3 लोगों को कुचलने पर HC सख्त, बोला- गाड़ी कोई खिलौना नहीं , नाबालिग को कार थमाने वाले पिता पर चलेगा मर्डर का केस

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बेंगलुरु। कर्नाटक उच्च न्यायालय ने नाबालिगों द्वारा वाहन चलाने और सड़क हादसों को लेकर बेहद कड़ा और नजीर पेश करने वाला फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि मोटर वाहन का स्टीयरिंग किसी बच्चे के हाथ का खिलौना नहीं बन सकता और न ही सार्वजनिक सड़कें ऐसे जानलेवा शौक पूरे करने का खेल का मैदान हैं। इस सख्त टिप्पणी के साथ अदालत ने उस पिता के खिलाफ दर्ज गैर-इरादतन हत्या की कार्यवाही रद करने से साफ इनकार कर दिया, जिसके 14 साल के बेटे ने कार से कुचलकर एक पूरा परिवार खत्म कर दिया था।

तेज रफ्तार कार ने ली थी 3 जिंदगियां, उजड़ गया था हंसता-खेलता परिवार
यह दिल दहला देने वाला हादसा दिसंबर 2020 में पुराने बेंगलुरु-मैसूर रोड पर हुआ था। आरोपी नदीम-उर-रहमान के 14 वर्षीय बेटे ने तेज रफ्तार फॉक्सवैगन वेंटो कार चलाते हुए सड़क पर जा रहे एक दंपत्ति और उनके 5 साल के मासूम बच्चे को जोरदार टक्कर मार दी थी। टक्कर इतनी भयानक थी कि तीनों की घटनास्थल पर ही दर्दनाक मौत हो गई। यह लग्जरी कार नदीम को उनके एंप्लॉयर की तरफ से इस्तेमाल के लिए मिली हुई थी।

पिता ने दी थी दलील—’चोरी-छिपे कार ले गया था बेटा’
निचली अदालत से डिस्चार्ज अर्जी खारिज होने के बाद आरोपी पिता नदीम-उर-रहमान ने हाईकोर्ट की शरण ली थी। उसने अपने खिलाफ आईपीसी की धारा 304 भाग-II (गैर-इरादतन हत्या) के तहत दर्ज केस को रद करने की गुहार लगाई थी। याचिकाकर्ता ने दलील दी कि उसका बेटा उसकी जानकारी के बिना चुपके से कार लेकर निकला था और यह मामला ज्यादा से ज्यादा लापरवाही से गाड़ी चलाने का बनता है, न कि गैर-इरादतन हत्या का।

सरकारी वकील ने खोली पोल, पिता ही देता था गाड़ी चलाने की छूट
सरकारी वकील ने इस याचिका का कड़ा विरोध करते हुए अदालत में पुख्ता रिकॉर्ड पेश किए। उन्होंने बताया कि जांच से साबित होता है कि पिता ने खुद अपने नाबालिग बेटे को कार की चाबी सौंपी थी और उसे सड़क पर गाड़ी दौड़ाने की खुली छूट दी थी। यही नहीं, आरोपी पिता इससे पहले भी कई मौकों पर अपने कम उम्र के बेटे को इसी तरह वाहन चलाने की अनुमति दे चुका था।

‘नाबालिग’ होने की आड़ लेकर नहीं बच सकते माता-पिता: अदालत
मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति एम. नागप्रसन्ना की पीठ ने माता-पिता की जवाबदेही पर सख्त रुख अख्तियार किया। अदालत ने कहा कि जो माता-पिता सब कुछ जानते हुए भी अपने नाबालिग बच्चों के हाथों में गाड़ियों की चाबी थमाते हैं, वे बाद में किसी भयानक हादसे के बाद अपने बच्चे की उम्र का बहाना बनाकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला नहीं झाड़ सकते। अदालत ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि पिता की यह हरकत सिर्फ लापरवाही थी या जानबूझकर किया गया अपराध, इसका फैसला अब ट्रायल कोर्ट में ही होगा।