बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में ‘रविशंकर महाराज बनाम सीबीआई’ से जुड़े फोन इंटरसेप्शन (कॉल टैपिंग) मामले की अहम सुनवाई हुई। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने इस केस में उठाए गए कानूनी सवालों को गंभीरता से लेते हुए दोनों पक्षों को विस्तृत जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।
याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मनु शर्मा सहित अन्य वकीलों ने तर्क दिया कि, नए दूरसंचार नियमों के तहत फोन टैपिंग आदेश को तय समयसीमा में समीक्षा समिति की मंजूरी मिलना जरूरी है, अन्यथा वह आदेश स्वतः अमान्य हो सकता है। ऐसे में उस अवधि के बाद प्राप्त साक्ष्यों की कानूनी वैधता पर सवाल उठता है।
कोर्ट ने पाया कि, मूल याचिका में इंटरसेप्शन आदेश को सीधे चुनौती नहीं दी गई थी, इसलिए याचिकाकर्ता को 24 घंटे के भीतर सभी दलीलों को शामिल करते हुए नया शपथ पत्र दाखिल करने को कहा गया है, जिसकी प्रति सीबीआई को भी दी जाएगी। सीबीआई ने बताया कि, इसी मामले से जुड़ी एक अन्य याचिका पहले से लंबित है। अदालत ने केंद्र सरकार और सक्षम प्राधिकारी से स्पष्ट निर्देश लेकर 24 जून 2026 तक जवाबी हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया है। अगली सुनवाई अब 24 जून को होगी।
