शारदीय नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा पूरे देश में श्रद्धा और आस्था के साथ की जाती है। भारत ही नहीं, बल्कि विदेशों में रहने वाले भारतीय समुदायों के बीच भी देवी उपासना की परंपरा काफी लोकप्रिय है। कई देशों में ऐसे प्रसिद्ध हिंदू मंदिर हैं, जहां मां दुर्गा, काली, लक्ष्मी और शक्ति के विभिन्न स्वरूपों की पूजा की जाती है। नवरात्रि के दिनों में इन मंदिरों में विशेष पूजा, भजन, आरती और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। अगर आप भी देवी मां के प्रसिद्ध मंदिरों के बारे में जानना चाहते हैं, तो आज हम आपको भारत के बाहर स्थित कुछ प्रमुख मंदिरों के नाम, उनका धार्मिक महत्व और उनका स्थान बताएंगे।
श्रीलंका में इंद्राक्षी शक्तिपीठ:
भारत के पड़ोसी देश श्रीलंका में इंद्राक्षी शक्तिपीठ को देवी उपासना के प्रमुख धार्मिक स्थलों में गिना जाता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, यहां माता सती की पायल गिरी थी। मान्यता यह भी है कि देवराज इंद्र और भगवान श्रीराम ने यहां देवी की पूजा की थी। नवरात्रि के दौरान देवी कैलाश-मानसरोवर क्षेत्र भगवान शिव और माता शक्ति की उपासना से जुड़ा होने के कारण हिंदू तीर्थ परंपरा में विशेष स्थान रखता है। यहां की धार्मिक भक्तों के लिए यह स्थान विशेष धार्मिक महत्व रखता है।
पाकिस्तान में हिंगुला शक्तिपीठ:
पाकिस्तान के बलूचिस्तान क्षेत्र में स्थित हिंगुला शक्तिपीठ को हिंगलाज माता मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, यहां माता सती का सिर गिरा था। यह स्थान हिंदू श्रद्धालुओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इसे नानी का मंदिर और नानी का हज भी कहा जाता है। दुर्गम क्षेत्र में स्थित होने के बावजूद इस शक्तिपीठ से जुड़ी आस्था आज भी लोगों के बीच बनी हुई है।
तिब्बत में मानसरोवर शक्तिपीठ:
तिब्बत क्षेत्र में स्थित मानसरोवर को हिंदू धर्म में बेहद पवित्र माना जाता है। मानसरोवर क्षेत्र से जुड़े शक्तिपीठ के बारे में मान्यता है कि यहां माता सती की दाहिनी हथेली गिरी थी। कैलाश-मानसरोवर क्षेत्र भगवान शिव और माता शक्ति की उपासना से जुड़ा होने के कारण हिंदू तीर्थ परंपरा में विशेष स्थान रखता है। यहां की धार्मिक यात्रा कठिन होने के बावजूद श्रद्धालुओं के बीच इसका विशेष महत्व है।
नेपाल में तीन प्रमुख शक्तिपीठ:
नेपाल में देवी उपासना से जुड़े कई महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल हैं। आपके दिए विवरण के अनुसार, इनमें तीन प्रमुख शक्तिपीठों का उल्लेख किया जाता है।
1. गंडकी शक्तिपीठ
नेपाल में गंडक नदी के क्षेत्र से जुड़े गंडकी शक्तिपीठ को लेकर मान्यता है कि यहां माता सती का बायां गाल गिरा था। यहां देवी के गंडकी स्वरूप की पूजा किए जाने की धार्मिक परंपरा बताई जाती है।
2. गुह्येश्वरी शक्तिपीठ
काठमांडू में पशुपतिनाथ मंदिर के नजदीक स्थित गुह्येश्वरी मंदिर देवी शक्ति की उपासना का महत्वपूर्ण केंद्र है। यह बागमती नदी के आसपास के धार्मिक क्षेत्र में स्थित है। प उपासना का प्रमुख स्थल है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, यहां माता सती के दांत गिरे थे। इसी वजह से यहां देवी को दंतकाली स्वरूप में पूजा जाता है। नवरात्रिौराणिक मान्यता के अनुसार, यह स्थान माता सती के शरीर के अंगों के गिरने से जुड़े शक्तिपीठों में शामिल है।
3.. दंतकाली शक्तिपीठ
नेपाल के धरान क्षेत्र में स्थित दंतकाली मंदिर भी देवी उपासना का प्रमुख स्थल है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, यहां माता सती के दांत गिरे थे। इसी वजह से यहां देवी को दंतकाली स्वरूप में पूजा जाता है। नवरात्रि के दौरान मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना की जाती है।
बांग्लादेश में कई शक्तिपीठ:
बांग्लादेश में भी शक्ति उपासना से जुड़े कई प्रसिद्ध मंदिर और शक्तिपीठ बताए जाते हैं। इनमें उग्रतारा, अपर्णा, श्रीशैल महालक्ष्मी, चट्टल भवानी, यशोरेश्वरी और जयंती शक्तिपीठ के नाम प्रमुख रूप से लिए जाते हैं।
1. उग्रतारा शक्तिपीठ
बांग्लादेश में उग्रतारा शक्तिपीठ को लेकर मान्यता है कि यहां माता सती की नाक गिरी थी। देवी के इस स्वरूप की पूजा शक्ति परंपरा के अनुसार की जाती है।
2. अपर्णा शक्तिपीठ
भवानीपुर क्षेत्र से जुड़े अपर्णा शक्तिपीठ के बारे में धार्मिक मान्यता है कि यहां माता सती के बाएं पैर की पायल गिरी थी। देवी को यहां अपर्णा स्वरूप में पूजा जाता है।
3. श्रीशैल महालक्ष्मी शक्तिपीठ
बांग्लादेश के सिलहट क्षेत्र में स्थित श्रीशैल महालक्ष्मी शक्तिपीठ को लेकर मान्यता है कि यहां माता सती का गला गिरा था। यहां देवी महालक्ष्मी की पूजा की जाती है।
4. यशोरेश्वरी और चट्टल भवानी
बांग्लादेश में यशोरेश्वरी माता और चट्टल भवानी से जुड़े धार्मिक स्थल भी शक्ति उपासना की परंपरा में महत्वपूर्ण माने जाते हैं। इन मंदिरों से जुड़ी अलग-अलग पौराणिक मान्यताएं हैं और नवरात्रि जैसे अवसरों पर देवी भक्तों के लिए इनका विशेष महत्व रहता है।







