नई दिल्ली । सुप्रीम कोर्ट ने कनॉट प्लेस स्थित सेंट्रल पार्क को तिरंगा मार्च के कारण बंद किए जाने के मामले में शुक्रवार को सुनवाई की। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने मौखिक रूप से कहा कि यदि नई दिल्ली नगर पालिका परिषद (एनडीएमसी) द्वारा लगाया गया प्रतिबंध अनुचित पाया जाता है, तो न्यायालय उचित कार्रवाई करेगा। मामले की अगली सुनवाई दशहरे के बाद 26 और 27 अक्टूबर को निर्धारित की गई है।
यह याचिका दिल्ली किराना कमेटी और दिल्ली आयरन एंड हार्डवेयर मर्चेंट एसोसिएशन की ओर से दायर की गई है। याचिका में सेंट्रल पार्क में विरोध-प्रदर्शन के आह्वान के कारण व्यापारिक गतिविधियों पर पडऩे वाले संभावित प्रभाव को लेकर चिंता जताई गई है।
याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश अधिवक्ता जय अनंत देहाद्राई ने न्यायालय को बताया कि प्रतिबंध के कारण प्रतिदिन लगभग 200 करोड़ रुपये के कारोबार पर असर पड़ सकता है। इस पर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि व्यापारिक गतिविधियों में व्यवधान से अनेक परिवारों की आजीविका प्रभावित हो सकती है।कारोबार में संभावित नुकसान का मुद्दा उठाए जाने पर न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची ने कहा कि यदि व्यापार में नुकसान होता है और न्यायालय को लगता है कि याचिकाकर्ताओं के ग्राहकों के साथ गैरकानूनी व्यवहार हुआ है, तो संवैधानिक अपकृत्य क्षेत्राधिकार के तहत अपनी शक्तियों का इस्तेमाल किया जा सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस विषय पर उचित समय आने पर विचार किया जाएगा।
न्यायमूर्ति बागची ने यह भी दोहराया कि यदि न्यायालय को लगता है कि एनडीएमसी का आदेश अनुचित प्रतिबंध की श्रेणी में आता है, तो उसके पास सार्वजनिक कानून के तहत मुआवजा देने सहित उचित कार्रवाई करने के पर्याप्त अधिकार हैं।
अब इस मामले में 26 और 27 अक्टूबर को होने वाली सुनवाई के दौरान न्यायालय प्रतिबंध से जुड़े पहलुओं पर आगे विचार करेगा।
