नई दिल्ली। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और ईरान-अमेरिका संघर्ष के बीच भारत की ईंधन सुरक्षा को लेकर बड़ी जानकारी सामने आई है। विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा हालात में भारत पहले की तुलना में बेहतर स्थिति में है और संभावित आपूर्ति संकट से निपटने के लिए पर्याप्त तैयारी कर चुका है। अमेरिका के हमलों के बाद ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को बंद करने की घोषणा की, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई है। इस मार्ग से बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का परिवहन होता है, इसलिए इसके प्रभावित होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार पर असर पड़ा है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, भारत ने आने वाले समय के लिए कच्चे तेल और एलपीजी की जरूरतों को काफी हद तक सुरक्षित कर लिया है। हालांकि प्राकृतिक गैस की आपूर्ति में कुछ चुनौतियां आ सकती हैं, लेकिन स्थिति नियंत्रण में रहने की उम्मीद है। मध्य पूर्व संकट के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखी गई है। ब्रेंट क्रूड करीब 80 डॉलर प्रति बैरल और डब्ल्यूटीआई क्रूड लगभग 75 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक पहुंच गया है। केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी के अनुसार, भारत के पास करीब 60 दिनों का कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस भंडार उपलब्ध है, जबकि एलपीजी का पर्याप्त स्टॉक भी मौजूद है। सरकार लगातार वैश्विक हालात पर नजर बनाए हुए है ताकि देश में ईंधन आपूर्ति सुचारू बनी रहे।
