सोनीपत। एनसीआर स्तर पर शुरू हुई ट्रांसपोर्टरों की तीन दिवसीय हड़ताल का असर अब साफ दिखाई देने लगा है। 21 मई से शुरू हुए इस आंदोलन के चलते सोनीपत समेत आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों में माल ढुलाई व्यवस्था लगभग ठप हो गई है। हजारों ट्रकों के पहिए रुकने से बाजार, उद्योग और सप्लाई चेन प्रभावित होने लगी है। ट्रांसपोर्टरों का यह आंदोलन ईसीसी शुल्क और बीएस-4 वाहनों पर लगाए गए प्रतिबंधों के विरोध में किया जा रहा है। हड़ताल के कारण ट्रांसपोर्ट नगरों में सन्नाटा पसरा हुआ है, जबकि रोजमर्रा के सामान, निर्माण सामग्री और औद्योगिक उत्पादों की आवाजाही बाधित हो रही है। स्थिति को देखते हुए कई ट्रांसपोर्ट कंपनियों ने नई बुकिंग लेना भी बंद कर दिया है।
इससे व्यापारियों और उद्योगपतियों की चिंता बढ़ गई है। आशंका जताई जा रही है कि, यदि हड़ताल लंबी चली तो जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति और बाजार व्यवस्था पर बड़ा असर पड़ सकता है। भाई चारा ट्रक एसोसिएशन ने भी आंदोलन को समर्थन देते हुए कहा है कि, सरकार जब तक ट्रांसपोर्टरों की मांगों पर सकारात्मक फैसला नहीं लेती, तब तक विरोध जारी रहेगा। संगठन ने 21 से 23 मई तक इसे सांकेतिक हड़ताल बताया है। ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि, बीएस-4 वाहनों पर अचानक प्रतिबंध और बढ़ते डीजल-टैक्स के बोझ ने उनके व्यवसाय और रोज़गार पर गंभीर असर डाला है। अब सभी की नजर सरकार और ट्रांसपोर्ट संगठनों के बीच होने वाली संभावित बातचीत पर टिकी हुई है।
