रायपुर । राजधानी रायपुर में कमिश्नरेट सिस्टम लागू होने के बाद पुलिस ने ड्रग क्वीन और उनके आकाओं तक पहुंचने का रास्ता ढूंढ लिया है। जल्द ही पुलिस नशे के सौदागरों और सप्लायरों के साथ जहां ड्रग मंगाया जाता है वहां तक पहुंच कर बड़ा सर्जिकलस्ट्राइक कर नशीले पदार्थ और ड्रग से जुड़े रसूखदारों पर शिकंजा कस सकती है। राजधानी में ड्रग्स क्वीन नव्या मलिक और विधि अग्रवाल समेत पकड़े गए 43 ड्रग्स तस्करों की जांच के दौरान 620 से ज्यादा लोगों के नंबर मिले हैं, जो इन तस्करों से ड्रग्स व सूखा नशे से जुड़े उत्पाद खरीदते थे और उसका सेवन करते थे। इनमें 320 युवक-युवती सिर्फ नव्या और विधि के गिरोह के संपर्क में थे। ये लोग एक माह में 10-20 लाख रुपए का ड्रग्स मंगाते थे।
पुलिस ने चैट, ट्रांजेक्शन और कॉल डिटेल के आधार पर ऐसे लोगों की पहली बार सूची तैयार की है। इस सूची को महिला एवं बाल विकास तथा गृह विभाग को भेजा गया है, ताकि नशे की लत छुड़ाने के लिए सरकार इन युवाओं की काउंसिलिंग करा सके। कई लोगों से पुलिस ने पूछताछ की, लेकिन उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई और पूछताछ के बाद छोड़ दिया गया। इनमें अधिकांश नेता, अधिकारी और कारोबारी परिवारों के युवक-युवती शामिल हैं। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि 23 अगस्त 2025 को हरियाणा का तस्कर मोनू विश्नोई ड्रग्स लेकर ट्रेन से रायपुर पहुंचा। ट्रेन से उतरने के बाद उसने नव्या मलिक को फोन किया। नव्या उस समय रायपुर में नहीं थी। उसने मोनू को एक्सप्रेस-वे के पास इंतजार करने को कहा। नव्या ने ड्रग्स लेने के लिए हर्ष आहूजा और दीप धनोरिया को भेजा। दोनों आधे घंटे में वहां पहुंच गए। मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने पहले से ट्रैप लगाया था। जैसे ही ड्रग्स का लेन-देन हुआ, पुलिस ने तीनों को पकड़ लिया।
कॉल डिटेल से खुला राज नव्या और उससे जुड़े कॉल डिटेल निकाले गए, जिससे नव्या, विधि समेत अन्य आरोपियों का सुराग मिला। छापेमारी कर उन्हें गिर तार किया गया। 43 तस्करों के मोबाइल और बैंक खातों की जांच में 620 लोगों के नंबर मिले, जो ड्रग्स और अन्य सूखा नशा खरीदने के लिए उनसे संपर्क करते थे। रायपुर पुलिस को इसका इनपुट मिल चुका था। आपको बता दें की यह सूची पिछले चार माह से सरकार के पास लंबित है और अब तक इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। इनमें से अधिकांश लोग आज भी सूखा नशा ले रहे हैं। लिस ने सूची में शामिल कई रसूखदारों को थाने बुलाकर पूछताछ तो की, लेकिन उनके हाई-प्रोफाइल कनेक्शन के चलते उन्हें बिना किसी ठोस कार्रवाई या बॉन्ड के छोड़ दिया गया।
पुलिस ने बनाई टीम, पर काउंसिलिंग नहीं गृह विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग को पिछले साल ड्रग्स लेने वालों की सूची भेजी गई थी, जिसमें नाम, पता और मोबाइल नंबर दर्ज हैं। पुलिस की पहल थी कि सरकार नशे की लत छुड़ाने के लिए आगे आए और विशेषज्ञों की मदद से इनकी काउंसिलिंग कराए। साथ ही परिजनों को बुलाकर बातचीत की जाए, क्योंकि ये लोग हर साल लाखों रुपए खर्च कर ड्रग्स खरीद रहे हैं और परिवार को इसकी जानकारी तक नहीं है। परिजनों को भी जागरूक करने का सुझाव दिया गया है, ताकि बच्चों को पैसे देते समय सतर्कता बरती जा सके। हर वार्ड में नशा मुक्ति केंद्र चाहिए सूखे नशे की लत लगातार बढ़ रही है। पुलिस की पहल है कि हर वार्ड में एक नशा मुक्ति केंद्र खोला जाए। स्थानीय जनप्रतिनिधियों को आगे आकर अपने वार्ड या इलाके में ऐसे केंद्र शुरू करने चाहिए, ताकि स्थानीय स्तर पर नशा करने वालों की काउंसिलिंग हो सके और उन्हें नशा छोडऩे में मदद मिल सके। हालांकि इस दिशा में अभी ठोस प्रयास किया जाना बाकी है।
