- मूक-बधिर छात्राओं और अपराजिता की बहनों के हाथों में रक्षाबंधन की नई रोशनी
रायपुर। रक्षाबंधन का पर्व इस बार रायपुर में दो विशेष स्थानों के लिए सिर्फ त्योहार नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता और मुख्य धारा से जुड़ने का उत्सव बन गया है। समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित एकीकृत महिला सहायता केंद्र अपराजिता, माना कैम्प और मठपुरैना स्थित शासकीय दृष्टि एवं श्रवण बाधितार्थ विद्यालय की बहनों ने अपने हाथों से बनाई राखियों से एक नई मिसाल पेश की है।
माना कैम्प स्थित अपराजिता केंद्र में दिव्यांग महिलाओं को सुरक्षित आश्रय और चिकित्सा सुविधा के साथ-साथ रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ा जा रहा है। यहाँ की हितग्राही महिलाओं द्वारा रक्षाबंधन के लिए सुंदर राखियां तैयार की गई हैं। केंद्र में हर त्योहार इसी तरह मनाया जाता है, जिससे उनका मानसिक स्वास्थ्य बेहतर होता है और उनमें आत्मविश्वास लौटता है। स्वस्थ होने पर इन महिलाओं का पुनर्वास न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि ऊटी, दिल्ली, तमिलनाडु, ओडिशा, कोलकाता, ओंकारेश्वर, फरीदाबाद जैसे देश के विभिन्न राज्यों में किया जा चुका है।
इसी तरह मठपुरैना स्थित शासकीय दृष्टि एवं श्रवण बाधितार्थ विद्यालय की श्रवण बाधित छात्राओं ने भी अपने हुनर से आकर्षक राखियां बनाई हैं। विद्यालय में छात्राओं को राखी निर्माण के साथ-साथ पेंटिंग एवं सिलाई का प्रशिक्षण भी दिया जाता है। उनके द्वारा बनाई गई राखियां विभिन्न स्थानों पर भेजी जाती हैं और लोगों द्वारा खरीदे जाने पर उनका उत्साह और आत्मबल बढ़ता है। श्रवण बाधित छात्राओं ने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय को समर्पित एक राखी बनाई है।
समाज कल्याण विभाग की यह पहल बताती है कि राखी जैसी गतिविधियां केवल त्योहार नहीं, बल्कि दिव्यांग हितग्राहियों को समाज की मुख्य धारा से जोड़ने और आत्मनिर्भर बनाने का सशक्त माध्यम हैं।


