नई दिल्ली। जापान में एशियाई खेलों में देश के लिए एक जैसा पदक जीतकर लौटे खिलाड़ियों के लिए राज्यों की इनामी राशि का फर्क अब महज नीति का एक पन्ना नहीं, दिल पर लगी चोट बन गया है। नागोया में तिरंगा सबके लिए एक ही ऊंचाई पर लहराया गया, गले में पदक की चमक एक जैसी थी। मगर वतन लौटते ही वह किसी राज्य में करोड़ों का हो गया तो किसी राज्य में चंद लाख में सिमट गया।
इकलौते पदकधारी की कसक
बॉक्सिंग के 90 किलो भार वर्ग में कांस्य विजेता कपिल पोखरिया उत्तराखंड के इकलौते पदकधारी हैं। पर राज्य की खेल नीति के मुताबिक उनके हिस्से महज 15 लाख रुपये आएंगे। वह कहते हैं कि पड़ोसी राज्य यूपी अपने स्वर्ण विजेताओं को तीन करोड़, रजत विजेताओं को डेढ़ करोड़ और कांस्य विजेताओं को 75 लाख रुपये दे रहा है। कपिल की आवाज में शिकायत कम, कसक ज्यादा है। उनका सवाल सीधा है, जो पदक यूपी के खिलाड़ी के गले में 75 लाख का है, वही उत्तराखंड के खिलाड़ी के गले में 15 लाख का कैसे हो गया।
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44 साल बाद स्वर्ण दिलाने वाली लालरेमसियामी को मिलेंगे सिर्फ 40 लाख
महिला हॉकी टीम ने 44 साल बाद देश की झोली में स्वर्ण डाला। इस जीत की नायिकाओं में शामिल मिजोरम की लालरेमसियामी को राज्य सरकार ने 40 लाख रुपये दिए हैं। सियामी इसी में संतोष ढूंढ़ लेती हैं, क्योंकि एशियाड पदक जीतने के बावजूद पहले उन्हें राज्य से एक रुपया तक नहीं मिला था। मगर उनका सवाल चुभता है, पदक का रंग एक है, तो राज्यों के इनाम में इतना फासला क्यों हैं। स्वर्ण पदक पर बंगाल में पांच करोड़, केंद्र 30 लाख देता है एशियाड में स्वर्ण जीतने पर केंद्र 30 लाख देता है। पंजाब एक करोड़, पश्चिम बंगाल पांच करोड़, हिमाचल चार व हरियाणा-यूपी तीन-तीन करोड़ दे रहे हैं।
सवाल उठे तो तस्वीर बदलने लगी
रिले दौड़ में एकसाथ स्वर्ण जीतने वाली हरियाणा की किरण पाहल को सरकार तीन करोड़ दे रही है। वहीं, कर्नाटक की एमआर पूवम्मा के हिस्से 35 लाख आने थे। बॉक्सर विजेंदर ने सवाल उठाया, तो कर्नाटक के सीएम डी. शिवकुमार ने मंगलवार को इनामी राशि स्वर्ण पर एक करोड़, रजत पर 75 और कांस्य पर 50 लाख कर दिया।
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