नई दिल्ली। भारतीय रुपया 18 जून को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कमजोर शुरुआत के साथ कारोबार करता नजर आया। अमेरिकी केंद्रीय बैंक फ़ेडरल रिज़र्व सिस्टम के सख्त रुख के बाद रुपया 13 पैसे गिरकर 94.66 प्रति डॉलर के स्तर पर खुला। बाजार में चिंता है कि, अमेरिका में ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रह सकती हैं, जिससे वैश्विक मुद्रा बाजार प्रभावित हो रहा है।
फेडरल रिजर्व की हालिया बैठक में नीति निर्माताओं ने महंगाई पर नियंत्रण के लिए सख्त रुख बनाए रखने के संकेत दिए हैं। इससे डॉलर को मजबूती मिली और उभरती अर्थव्यवस्थाओं की मुद्राओं पर दबाव बढ़ा। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, रुपया पहले ही अंतरराष्ट्रीय घटनाओं के प्रभाव को महसूस कर रहा था। हाल में भू-राजनीतिक तनाव कम होने और वैश्विक शांति प्रयासों की उम्मीद से रुपये को कुछ मजबूती मिली थी, लेकिन अब डॉलर की बढ़ती मांग ने फिर दबाव बना दिया है।
निवेशकों की नजर इस समय वैश्विक बैठकों और आर्थिक फैसलों पर बनी हुई है। अगर तेल की कीमतों में गिरावट आती है और अंतरराष्ट्रीय तनाव कम होते हैं, तो भारत जैसी तेल आयातक अर्थव्यवस्था को फायदा मिल सकता है। वहीं विदेशी निवेश से रुपये को कुछ सहारा मिल रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि, वैश्विक हालात सुधरने और विदेशी निवेश बढ़ने पर आने वाले समय में रुपये में स्थिरता देखने को मिल सकती है।
