दुबई। अल-कायदा ने अमेरिकियों और इस्राइलियों को ले जाने वाले विमानों पर हमले के लिए अपने समर्थकों और दूसरे हमलावरों को अल-बयान के ताजा अंक में उकसाया है। आतंकी संगठन ने 9/11 हमलों का जिक्र करते हुए बुधवार को दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की उड़ान को कथित तौर पर हाईजैक करने की कोशिश करने वाले सह-पायलट की तारीफ भी की है। इस मामले ने उस वक्त और गंभीर मोड़ ले लिया, जब आरोपी सह-पायलट हमाम अल-हमामी के सोशल मीडिया अकाउंट्स पर अल-कायदा के पूर्व प्रमुख अयमान अल-जवाहिरी और संगठन से जुड़े एक चर्चित आत्मघाती हमलावर का संदर्भ सामने आया।
अल-कायदा की नई अपील में 9/11 का जिक्र:
यह अपील शुक्रवार को अल-बयान के ताजा अंक में सामने आई। यह साप्ताहिक प्रकाशन जुलाई में अल-कायदा समर्थक लोगों ने शुरू किया था। अरबी भाषा में प्रकाशित लेख में 11 सितंबर 2001 के आतंकी हमलों और बुधवार को फ्लाईदुबई की उड़ान FZ1073 पर हुई घटना, दोनों का जिक्र किया गया। लेख में बेहद भड़काऊ अंदाज में कहा गया कि जंग अभी खत्म नहीं हुई है। इसमें अमेरिकी, इस्राइली और इस्लाम के खिलाफ लड़ने वाले दूसरे लोगों को ले जाने वाले विमानों को निशाना बनाने की बात कही गई। लेख ने 11 सितंबर के हमलों को इसका उदाहरण बताया।
‘अमेरिका और उसके दुश्मन पहले से कहीं ज्यादा हैं’:
लेख में 9/11 के दौरान वर्ल्ड ट्रेड सेंटर के ट्विन टावर्स से विमान टकराने की तस्वीर भी लगाई गई थी। इसके साथ बुधवार की फ्लाईदुबई घटना से जुड़ी तस्वीर दिखाई गई। अल-बयान में लिखा गया कि आज अमेरिका और ‘जायनिस्टों’ के दुश्मन पहले की तुलना में कहीं ज्यादा हैं। लेख में यह भी कहा गया कि संभव है कोई ऐसा व्यक्ति, जो ईश्वर में विश्वास नहीं करता, उन्हें निशाना बनाए और उसका ऑपरेशन आखिरकार इस्लाम के फायदे में जाए। लेख के अंत में धमकी भरे अंदाज में कहा गया, “वह दिन आएगा जब बुराई का साम्राज्य अमेरिका खत्म हो जाएगा।
टेलीग्राम चैनलों पर तेजी से फैली पोस्ट:
अल-कायदा समर्थक टेलीग्राम चैनलों पर यह सामग्री शनिवार को तेजी से शेयर की गई। हालांकि, बाद में यह पोस्ट वहां से कथित तौर पर हटा दी गई। आतंकवाद विशेषज्ञ इवान कोलमैन ने शुरुआत में द पोस्ट से बातचीत में कहा था कि ऐसा लगता है कि अल-कायदा समर्थक फ्लाईदुबई की घटना का फायदा उठाने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन आरोपी सह-पायलट के सोशल मीडिया अकाउंट्स से सामने आई सामग्री ने मामले को एक नया मोड़ दे दिया।
‘अगर यह सही है तो कहानी अलग हो सकती है’:
कोलमैन ने कहा कि अगर सामने आई जानकारी सही है, तो संभव है कि अल-हमामी आईएसआईएस का समर्थक न हो। उनके मुताबिक सबसे ज्यादा ध्यान खींचने वाली बात हमाम अल-बलावी का संदर्भ है। फ्लाईदुबई की उड़ान पर कथित हमले की कोशिश नाकाम होने के करीब नौ घंटे बाद, जब हमाम अल-हमामी पहले ही हिरासत में था, उसके लिंक्डइन और इंस्टाग्राम अकाउंट्स पर कई पोस्ट अचानक दिखाई दीं। कुछ समय बाद दोनों अकाउंट्स हटा दिए गए।
आखिर किसने डालीं ये पोस्ट?:
अभी यह साफ नहीं है कि ये पोस्ट खुद अल-हमामी ने डाली थीं या किसी और ने उसके अकाउंट्स का इस्तेमाल किया था। यह भी पता नहीं चल पाया है कि ये पोस्ट पहले से शेड्यूल की गई थीं या घटना के बाद किसी ने उन्हें प्रकाशित किया। सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक, इस सवाल का जवाब अभी जांच का हिस्सा है।
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वीडियो में इस्राइली विमान और फिर अल-जवाहिरी की तस्वीर:
