रायपुर । ग्रामीण कृषि कार्य अनुभव (आरएडब्ल्यूई) कार्यक्रम के अंतर्गत चतुर्थ वर्ष के कृषि विद्यार्थियों ने 13 अक्टूबर को खेत में मृदा नमूना संग्रहण की वैज्ञानिक विधि का व्यावहारिक प्रदर्शन किया। इस दौरान विद्यार्थियों ने किसानों को मिट्टी का नमूना लेने की सही प्रक्रिया समझाई और मृदा परीक्षण के महत्व के साथ फसल उत्पादन में इसकी उपयोगिता की जानकारी दी।प्रदर्शन के दौरान विद्यार्थियों ने सबसे पहले खेत के विभिन्न स्थानों से खरपतवार, कंकड़ और फसल अवशेष हटाए।
इसके बाद लगभग 0 से 15 सेंटीमीटर की गहराई से मिट्टी के नमूने एकत्र किए। सभी नमूनों को अच्छी तरह मिलाकर एक प्रतिनिधि नमूना तैयार किया गया। इसके बाद नमूने को साफ थैली में भरकर उस पर कृषक का नाम, खेत का विवरण, फसल का नाम और नमूना संग्रहण की तिथि अंकित करने की प्रक्रिया बताई गई। विद्यार्थियों ने बताया कि मृदा परीक्षण से मिट्टी में उपलब्ध पोषक तत्वों, पीएच मान और अन्य आवश्यक गुणों की जानकारी मिलती है। इसके आधार पर फसल की जरूरत के अनुसार उर्वरकों की सही मात्रा निर्धारित की जा सकती है। संतुलित उर्वरक उपयोग से किसानों के अनावश्यक खर्च में कमी आती है और मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने के साथ फसल की उपज एवं गुणवत्ता में सुधार करने में मदद मिलती है। कार्यक्रम डॉ. नवनीत राणा (डीन) के दिशानिर्देश में, डॉ. भूमिका हत्गिया (आरएडब्ल्यूई समन्वयक) के मार्गदर्शन तथा डॉ. हरीश कुमार (विषय विशेषज्ञ) की उपस्थिति और तकनीकी सहयोग से संपन्न हुआ। इस गतिविधि के माध्यम से विद्यार्थियों को कृषि की वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक तकनीकों का अनुभव प्राप्त हुआ। साथ ही किसानों को वैज्ञानिक पद्धति से मृदा परीक्षण कराने और मिट्टी की जरूरत के अनुसार संतुलित उर्वरक प्रबंधन अपनाने के प्रति जागरूक किया गया।
