कटिहार। बिहार में बड़े-बड़े विकास और सुशासन के दावों को ठेंगा दिखाती एक बेहद शर्मनाक और विचलित कर देने वाली तस्वीर सामने आई है। कटिहार जिले के फलका प्रखंड अंतर्गत मोरसंडा गांव में बुनियादी सुविधाओं के अभाव ने सरकारी दावों की पोल खोलकर रख दी है। गांव के रहने वाले अरविंद मंडल की बीमारी के कारण मौत हो गई थी, जिसके बाद परिजनों और ग्रामीणों को अंतिम संस्कार के लिए अपनी जान जोखिम में डालनी पड़ी। दरअसल, गांव और श्मशान घाट के बीच ‘कमला नदी’ बहती है, जिस पर आजादी के दशकों बाद भी आज तक कोई पुल नहीं बन सका है। मजबूरन ग्रामीणों को मृतक की अर्थी अपने कंधों पर उठाकर उफनती नदी के गहरे पानी को पैदल पार करना पड़ा। इस लाचारी भरे मंजर का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने पूरे प्रशासनिक तंत्र को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि वे आज भी नरक जैसी जिंदगी जीने को मजबूर हैं। नदी पार करने के लिए सिर्फ एक निजी नाव चलती है, जिसमें क्षमता से अधिक लोगों को बैठाया जाता है, जिसके कारण लोग डर से उस पर नहीं चढ़ते। बाढ़ के दिनों में स्थिति और भयावह हो जाती है, तब लोग चंदा इकट्ठा कर बांस का ‘चचरी पुल’ बनाते हैं। इस पूरे मामले पर राजनीति भी तेज हो गई है। क्षेत्र की कोढ़ा विधानसभा सीट से भाजपा विधायक कविता पासवान ने सफाई देते हुए कहा कि वे विधानसभा में कई बार इस पुल का मुद्दा उठा चुकी हैं, लेकिन तकनीकी कारणों से काम अटका था। हालांकि, वीडियो वायरल होने और चौतरफा फजीहत के बाद उन्होंने आश्वासन दिया है कि अब प्राथमिकता के आधार पर जल्द से जल्द यहाँ पुल का निर्माण कराया जाएगा।
