राज्यसभा चुनाव: कांग्रेस में टेंशन – अजय बोकिल

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मध्यप्रदेश तीन राज्यसभा सीटों के चु्नाव यूं तो जून में होने हैं, लेकिन इनमें से एक कांग्रेस को मिलने वाली सीट पर अभी से पेंच फंस गया है। राज्यसभा की तीनो सीटें 19 जून को खाली होंगी। राज्य में विधायकों की संख्या के हिसाब से सत्ताधारी बीजेपी को 2 सीटें और कांग्रेस को एक सीट मिलने की संभावना है। लेकिन, कांग्रेस को मिलने वाली एक सीट पर पेंच फंस सकता है। जिसके संकेत अभी से मिलने शुरू हो गए हैं। क्योंकि, एमपी के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने बीजेपी पर राज्यसभा सीट के लिए जोड़तोड़ का आरोप लगाया है। इतना ही नहीं मध्य प्रदेश कांग्रेस के महासचिव राकेश सिंह यादव ने प्रदेश नेतृत्व पर सवाल खड़े करते हुए राहुल गांधी को चिट्टी लिखकर राज्यसभा में क्रॉस वोटिंग और विधायकों की हॉर्स ट्रेडिंग की आशंका जता दी है। कांग्रेस की यह सीट वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह के रिटायर होने के कारण खाली होगी और दिग्विजय ने तीसरी बार राज्यसभा न जाने का ऐलान कर दिया है। ऐसे में रास सीट पाने के लिए कांग्रेस में भारी जोड़तोड़ शुरू हो गई है। हालांकि हलचल भाजपा में भी है। जहां तक कांग्रेस का सवाल है तो नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने बड़ा आरोप लगाते हुए कहा है कि राज्यसभा की तीसरी सीट लेने के लिए बीजेपी सबकुछ कर रही है।इसलिए एक-एक वोट की जरुरत है। कांग्रेस को राज्यसभा की सीट न मिले इसलिए मुकेश मल्होत्रा मामले में वोट के लिए कोर्ट पर दबाव बनाया जा रहा है। सिंघार के इस बयान के बाद सियासी गलियारों में राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग की चर्चा अभी से होने लगी है। गौरतलब है कि मध्य प्रदेश में कुल 230 विधायक हैं। तीन राज्यसभा सीटों के हिसाब से एक सीट जीतने के लिए 58 विधायकों की जरुरत पड़ेगी। 164 विधायकों के दम पर बीजेपी दो सीटें आसानी से जीत लेगी। जबकि कांग्रेस को अपनी एक सीट बचाने के लिए 58 विधायकों की जरुरत होगी। कांग्रेस के पास फिलहाल 65 विधायक हैं। लेकिन, बीना से कांग्रेस के टिकट पर विधायक चुनी गई निर्मला सप्रे अब बीजेपी के साथ हैं। उनका वोट बीजेपी के पाले में जा सकता है। वैसा हुआ तो कांग्रेस के पास 64 विधायक बचेंगे और यदि विजयपुर विधायक मुकेश मल्होत्रा का निर्वाचन शून्य करने का मप्र हाई कोर्ट का फैसला सुप्रीम कोर्ट भी बरकरार रखता है तो कांग्रेस विधायकों की संख्या 63 रह जाएगी। जबकि कांग्रेस को एक सीट जीतने के लिए 58 विधायक चाहिए। अगर पार्टी के 6 विधायकों ने क्रॉस वोटिंग कर दी तो कांग्रेस की यह सीट फंस सकती है। उधर बीजेपी के पास164 विधायक हैं, जबकि बीना विधायक के सपोर्ट से भाजपा की संख्या 165 हो जाएगी। ऐसे में दो सीटों पर 58-58 विधायक वोट करने के बाद भी बीजेपी के पास 49 विधायक बचते हैं। अब अगर भाजपा तीसरा प्रत्याशी भी खड़ा कर दे तो राज्यसभा का चुनाव दिलचस्प हो जाएगा। चुनाव में भारत आदिवासी पार्टी के इकलौते विधायक कमलेश्वर डोडियार का वोट भी अहम होगा। कांग्रेस सीट गवां भी सकती है। बीजेपी की दोनो सीटें सुमेरसिंह सोलंकी तथा जॉर्ज कुरियन के रिटायर होने से खाली हो रही हैं। पार्टी इन दोनो को फिर मौका दे सकती है। इनके अलावा बीजेपी में केन्द्रीय मंत्री रवनीतसिंह बिट्टू, डॉ. नरोत्तम मिश्रा, के.पी. यादव, जयभान सिंह पवैया और लाल सिंह आर्य के नाम भी चर्चा में हैं। जबकि कांग्रेस में कमलनाथ, जीतू पटवारी, अरूण यादव, मीनाक्षी नटराजन,सज्जन सिंह वर्मा,प्रदीप अहिरवार जोर लगा रहे हैं। हालांकि दोनो पार्टियों में अंतिम फैसला आला कमान ही करेगा। इस चुनाव के जरिए राज्य में जातीय, क्षेत्रीय समीकरण साधने की कोशिश भी होगी।