नई दिल्ली। रूस की राजधानी मॉस्को में 26 अगस्त 2026 को आयोजित हिम तेंदुए के अध्ययन और संरक्षण पर रूस-भारत गोलमेज सम्मेलन में भारत ने हिस्सा लिया। सम्मेलन में भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने हिम तेंदुए के संरक्षण के लिए किए जा रहे विज्ञान आधारित प्रयासों और आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल से हासिल प्रगति की जानकारी साझा की। सम्मेलन का आयोजन रूसी विज्ञान अकादमी के ए.एन. सेवेर्तसोव पारिस्थितिकी एवं विकास संस्थान में किया गया। इसका उद्देश्य हिम तेंदुए के अनुसंधान और संरक्षण के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करना रहा।
भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के प्रतिनिधिमंडल ने देश में हिम तेंदुए के संरक्षण को लेकर किए जा रहे वैज्ञानिक प्रयासों को सामने रखा। भारतीय वन्यजीव संस्थान के अधिकारियों ने हिम तेंदुए की जनसंख्या अनुमान, रेडियो टेलीमेट्री और आनुवंशिक विश्लेषण के क्षेत्र में हुई प्रगति के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि संरक्षण कार्यक्रमों को अधिक प्रभावी बनाने में वैज्ञानिक उपकरणों और आधुनिक तकनीकों की भूमिका लगातार बढ़ रही है। सम्मेलन में रूस के प्राकृतिक संसाधन एवं पर्यावरण मंत्रालय, रूसी विज्ञान अकादमी, मॉस्को चिड़ियाघर और रोसप्रिरोडनादजोर समेत कई संस्थानों के प्रतिनिधियों और विशेषज्ञों ने भी हिस्सा लिया।
गोलमेज सम्मेलन के दौरान भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने विभिन्न विषयगत चर्चाओं में भी भाग लिया, जिनका उद्देश्य हिम तेंदुए के वैज्ञानिक अध्ययन और संरक्षण के लिए सहयोगात्मक दृष्टिकोण विकसित करना था। बैठक ने भारत और उसके अंतरराष्ट्रीय साझेदारों को अनुसंधान, निगरानी और संरक्षण से जुड़े ज्ञान एवं अनुभव साझा करने का मंच दिया। सम्मेलन में वैज्ञानिक सहयोग को मजबूत करने और हिम तेंदुए के संरक्षण के लिए साझा प्रयासों को आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया। इससे इस महत्वपूर्ण वन्यजीव प्रजाति के संरक्षण में आधुनिक निगरानी तकनीकों और वैज्ञानिक अनुसंधान के इस्तेमाल को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
