गगनयान मिशन की तैयारी तेज, अंतरिक्ष यान के दो हिस्सों को अलग करने के परीक्षण सफल

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इसरो ने क्रू मॉड्यूल और सर्विस मॉड्यूल को सुरक्षित रूप से अलग करने की प्रक्रिया परखी, अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने की दिशा में अहम कदम

नई दिल्ली। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने भारत के पहले मानव अंतरिक्ष मिशन गगनयान की तैयारियों के तहत अंतरिक्ष यान के दो प्रमुख हिस्सों को अलग करने से जुड़े कई परीक्षण सफलतापूर्वक पूरे किए हैं। इन परीक्षणों के माध्यम से यह जांच की गई कि मिशन के दौरान आवश्यकता पडऩे पर अंतरिक्ष यात्रियों को ले जाने वाले क्रू मॉड्यूल को सर्विस मॉड्यूल से सुरक्षित तरीके से अलग किया जा सकता है या नहीं। अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने की दिशा में इन परीक्षणों को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

गगनयान अंतरिक्ष यान के क्रू मॉड्यूल और सर्विस मॉड्यूल उड़ान के दौरान एक-दूसरे से जुड़े रहेंगे। मिशन के दौरान दोनों हिस्से मिलकर काम करेंगे और उनके बीच विद्युत आपूर्ति तथा अन्य आवश्यक सेवाओं का संपर्क बना रहेगा। हालांकि, जब अंतरिक्ष यात्रियों को लेकर यान पृथ्वी पर लौटेगा, तब क्रू मॉड्यूल को सर्विस मॉड्यूल से अलग करना आवश्यक होगा।

यह प्रक्रिया कई उपकरणों और प्रणालियों के समन्वय से पूरी होगी। ऐसे में किसी भी उपकरण में खराबी या अलग होने के दौरान आने वाली तकनीकी समस्या अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा को प्रभावित कर सकती है। इसी वजह से इस प्रक्रिया की विश्वसनीयता और सुरक्षा की जांच करना मिशन की तैयारी का अहम हिस्सा है।

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इसरो ने ये परीक्षण तिरुवनंतपुरम स्थित विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र में किए। परीक्षणों के दौरान अंतरिक्ष यान के दोनों मॉड्यूल को जोडऩे और फिर अलग करने की प्रक्रिया की जांच की गई। साथ ही यह भी परखा गया कि अलग होने के दौरान उत्पन्न होने वाले झटकों का अंतरिक्ष यान के संवेदनशील उपकरणों और विभिन्न प्रणालियों पर कोई प्रतिकूल प्रभाव तो नहीं पड़ता।

इन परीक्षणों में दिशा निर्धारण प्रणाली, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, तापरोधी परत और तापमान नियंत्रित करने वाली प्रणालियों की कार्यक्षमता का आकलन किया गया। मिशन के दौरान इन सभी प्रणालियों का सही तरीके से काम करना जरूरी है, ताकि अंतरिक्ष यान निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार कार्य कर सके और अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित हो।

गगनयान भारत का महत्वाकांक्षी मानव अंतरिक्ष मिशन है। इसके तहत भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को पृथ्वी की निचली कक्षा में भेजने और उन्हें सुरक्षित वापस लाने की योजना है। इस मिशन की सफलता के लिए अंतरिक्ष यान की विभिन्न प्रणालियों, सुरक्षा उपकरणों और आपातकालीन प्रक्रियाओं का परीक्षण किया जा रहा है।

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इसरो का लक्ष्य वर्ष 2026 में पहले बिना यात्रियों वाले जी-1 मिशन को भेजना है। इस उड़ान के माध्यम से अंतरिक्ष यान की कार्यप्रणाली और सुरक्षा से जुड़ी विभिन्न व्यवस्थाओं का परीक्षण किया जाएगा। बिना यात्रियों वाले मिशनों से प्राप्त नतीजे आगे होने वाली मानव सहित उड़ान की तैयारियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। अंतरिक्ष यान के दोनों मॉड्यूल को अलग करने से जुड़े सफल परीक्षण गगनयान मिशन की तैयारियों में एक महत्वपूर्ण प्रगति हैं। मानव सहित उड़ान से पहले अंतरिक्ष यान की सभी प्रमुख प्रणालियों की विश्वसनीयता सुनिश्चित करना इसरो की प्राथमिकता है।