एक पोस्ट में कॉकपिट के वीडियो क्लिप शामिल थे। इनमें पास से गुजर रहे इस्राइली विमानों पर कैमरा फोकस करता दिखाई देता है। वीडियो के आखिर में अल-कायदा के पूर्व प्रमुख अयमान अल-जवाहिरी की तस्वीर आती है। अल-जवाहिरी ने ओसामा बिन लादेन के बाद अल-कायदा की कमान संभाली थी। 2022 में उसकी मौत हो गई थी। सोशल मीडिया सामग्री में हमाम अल-बलावी का भी संदर्भ था। यही बात आतंकवाद विशेषज्ञ को सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण लगी।
कौन था हमाम अल-बलावी?:
कोलमैन के मुताबिक, अल-बलावी ऐसा व्यक्ति था जिसने शुरुआत में जिहादी इंटरनेट मंचों पर खुद अपनी पहचान बनाई थी। बाद में उसके अल-कायदा से सीधे संबंध स्थापित हो गए। अल-बलावी पेशे से डॉक्टर था। वह जॉर्डन के लिए खुफिया जानकारी जुटाने वाला व्यक्ति बना और बाद में सीआईए से भी जुड़ा। लेकिन बाद में उसने अल-कायदा के लिए आत्मघाती हमला कर दिया। कोलमैन ने बताया कि इस घटना ने खुफिया एजेंसियों को भी झटका दिया था। उनकी नजर में यह इसलिए बेहद चौंकाने वाला था क्योंकि एक पढ़े-लिखे, सफल पेशेवर व्यक्ति ने अल-कायदा के लिए खुद को विस्फोट में उड़ा दिया था।
अल-हमामी के मामले में क्यों अहम है यह कड़ी?:
हमाम अल-बलावी का संदर्भ इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि 29 वर्षीय ओमानी पायलट हमाम अल-हमामी भी विमानन क्षेत्र से जुड़े एक पेशेवर व्यक्ति हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, हमले से पहले भी अल-हमामी के कथित तौर पर चरमपंथी सामग्री देखने या रखने की बात सामने आई थी। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि क्या दोनों मामलों के बीच किसी तरह की वैचारिक या संगठनात्मक समानता है।
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अमेरिका की TSA भी पूरे मामले पर नजर रख रही:
फ्लाईदुबई की घटना को लेकर अमेरिका की ट्रांसपोर्टेशन सिक्योरिटी एडमिनिस्ट्रेशन यानी TSA ने कहा कि वह घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है। हालांकि एजेंसी ने अल-कायदा की धमकी पर सीधे कोई टिप्पणी नहीं की। TSA ने कहा कि वह फ्लाईदुबई से जुड़ी सुरक्षा घटना से अवगत है और स्थिति पर करीब से नजर रख रही है। एजेंसी के मुताबिक यात्रियों, कर्मचारियों और विमानन संचालन की सुरक्षा उसकी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में है। एजेंसी ने यह भी बताया कि वह उपलब्ध जानकारी का आकलन करने के लिए संबंधित विमानन, कानून प्रवर्तन और अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ समन्वय कर रही है।
अभी अल-हमामी के अल-कायदा कनेक्शन का पुख्ता सबूत नहीं:
इस पूरे मामले में अल-कायदा की धमकी, अल-जवाहिरी की तस्वीर और अल-बलावी के संदर्भ ने जरूर कई सवाल खड़े किए हैं, लेकिन अभी तक ऐसा कोई सार्वजनिक सबूत सामने नहीं आया है जिससे यह साबित हो कि हमाम अल-हमामी अल-कायदा के निर्देश पर काम कर रहा था। यूएई की जांच अभी जारी है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि अल-हमामी के किसी बाहरी संगठन या व्यक्ति से संपर्क थे या उसे कहीं से निर्देश मिले थे। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि फ्लाईदुबई की उड़ान पर कथित कब्जे की कोशिश के पीछे उसका वास्तविक मकसद क्या था और उसके सोशल मीडिया अकाउंट्स पर दिखाई गई अल-कायदा से जुड़ी सामग्री आखिर किसने पोस्ट की थी।
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