मध्य प्रदेश। कांग्रेस के संचार विभाग के प्रभारी महासचिव जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि उन्हें और उनकी पार्टी के प्रतिनिधिमंडल को निर्वाचन आयोग में याचिका सौंपने के दौरान रोका गया। रमेश ने कहा कि वह सिर्फ अपनी याचिका सौंपने आए थे। लेकिन उन्हें प्रतीक्षा कक्ष (वेटिंग रूम) में बैठने तक की अनुमति नहीं दी गई। उन्होंने कहा कि वह 35 वर्षों से अधिक समय से सांसद रहे हैं और उन्हें 10 मिनट से ज्यादा इंतजार कराया गया। उन्होंने इस व्यवहार को अनुचित बताते हुए कहा कि ऐसा उन्होंने पहले कभी नहीं देखा।
सचिन पायलट ने क्या आरोप लगाए?
वहीं, कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने कहा, जिस सीट पर कांग्रेस जीतने की उम्मीद कर रही थी, उसी सीट के लिए उम्मीदवार का नामांकन रद्द कर दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग में कोई अधिकारी मिलने के लिए तैयार नहीं है और यह कहा जा रहा है कि वहां कोई अधिकारी मौजूद नहीं है। उन्होंने दावा किया कि केवल एक नोटिस के आधार पर किसी राज्यसभा उम्मीदवार का नामांकन रद्द करने का यह पहला मामला है। जबकि उम्मीदवार के खिलाफ कोई मामला या एफआईआर भी दर्ज नहीं है।
पूरा मामला क्या हुआ?
मध्य प्रदेश कोटे की तीसरी राज्यसभा सीट से कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र खारिज कर दिया गया है। भाजपा की आपत्ति पर निर्वाचन अधिकारी ने यह फैसला लिया। इस फैसले के बाद सियासी हलचल तेज हो गई है। उनकी उम्मीदवारी रद्द होने के बाद रमेश याचिका देने के लिए निर्वाचन आयोग पहुंचे थे। राज्यसभा चुनाव के लिए कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन के नामांकन पत्र पर भाजपा ने आपत्ति दर्ज कराई। भाजपा का आरोप है कि मीनाक्षी नटराजन ने अपने शपथ पत्र में हैदराबाद की एक अदालत में लंबित प्रकरण की जानकारी नहीं दी है। इसी आधार पर भाजपा ने उनका नामांकन निरस्त करने की मांग की है। वहीं कांग्रेस का कहना है कि मीनाक्षी नटराजन के खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं है। पार्टी के अनुसार उन्हें केवल अदालत की ओर से नोटिस प्राप्त हुआ था, इसलिए शपथ पत्र में इसका उल्लेख करने का कोई दायित्व नहीं था।
