भारत जोड़ो यात्रा के गढ़ में राहुल का नया प्रयोग, छात्रों पर खास फोकस

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भोपाल। मध्य प्रदेश में 2023 के विधानसभा चुनाव से पहले राहुल गांधी की भारत जोड़ा यात्रा गुजरी थी। यात्रा का रूट मालवा निमाड़ का क्षेत्र ही था। इस दौरान पार्टी को उम्मीद थी कि राहुल गांधी की यात्रा वाले रूट पर पड़ने वाले विधानसभा क्षेत्रों में पार्टी का प्रदर्शन सुधरेगा, लेकिन चुनाव के बाद जब नतीजे आए तो हालत पहले से भी खराब हो गई। अब उसी क्षेत्र को फिर से राहुल गांधी की छात्रों की गुंज कार्यक्रम के लिए चुना गया है, तो क्या इसका असर 2028 में होने वाले विधानसभा चुनाव में दिखेगा?

2018 से बदला सीटों का गणित:
राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा ने नवंबर-दिसंबर 2022 में बुरहानपुर, खंडवा, खरगोन, इंदौर, उज्जैन और आगर मालवा के हिस्सों को कवर किया था। करीब 380 किलोमीटर के इस रूट में 21 विधानसभा सीटें थीं। इन सीटों का 2018 और 2023 का चुनावी गणित भी दिलचस्प है। 2018 में भाजपा के खाते में यहां की 14 सीटें थीं और कांग्रेस सात सीटों पर जीती थी। 2023 में भाजपा का आंकड़ा बढ़कर 17 हो गया, जबकि कांग्रेस चार सीटों तक सीमित रही। कांग्रेस की 2023 में जीती चार सीटें भीकनगांव, तराना, महिदपुर और सुसनेर हैं।

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अब फोकस युवाओं पर:
2028 के विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस का नया फोकस युवाओं और छात्रों पर दिखाई दे रहा है। इंदौर में 19 सितंबर को राहुल गांधी ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में छात्रों से सीधे संवाद करेंगे। यह इस अभियान का पांचवां कार्यक्रम है। कांग्रेस के मुताबिक कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्रों ने पंजीयन कराया है। अभियान में शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा, भर्ती और रोजगार जैसे मुद्दों को प्रमुखता दी जा रही है।

क्या 2028 के लिए बदलेगा कांग्रेस का तरीका? भारत जोड़ो यात्रा के दौरान कांग्रेस का जोर व्यापक जनसंपर्क और राजनीतिक संदेश पर था। अब ‘छात्रों की गूंज’ के जरिए पार्टी एक खास वर्ग युवा और छात्र से सीधे संवाद पर जोर दे रही है। इसका राजनीतिक असर कितना होगा, यह केवल कार्यक्रम में जुटने वाली भीड़ से तय नहीं होगा। इसके लिए यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कार्यक्रम के बाद कांग्रेस छात्र-युवा मुद्दों को कितनी निरंतरता से उठाती है और उन्हें संगठनात्मक स्तर पर कितना विस्तार देती है।

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स्थानीय मुद्दों का भी पड़ता है असर:
वहीं, जानकारों का कहना है कि 2018 और 2023 में बदलाव को केवल भारत जोड़ो यात्रा के प्रभाव से जोड़ना सीधे तौर पर सही नहीं होगा। चुनाव परिणाम पर स्थानीय उम्मीदवार, संगठन, दल-बदल, उपचुनाव के बाद बदले समीकरण और स्थानीय मुद्दों जैसे कई कारकों का असर पड़ता है। जैसे नेपानगर की 2018 की कांग्रेस विधायक सुमित्रा कासडेकर बाद में भाजपा में शामिल हो गई थीं। बड़वाह के 2018 के कांग्रेस विधायक सचिन बिरला भी बाद में भाजपा में चले गए।

इंदौर से गूंज देश भर में पहुंचाने का प्रयास:
वरिष्ठ पत्रकार प्रभु पटेरिया ने कहा कि इंदौर को मध्य प्रदेश का एजुकेशन हब माना जाता है। यहां प्रदेशभर से छात्र-छात्राएं आते हैं, इसलिए टारगेट ग्रुप आसानी से उपलब्ध हो जाता है। इंदौर प्रदेश की आर्थिक राजधानी है, ऐसे में यहां होने वाली किसी भी गतिविधि की गूंज स्वाभाविक रूप से पूरे देश तक पहुंचती है। उन्होंने कहा कि मालवा-निमाड़ का किसान आर्थिक रूप से सक्षम होने के साथ-साथ अपने अधिकारों को लेकर भी जागरूक है। इस क्षेत्र में किसान आंदोलन भी हुआ है। राजनीति में नेताओं का अपना एक टारगेट ऑडियंस होता है। ऐसे में अगर कोई गतिविधि इंदौर में होती है तो उसकी चर्चा और उसका असर काफी दूर तक जाता है।

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