गर्भवती महिलाओं को लोअर बर्थ के लिए ऑनलाइन सुविधा मिलेगी? दिल्ली हाईकोर्ट ने रेलवे से मांगा जवाब

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नई दिल्ली। ट्रेन से सफर करने वाली गर्भवती महिलाओं के लिए लोअर बर्थ की सुविधा को आसान बनाने की मांग को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है। याचिका में मांग की गई है कि टिकट बुकिंग के दौरान ही गर्भवती महिलाओं को लोअर बर्थ के लिए ऑनलाइन अनुरोध करने का विकल्प दिया जाए, ताकि उन्हें इसके लिए रेलवे के रिजर्वेशन काउंटर का चक्कर न लगाना पड़े।मामले की सुनवाई करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार, रेलवे बोर्ड और इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉरपोरेशन (IRCTC) को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अदालत ने संबंधित पक्षों से यह बताने को कहा है कि गर्भवती महिलाओं के लिए लोअर बर्थ की सुविधा ऑनलाइन उपलब्ध कराने की दिशा में क्या कदम उठाए जा सकते हैं। मामले की अगली सुनवाई 30 सितंबर को होगी।

रेलवे की नीति में पहले से प्राथमिकता
सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष बताया गया कि रेलवे की मौजूदा नीति में गर्भवती महिलाओं को लोअर बर्थ आवंटित करने में प्राथमिकता का प्रावधान है। हालांकि, ऑनलाइन टिकट बुकिंग के दौरान इस प्राथमिकता का लाभ लेने के लिए IRCTC की वेबसाइट या मोबाइल ऐप पर कोई स्पष्ट अनुरोध विकल्प उपलब्ध नहीं होने का दावा याचिका में किया गया हैयाचिकाकर्ता का कहना है कि यदि किसी महिला को लोअर बर्थ की सुविधा के लिए अलग से पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम (PRS) काउंटर जाना पड़े, तो गर्भावस्था के दौरान उसे अनावश्यक परेशानी हो सकती है। खासकर भीड़भाड़ वाले रेलवे काउंटर तक पहुंचना कई महिलाओं के लिए असुविधाजनक हो सकता है।

ऑनलाइन टिकट बुकिंग में विकल्प जोड़ने की मांग
याचिका में IRCTC की वेबसाइट और मोबाइल ऐप में ऐसा विकल्प उपलब्ध कराने की मांग की गई है, जिसके जरिए गर्भवती महिला टिकट बुक करते समय लोअर बर्थ के लिए अनुरोध कर सके। उपलब्धता के आधार पर लोअर बर्थ आवंटित करने की व्यवस्था विकसित करने का सुझाव भी दिया गया है।याचिका में यह भी कहा गया है कि यदि लोअर बर्थ की प्राथमिकता के लिए गर्भावस्था की पुष्टि आवश्यक हो, तो इसके लिए ऑनलाइन माध्यम से उपयुक्त सत्यापन व्यवस्था तैयार की जा सकती है।

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रेलवे और IRCTC की जिम्मेदारी पर कोर्ट की टिप्पणी
चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की पीठ ने सुनवाई के दौरान इस मुद्दे पर गौर किया कि जब रेलवे की नीति में गर्भवती महिलाओं के लिए लोअर बर्थ को प्राथमिकता दी गई है, तो उस नीति का लाभ यात्रियों तक पहुंचाने के लिए प्रभावी व्यवस्था भी होनी चाहिए।अदालत ने यह भी कहा कि IRCTC रेलवे के एजेंट के रूप में काम करता है, इसलिए ऑनलाइन टिकट बुकिंग व्यवस्था में रेलवे की नीतियों को प्रभावी ढंग से लागू करने के पहलू पर रेलवे बोर्ड और IRCTC को अपना पक्ष रखना होगा।

30 सितंबर को अगली सुनवाई
याचिका में मांग की गई है कि गर्भवती महिलाओं को लोअर बर्थ के लिए आवेदन करने की सुविधा डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराई जाए, ताकि उन्हें केवल इस सुविधा के लिए रेलवे काउंटर पर जाने की जरूरत न पड़े।दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार, रेलवे बोर्ड और IRCTC से इस मामले में जवाब मांगा है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 30 सितंबर को होगी।