नॉर्मल कोलेस्ट्रॉल रिपोर्ट के बावजूद हो सकता है हार्ट अटैक, इन जोखिमों को न करें नजरअंदाज

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हार्ट अटैक को अक्सर बढ़े हुए कोलेस्ट्रॉल से जोड़कर देखा जाता है। यही वजह है कि कई लोग नियमित जांच में कोलेस्ट्रॉल की रिपोर्ट सामान्य आने के बाद दिल की सेहत को लेकर निश्चिंत हो जाते हैं। हालांकि, केवल सामान्य कोलेस्ट्रॉल रिपोर्ट हार्ट अटैक के जोखिम को पूरी तरह खत्म नहीं करती। हृदय की सेहत पर ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर, धूम्रपान, पारिवारिक इतिहास, शारीरिक गतिविधि और अन्य स्वास्थ्य संबंधी कारकों का भी असर पड़ता है।

नॉर्मल कोलेस्ट्रॉल के बावजूद क्यों आ सकता है हार्ट अटैक?
खून में LDL यानी लो-डेंसिटी लिपोप्रोटीन को आमतौर पर ‘खराब’ कोलेस्ट्रॉल कहा जाता है। इसका स्तर बढ़ने पर धमनियों में प्लाक जमा होने का जोखिम बढ़ सकता है। समय के साथ यह प्लाक रक्त वाहिकाओं को संकरा कर सकता है।कभी-कभी प्लाक की सतह पर अचानक टूट-फूट होने से वहां रक्त का थक्का बन सकता है। अगर यह थक्का हृदय तक रक्त पहुंचाने वाली धमनी में रक्त प्रवाह को रोक देता है, तो हार्ट अटैक हो सकता है।इसलिए कुल कोलेस्ट्रॉल या LDL का एक सामान्य परिणाम अपने आप में हृदय रोग के जोखिम का पूरा आकलन नहीं करता। डॉक्टर आमतौर पर व्यक्ति की उम्र, मेडिकल हिस्ट्री, ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, धूम्रपान और पारिवारिक इतिहास जैसे अन्य कारकों को भी देखते हैं।

हाई ब्लड प्रेशर भी बड़ा जोखिम
लंबे समय तक बढ़ा हुआ ब्लड प्रेशर रक्त वाहिकाओं और हृदय पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है। खास बात यह है कि हाई ब्लड प्रेशर वाले कई लोगों में लंबे समय तक कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखाई देते।इसलिए केवल लक्षणों के आधार पर नहीं, बल्कि समय-समय पर ब्लड प्रेशर की जांच कराना भी जरूरी है।

डायबिटीज और इंसुलिन रेजिस्टेंस को न करें नजरअंदाज
लंबे समय तक ब्लड शुगर का बढ़ा रहना रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचा सकता है और हृदय रोग के जोखिम को बढ़ा सकता है। डायबिटीज या प्री-डायबिटीज की स्थिति में डॉक्टर की सलाह के अनुसार ब्लड शुगर और अन्य जोखिम कारकों को नियंत्रित रखना महत्वपूर्ण है।

धूम्रपान और तंबाकू से बढ़ता है खतरा
सिगरेट, बीड़ी और अन्य तंबाकू उत्पाद रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचा सकते हैं। धूम्रपान हृदय रोग और हार्ट अटैक के जोखिम से जुड़ा हुआ है। इसलिए कोलेस्ट्रॉल सामान्य होने के बावजूद धूम्रपान करने वालों को अपने हृदय स्वास्थ्य को लेकर लापरवाही नहीं करनी चाहिए।

तनाव और खराब नींद भी डाल सकते हैं असर
लगातार तनाव, कम नींद और अनियमित जीवनशैली सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से ब्लड प्रेशर, वजन और ब्लड शुगर जैसे कारकों को प्रभावित कर सकती है। लंबे समय तक खराब लाइफस्टाइल कई हृदय जोखिम कारकों को बढ़ा सकती है।

पारिवारिक इतिहास भी है महत्वपूर्ण
अगर परिवार में कम उम्र में हार्ट अटैक या अन्य हृदय रोग का इतिहास रहा है, तो डॉक्टर को इसकी जानकारी देना जरूरी है। पारिवारिक इतिहास कुछ लोगों में हृदय रोग के बढ़े हुए जोखिम का संकेत हो सकता है।

दिल को स्वस्थ रखने के लिए क्या करें?
० अपनी क्षमता और स्वास्थ्य के अनुसार नियमित शारीरिक गतिविधि या वॉक करें।
० खाने में फल, सब्जियां, साबुत अनाज, दालें और फाइबर से भरपूर खाद्य पदार्थ शामिल करें।
० धूम्रपान और तंबाकू का सेवन न करें।
० ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर की नियमित जांच कराएं।
० स्वस्थ वजन बनाए रखने की कोशिश करें।
० पर्याप्त नींद लें और तनाव को नियंत्रित करने के लिए स्वस्थ दिनचर्या अपनाएं।
० परिवार में हृदय रोग का इतिहास होने पर डॉक्टर से व्यक्तिगत जोखिम का आकलन कराएं।
० सिर्फ कोलेस्ट्रॉल ही नहीं, बल्कि अपने संपूर्ण हृदय स्वास्थ्य पर ध्यान दें।

इन लक्षणों को बिल्कुल न करें नजरअंदाज
सीने में दबाव, जकड़न या दर्द, सांस लेने में परेशानी, ठंडा पसीना, अचानक कमजोरी, चक्कर या दर्द का हाथ, पीठ, गर्दन अथवा जबड़े तक फैलना हार्ट अटैक के संभावित संकेत हो सकते हैं। कुछ लोगों, खासकर महिलाओं और डायबिटीज वाले लोगों में लक्षण अलग या अपेक्षाकृत हल्के हो सकते हैं।ऐसे लक्षण अचानक दिखाई दें तो इन्हें गैस या सामान्य कमजोरी मानकर इंतजार न करें। तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता लें।

सिर्फ एक रिपोर्ट पर निर्भर न रहें
नॉर्मल कोलेस्ट्रॉल रिपोर्ट निश्चित रूप से अच्छी बात है, लेकिन इससे हार्ट अटैक का जोखिम शून्य नहीं हो जाता। हृदय स्वास्थ्य का आकलन करते समय कोलेस्ट्रॉल के साथ ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर, धूम्रपान, वजन, पारिवारिक इतिहास, उम्र और जीवनशैली जैसे कई कारकों को ध्यान में रखना जरूरी है।

नोट: यह जानकारी सामान्य स्वास्थ्य जागरूकता के लिए है। व्यक्तिगत हृदय जोखिम या जांच की जरूरत के बारे में अपने डॉक्टर से सलाह लें।