चेन्नई। देश में एक बहुत बड़ी और खौफनाक आतंकी साजिश पर एनआईए ने अपनी चार्। सार्वजनिक जगहों पर जहर फैलाकर बड़ी संख्या में लोगों को मारने की आतंकी संगठन आईएसआईएस (ISIS) की एक खतरनाक योजना को सुरक्षा एजेंसियों ने नाकाम कर दिया है। इस दिल दहला देने वाले मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने एक डॉक्टर सहित तीन लोगों के खिलाफ अपनी चार्जशीट (आरोप पत्र) दायर कर दी है। यह मामला सीधे तौर पर ‘बायोटेररिज्म’ यानी जैविक आतंकवाद से जुड़ा है, जो देश की सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा बन सकता था। इस साजिश का मकसद प्रतिबंधित हथियारों और घातक जहर का इस्तेमाल करके निर्दोष लोगों की जान लेना था। आपको बता दें की इस पूरे मामले की जांच कर रही एनआईए ने मंगलवार को जारी एक आधिकारिक बयान में बताया कि इस साजिश में तीन मुख्य आरोपी शामिल हैं। इनमें हैदराबाद का रहने वाला डॉक्टर सैयद अहमद मोहिउद्दीन और उत्तर प्रदेश के रहने वाले आजाद और मोहम्मद सुहैल शामिल हैं। इन तीनों के खिलाफ गुजरात के अहमदाबाद स्थित एनआईए की विशेष अदालत में चार्जशीट दायर की गई है। वहीं एजेंसी के मुताबिक, ये तीनों आरोपी विदेशों में बैठे अपने आईएसआईएस आकाओं के इशारे पर काम कर रहे थे। इनका मुख्य मकसद उन युवाओं को भड़काना और अपने संगठन में शामिल करना था, ताकि वे जिहाद के नाम पर देश में खौफ और दहशत फैला सकें। एनआईए की जांच में सामने आया है कि आरोपी ‘राइसिन’ नामक एक बेहद खतरनाक जहर का इस्तेमाल करने वाले थे। यह जहरीला पदार्थ अरंडी के बीजों से निकाला जाता है और इसे रासायनिक हथियार सम्मेलन की सूची में शामिल किया गया है।
आरोपी डॉक्टर मोहिउद्दीन ने चीन से एमबीबीएस की पढ़ाई की है। जांच में पता चला है कि मोहिउद्दीन ने अपने हैदराबाद स्थित घर को राइसिन जहर बनाने के लिए एक गुप्त प्रयोगशाला (लैब) में बदल दिया था। उसके आकाओं ने उसे दक्षिण एशिया में आईएसआईएस का ‘अमीर’ (मुखिया) बनाने का लालच दिया था। इस पूरे मामले का भंडाफोड़ तब हुआ जब नवंबर 2025 में गुजरात एटीएस ने मोहिउद्दीन को एक टोल प्लाजा पर अवैध हथियारों और चार लीटर अरंडी के तेल के साथ गिरफ्तार किया था। डॉक्टर मोहिउद्दीन की गिरफ्तारी के बाद एटीएस ने उसी दिन बाकी दोनों आरोपियों, आजाद और सुहैल को भी पकड़ लिया था। जांच एजेंसी ने बताया कि आजाद और सुहैल ने राजस्थान के हनुमानगढ़ में एक गुप्त जगह से पैसे और प्रतिबंधित हथियार उठाए थे। इसके बाद उन्होंने इन हथियारों और पैसों को गुजरात के छत्राण में एक जगह पर मोहिउद्दीन के लिए छोड़ दिया था। जनवरी 2026 में एनआईए ने इस मामले की जांच अपने हाथों में ले ली। जांच में साफ हुआ कि आजाद और सुहैल जानबूझकर इस साजिश में शामिल हुए थे। उनका काम आतंकियों के आकाओं से बातचीत करना, आतंक के पैसों का इस्तेमाल करना, रेकी करना और अवैध हथियारों को ठिकाने लगाना था। इस खतरनाक साजिश में मोहम्मद सुहैल ने एक बहुत ही अहम कड़ी के रूप में काम किया था। वह विदेशी आकाओं और बाकी आरोपियों के बीच पुल का काम कर रहा था। सुहैल की जिम्मेदारी नए युवाओं को संगठन में शामिल करना, पैसों और हथियारों की खेप का लेन-देन करना और आपस में तालमेल बिठाना था। इसके अलावा, सुहैल ने आतंकी हमलों के लिए कई जगहों की रेकी की और आईएसआईएस के प्रति वफादारी की शपथ लेने वाले वीडियो (बैयत) भी बनाए। उसने आतंकी संगठन आईएसआईएस के झंडे तैयार करने का काम भी किया था। इन तीनों ने मिलकर देश को एक बड़े जैविक हमले का शिकार बनाने की पूरी तैयारी कर ली थी, जिसे वक्त रहते टाल दिया गया।
