रायपुर में दशहरे पर दिखेगा भव्य नजारा, 101 फीट के रावण के दहन की तैयारी पूरी

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रायपुर। विजयादशमी पर छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में रावण दहन और भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों की व्यापक तैयारियां की जा रही हैं। इस वर्ष आयोजन का मुख्य केंद्र डब्ल्यूआरएस मैदान रहेगा, जहां 101 फीट ऊंचे विशाल रावण के पुतले का दहन रंग-बिरंगी आतिशबाजी के बीच किया जाएगा। इस ऐतिहासिक आयोजन को देखने के लिए लगभग पांच लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान लगाया गया है।

कार्यक्रम के दौरान भगवान श्रीराम का स्वरूप धारण करने वाले कलाकार द्वारा अग्निबाण चलाकर रावण के पुतले का दहन किया जाएगा। मैदान में भारी भीड़ जुटने की संभावना को देखते हुए सुरक्षा, यातायात नियंत्रण, पार्किंग व्यवस्था, पेयजल, रोशनी, मोबाइल शौचालय, प्राथमिक इलाज केंद्र तथा एंबुलेंस सेवा जैसी सभी तैयारियां पूरी की जा रही हैं।

प्रमुख मैदानों में दहन और धार्मिक कार्यक्रम:
शहर के बूढ़ापारा स्थित सप्रे स्कूल मैदान में 50 फीट ऊंचा रावण तैयार किया जा रहा है। शाम चार बजे से भजन जैमिंग के साथ उत्सव का आगाज होगा, जिसमें स्थानीय और बाहरी गायक भगवान श्रीराम तथा माता दुर्गा के भक्ति गीत प्रस्तुत करेंगे। शाम छह बजे श्रीराम-लक्ष्मण की भव्य झांकी के साथ 50 फीट ऊंचे रावण के पुतले का दहन होगा और शाम 6:30 बजे भव्य आतिशबाजी का आयोजन किया जाएगा।

बूढ़ापारा दशहरा उत्सव समिति पिछले 15 वर्षों से लगातार यहां उत्सव कर रही है। समिति द्वारा श्रद्धालुओं के बैठने, मंच निर्माण और पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था की जा रही है। बोरियाखुर्द स्थित खेल मैदान में दशहरा सांस्कृतिक महोत्सव के दौरान 45 फीट ऊंचे रावण के साथ 30-30 फीट ऊंचे कुंभकर्ण और मेघनाथ के पुतलों का भी दहन किया जाएगा।

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दिन में पतंग उत्सव, फिर योग प्रदर्शन:
बोरियाखुर्द मैदान में दिन के समय पतंग उत्सव का विशेष आयोजन रखा गया है। इसके बाद दोपहर चार बजे से सांस्कृतिक नृत्य और योग प्रदर्शन के कार्यक्रम होंगे। शाम पांच बजे भगवान श्रीराम और माता सीता की पूजा-अर्चना के साथ दीप प्रज्वलन किया जाएगा। शाम 5:30 बजे रामलीला का मंचन होगा, जिसके बाद पुतलों का दहन और आतिशबाजी होगी। रात आठ बजे उज्जैन के प्रसिद्ध भजन गायक सन्नी अलबेला और उनकी टीम भजनों की प्रस्तुतियां देगी।

दूसरी तरफ, नगर निगम द्वारा रावणभाठा मैदान में भी सफाई, रोशनी, पेयजल और अग्निशमन की पुख्ता व्यवस्था की जा रही है। शंकर नगर स्थित बीटीआई मैदान में खम्हारडीह सार्वजनिक दशहरा एवं सांस्कृतिक समिति की ओर से तैयारियां शुरू हो गई हैं, जिसका छत्तीसगढ़ राज्य नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष संजय श्रीवास्तव ने विधि-विधान से भूमिपूजन किया।

महंगाई से पुतला निर्माण की लागत बढ़ी:
इस वर्ष रावण, कुंभकर्ण और मेघनाथ के पुतले तैयार करने की लागत में 15 से 20 प्रतिशत तक की वृद्धि हो गई है। पुतला बनाने वाले कारीगर गोपाल राव के अनुसार, बांस, कागज, रंगीन पेपर, कपड़ा, पेंट और सजावट में प्रयुक्त होने वाली सामग्रियों की कीमतें बढ़ने से बजट प्रभावित हुआ है। पुतले का मजबूत ढांचा बनाने से लेकर चेहरे की बनावट, कपड़े सिलने और रंगाई-पुताई के काम में काफी सामग्री तथा मजदूरी लगती है। पुतलों में आतिशबाजी का खर्च भी अलग से होता है। पुतले की ऊंचाई जितनी अधिक होती है, उसी अनुपात में सामग्री और कारीगरों की मेहनत का खर्च भी बढ़ जाता है।

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