गरियाबंद। छत्तीसगढ़ में जनता की समस्याओं के तत्काल निराकरण के लिए आयोजित “सुशासन तिहार 2026” उस समय विवादों के घेरे में आ गया, जब गरियाबंद के छुरा ब्लॉक में एक बीजेपी विधायक के तीखे बयानों ने प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया। छुरा के ग्राम पाटसिवनी में आयोजित समाधान शिविर के दौरान राजिम विधायक रोहित साहू मंच से ही अधिकारियों और कर्मचारियों पर बरस पड़े। विधायक की नाराजगी का कारण एक पटवारी पर लगा भ्रष्टाचार का गंभीर आरोप था, जिसने देखते ही देखते एक बड़े राजनीतिक और प्रशासनिक टकराव का रूप ले लिया।
शिविर में एक ग्रामीण ने मौखिक शिकायत की कि पटवारी ने काम के बदले रिश्वत मांगी है। इस पर विधायक रोहित साहू ने आव देखा न ताव और भरे मंच से कलेक्टर की मौजूदगी में पटवारी को तत्काल हटाने के निर्देश दिए। विधायक ने कड़े लहजे में कहा कि, यदि जांच में 40 हजार रुपये घूस लेने की पुष्टि होती है, तो संबंधित कर्मचारी पर एफआईआर दर्ज की जाए। लेकिन बात यहीं खत्म नहीं हुई; विधायक ने अपना आपा खोते हुए विवादित बयान दे डाला कि, “घूस लेने वाले पटवारियों को जूतों और चप्पलों से मारेंगे।” उनके इस बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने सुशासन के दावों के बीच सिस्टम की मर्यादा पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

विधायक के इन ‘बिगड़े बोल’ के विरोध में राजस्व पटवारी संघ तहसील शाखा-छुरा ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। संघ ने विधायक के शब्दों को अपमानजनक बताते हुए एक लिखित ज्ञापन सौंपा और “सुशासन तिहार 2026” के पूर्ण बहिष्कार का ऐलान कर दिया। पटवारियों का कहना है कि,जनप्रतिनिधियों का ऐसा व्यवहार कर्मचारियों के मनोबल को गिराता है। यह पूरी घटना दर्शाती है कि केवल शिविर लगाने से जनसमस्याएं हल नहीं होंगी, बल्कि भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन के लिए तंत्र में बुनियादी सुधार और जनप्रतिनिधियों व अधिकारियों के बीच गरिमापूर्ण संवाद की आवश्यकता है। वर्तमान में यह विवाद गरियाबंद ही नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश की चर्चा का विषय बना हुआ है।
