कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बहुत बड़ा नीतिगत बदलाव देखने को मिल रहा है। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली सरकार ने राज्य के अल्पसंख्यक मामलों और मदरसा शिक्षा विभाग के तहत आने वाले सभी मदरसों में राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ गाना अनिवार्य कर दिया है। नए आधिकारिक नोटिफिकेशन के अनुसार, अब क्लास शुरू होने से पहले सुबह की प्रार्थना सभा (असेंबली) में वंदे मातरम् का गान अनिवार्य होगा और इसकी पालना रिपोर्ट भी विभाग को सौंपनी होगी। इससे पहले तक यहाँ राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ और बांग्ला गीत ‘अनंत असीम प्रेममय तुमी’ गाया जाता था। गौरतलब है कि, केंद्र सरकार ने भी हाल ही में ‘वंदे मातरम्’ को राष्ट्रगान के समकक्ष दर्जा देते हुए नियम बनाया है कि, दोनों को साथ गाए जाने पर वंदे मातरम् पहले गाया जाएगा और सभी को सावधान मुद्रा में खड़ा होना होगा।

इस राष्ट्रभक्ति से जुड़े आदेश के साथ ही सुवेंदु सरकार ने राज्य के सरकारी कर्मचारियों और शिक्षकों के लिए भी एक तगड़ा फरमान जारी किया है। सरकार ने कर्मचारियों के बोलने और लिखने की आजादी को सीमित करते हुए सख्त निर्देश दिए हैं कि कोई भी सरकारी कर्मचारी, स्कूल या कॉलेज का शिक्षक बिना पूर्व अनुमति के मीडिया में बयान नहीं दे सकेगा। इसके अलावा, अखबारों या टीवी चैनलों को इंटरव्यू देने और बिना इजाजत लेख लिखने पर भी पूरी तरह पाबंदी लगा दी गई है। सरकार के इन दोहरे फैसलों को लेकर राज्य में सियासी सरगर्मियां बेहद तेज हो गई हैं। जहां सत्ता पक्ष इसे अनुशासन और राष्ट्रवाद से जोड़ रहा है, वहीं विपक्षी दल इन नियमों को कर्मचारियों की आवाज दबाने वाला और ‘अघोषित आपातकाल’ जैसा बताकर इसका तीखा विरोध कर रहे हैं।
