तूता (नया रायपुर)। चैत्र नवरात्रि के पवित्र अवसर पर, जब पूरा हिंदू समाज माँ दुर्गा के नौ रूपों की आराधना में लीन है और माँ शीतला के चरणों में कलश चढ़ाकर सुख-समृद्धि की कामना करता है, ठीक उसी समय छत्तीसगढ़ की बीजेपी सरकार ने हिंदू धर्म की इस पवित्र परंपरा पर भी प्रश्नचिह्न लगा दिया।
2300 सहायक शिक्षक पदों पर नियुक्ति की संवैधानिक मांग को लेकर 86 दिनों से आमरण अनशन पर बैठे डी.एड. (D.El.Ed.) अभ्यर्थियों ने अपनी पीड़ा को माँ के चरणों में समर्पित करने के लिए तूता धरना स्थल से शीतला मंदिर तक भव्य कलश यात्रा निकालने का प्रयास किया। सैकड़ों अभ्यर्थी छत्तीसगढ़ के समस्त विभिन्न जिलों—जशपुर, बलरामपुर, सुकमा, बस्तर, बीजापुर, कोरिया, नारायणपुर आदि—से आए थे। हाथों में कलश, माथे पर तिलक, भक्ति भाव से मंत्रोच्चार करते हुए वे माँ से बस इतनी मन्नत मांग रहे थे कि उनकी वर्षों की मेहनत और पढ़ाई का फल उन्हें मिले, उनके परिवारों का भविष्य संवरे।

लेकिन बीजेपी की ‘ट्रिपल इंजन’ सरकार ने क्या किया?
पुलिस बल की भारी तैनाती, बैरिकेडिंग और लाठी-डंडों की धमकी से कलश यात्रा को धरना स्थल के गेट पर ही रोक दिया गया। क्या अब हिंदू धर्म के सबसे पवित्र नवरात्रि पर्व पर भी बिना अनुमति के कलश यात्रा निकालना अपराध हो गया है?
अगर कोई राजनीतिक पार्टी की रैली होती, चुनावी सभा होती या कोई धार्मिक जुलूस किसी संगठन का होता, तो नियम-कानून की बात कहाँ चली जाती?
लेकिन जब पढ़े-लिखे, संवैधानिक अधिकार के लिए संघर्षरत युवा माँ के नाम पर शांतिपूर्ण कलश यात्रा निकालते हैं, तो तुरंत पुलिस का पहरा और रोक-टोक!
यह दोहरा मापदंड नहीं तो और क्या है? बीजेपी सरकार, जो हर चुनाव में ‘राम-राम’ और ‘हिंदुत्व’ का नारा लगाती है, आज हिंदू आस्था की पवित्र यात्रा को रोककर अपनी असली मंशा उजागर कर रही है। क्या माँ शीतला की भक्ति भी अब ‘अनुमति’ के घेरे में आ गई है? क्या नवरात्रि का पर्व केवल दिखावा भर रह गया है?
अभ्यर्थियों का स्पष्ट कहना है कि हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट आदेशों के बावजूद 2300 पद खाली पड़े हैं, जबकि हजारों युवा भूखे-प्यासे, परिवार की उम्मीदों पर बैठे न्याय की प्रतीक्षा कर रहे हैं। यह केवल नौकरी की मांग नहीं, बल्कि संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकार, शिक्षा के क्षेत्र में योग्यता का सम्मान और हिंदू समाज के युवाओं के साथ न्याय का सवाल है।

अंतिम चेतावनी:
यदि बीजेपी सरकार 10 दिनों के भीतर ठोस निर्णय नहीं लेती और इन युवाओं के साथ अन्याय जारी रखती है, तो अभ्यर्थी उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। इसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन पर होगी। माँ दुर्गा की शक्ति से ओत-प्रोत ये युवा अब और चुप नहीं बैठेंगे।
हम माँ शीतला और माँ दुर्गा की शरण में हैं। हमारी मन्नत स्पष्ट है—न्याय दो, नियुक्ति दो, या मुक्ति दो
न्याय की कलश यात्रा रोकी जा सकती है, लेकिन न्याय की भावना कभी नहीं रोकी जा सकती।
