नई दिल्ली। जंतर-मंतर पर हुए कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन को लेकर विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। बांग्लादेशी लेखिका तसलीमा नसरीन द्वारा इस आंदोलन की तुलना बांग्लादेश के छात्र आंदोलन से किए जाने के बाद CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने आरोप लगाया कि आंदोलन को बदनाम करने के लिए साजिश की जा रही है। सोमवार (3 अगस्त) को मीडिया से बातचीत में अभिजीत दीपके ने कहा कि CJP का प्रदर्शन पूरी तरह संविधान के दायरे में है और इसकी तुलना बांग्लादेश या नेपाल में हुई घटनाओं से करना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि संगठन की जिम्मेदारी अब और बढ़ गई है और CJP देशभर में छात्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर आंदोलन जारी रखेगी।
दीपके ने दावा किया कि जंतर-मंतर प्रदर्शन को प्रभावित करने के लिए बाहरी लोगों का इस्तेमाल किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शन स्थल पर पहले से पत्थरों से भरा ट्रक और एक क्षतिग्रस्त वैन मौजूद थी। उनके मुताबिक यह पूरी तरह योजनाबद्ध प्रयास था और इसकी जांच होनी चाहिए। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। उन्होंने NEET पेपर लीक मामले में आत्महत्या करने वाले छात्रों का भी मुद्दा उठाया। दीपके ने कहा कि प्रभावित परिवारों को अब तक एक करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग पूरी नहीं हुई है। CJP ने अपने प्रदर्शन के दौरान सरकार से इन परिवारों को आर्थिक सहायता देने की मांग दोहराई।
वहीं, तसलीमा नसरीन ने CJP के प्रदर्शन को लेकर टिप्पणी करते हुए इसकी तुलना बांग्लादेश के छात्र आंदोलन से की थी। उन्होंने कहा था कि वहां भी शुरुआत में आंदोलन छात्रों की मांगों तक सीमित था, लेकिन बाद में हालात बदल गए। उन्होंने CJP के प्रदर्शन को लेकर अपनी चिंता जाहिर की थी। तसलीमा नसरीन की टिप्पणी और अभिजीत दीपके के जवाब के बाद CJP आंदोलन को लेकर राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज हो गई है। दीपके का कहना है कि संगठन लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से अपनी मांगें उठाता रहेगा और किसी भी आरोप का जवाब तथ्यों के आधार पर दिया जाएगा।
