भगवान श्री गणेश को सिंदूर अर्पित करने की परंपरा हिंदू धर्म में बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। बुधवार और चतुर्थी जैसे विशेष अवसरों पर भक्त गणपति बप्पा को दूर्वा, मोदक और सिंदूर अर्पित करते हैं। सिंदूर को मंगल, शक्ति और सौभाग्य का प्रतीक माना गया है, इसलिए इसका विशेष धार्मिक महत्व है। मान्यता के अनुसार, गणेश जी को सिंदूर अर्पित करने से नकारात्मक ऊर्जा और बुरी नजर से रक्षा होती है तथा जीवन की बाधाएं दूर होती हैं।
धार्मिक कथाओं में वर्णन मिलता है कि गणेश जी ने एक असुर का वध किया था, जिसके बाद उनका शरीर सिंदूर के समान लाल हो गया था, इसी कारण उन्हें “सिंदूरप्रिय” कहा जाता है।
एक अन्य कथा के अनुसार, माता पार्वती ने गणेश जी के स्वरूप को सिंदूर से सुशोभित देख इसे शुभ मानकर पूजा में शामिल करने का आशीर्वाद दिया था। तभी से सिंदूर अर्पण की परंपरा शुरू हुई।

धार्मिक मान्यता है कि गणेश जी को सिंदूर चढ़ाने से घर में सुख-समृद्धि आती है, विवाह संबंधी बाधाएं दूर होती हैं और संतान प्राप्ति का आशीर्वाद मिलता है। इसके अलावा किसी भी नए कार्य या परीक्षा से पहले गणपति को सिंदूर अर्पित करना शुभ माना जाता है। पूजा विधि में स्नान के बाद मूर्ति पर जल चढ़ाकर सिंदूर लगाया जाता है, फिर दीपक, फूल और मोदक अर्पित किए जाते हैं। अंत में मंत्र जाप कर आशीर्वाद प्राप्त किया जाता है। इस प्रकार सिंदूर अर्पण केवल परंपरा नहीं बल्कि आस्था और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है।
