिछले छह महीनों में दो दर्जन से अधिक निजी अस्पतालों के खिलाफ शिकायतें दर्ज की गई हैं। इन शिकायतों में मरीजों से अधिक शु:ल्क वसूलने, आयुष्मान भारत योजना के तहत इलाज में अनियमितता बरतने और निर्धारित नियमों का पालन नहीं करने जैसे आरोप शामिल हैं। इसके बावजूद अधिकांश मामलों में कार्रवाई की गति धीमी है या होती ही नहीं हैं। जिससे मरीजों और उनके परिजनों में असंतोष बढ़ रहा है।
अस्पताल के खिलाफ सख्त कार्रवाई कब ?
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार अब तक करीब दो दर्जन निजी अस्पतालों को नोटिस जारी कर अस्पताल प्रबंधन से जवाब मांगा गया है। ये अस्पताल आयुष्मान कार्डधारकों को मुफ्त इलाज उपलब्ध कराने के लिए सरकार के साथ पंजीकृत हैं। इसके बावजूद कई
अस्पताल अलग अलग नामों से मरीजों से अतिरिक्त शुल्क वसूल रहे हैं। कई पीड़ितों ने हेल्पलाइन नंबर और सीएमएचओ कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई है, लेकिन इन शिकायतों के बावजूद अब तक किसी अस्पताल के खिलाफ सख्त कार्रवाई सामने नहीं आई है।
निजी अस्पताल से पारदर्शिता सूची और डिस्प्ले बोर्ड गायब
आयुष्मान योजना के तहत निजी अस्पतालों में इलाज लेने वाले मरीजों को पारदर्शी और बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट निर्देश जारी किए थे। हाल ही में आयोजित बैठक में सीएमएचओ ने शहर के सभी निजी अस्पतालों को निर्देश दिया था कि आयुष्मान कार्ड से जुड़े इलाज और सेवाओं की जानकारी अस्पताल परिसर में डिस्प्ले बोर्ड पर अनिवार्य रूप से प्रदर्शित की जाए। इसका उद्देश्य यह था कि मरीजों और उनके परिजनों को योजना के तहत मिलने वाली सुविधाओं और उपचार की जानकारी आसानी से मिल सके। हालांकि, निर्देश जारी होने के बावजूद शहर के कई निजी अस्पतालों में इसका पालन नहीं किया जा रहा है। अधिकांश अस्पतालों में आयुष्मान योजना से संबंधित पारदर्शिता सूची या डिस्प्ले बोर्ड दिखाई नहीं देते, जिससे मरीजों को उपलब्ध सुविधाओं और पैकेज की जानकारी नहीं मिल पाती।
योजना की निगरानी व्यवस्था कमजोर
आयुष्मान भारत योजना के क्रियान्वयन और शिकायतों पर कार्रवाई की जिम्मेदारी फिलहाल जिला स्तर पर गठित स्वास्थ्य विभाग की टीमों पर है। ये टीमें शिकायत मिलने पर संबंधित अस्पतालों को कारण बताओ नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगती हैं और कई मामलों में उसी आधार पर मामला समाप्त कर दिया जाता है। इस प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह कार्रवाई अनियमितताओं पर रोक लगाने के लिए पर्याप्त है।
संबंधित अस्पतालों को नोटिस भेजे गए
जिला शिक्षा अधिकारी डॉ. मिथिलेश चौधरी ने बताया मरीजों और उनके परिजनों से मिली शिकायतों के अधार पर संबंधित अस्पतालों को नोटिस भेजे गए हैं।
आयुष्मान योजना का मुद्दा विधानसभा में गूंजा
विधानसभा में गुरुवार को प्रश्नकाल के दौरान कांग्रेस विधायक राघवेंद्र सिंह ने आयुष्मान योजना को लेकर सवाल किया, स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने बताया कि प्रदेश में 2.47 करोड़ आयुष्मान योजना के कार्डधारी हैं. 2024 से 2026 तक योजनांतर्गत 22,59,995 लोगों का उपचार हुआ. योजना में केंद्र का 60% और राज्य का हिस्सा 40% है. वहीं योजना में शामिल अस्पतालों को लेकर 31 शिकायतें प्राप्त हुई, जिन पर कार्यवाही हुई है. इसके साथ कार्ड से इलाज करने पर मना करने वाले अनेक अस्पतालों को नोटिस जारी किया गया है, और कई अस्पतालों के खिलाफ जांच जारी है।
अस्पताल के लिए सख्त गाइडलाइन जारी करने के निर्देश
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि छत्तीसगढ़ में जबरन मैनुअल स्कैवेंजिंग कराने वालों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए। मुख्यमंत्री ने अस्पताल के सीवरेज और गटर की सफाई को लेकर नई और सख्त गाइडलाइन तैयार करने के निर्देश भी दिए हैं। इसमें मजदूरों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने पर जोर दिया गया है, ताकि भविष्य में किसी दुखद घटनाओं को रोका जा सके।
राजधानी के कई हॉस्पिटलों को कारण बताओं नोटिस जारी
विधानसभा में आयुष्मान योजना यो को लेकर पूछे गए सवाल पर स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने बताया कि रामकृष्ण केयर हॉस्पिटल, श्री नारायणा हॉस्पिटल, बालगोपाल हॉस्पिटल सहित अन्य अस्पतालों के खिलाफ शिकायत मिली है, जिस पर कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।
