दिल्ली। भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा है कि हाल के वर्षों में आए वैश्विक झटकों के बावजूद भारत ने अपनी मज़बूती साबित की है और इन चुनौतियों से सफलतापूर्वक उभरकर सामने आया है। उन्होंने यह बात आईआईएम रायपुर के दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए कही। जयशंकर ने अपने संबोधन में पश्चिम एशिया में जारी सैन्य संघर्ष सहित हालिया अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों का जिक्र करते हुए कहा कि इन वैश्विक संकटों ने भारत की क्षमता और लचीलापन परखने का काम किया है। उन्होंने कहा, “इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि हाल के कई वैश्विक झटकों ने हमारी मजबूती को परखा है, लेकिन भारत उनसे मजबूती से उभरा है।
उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि आज के दौर में दुनिया पहले से कहीं अधिक आपस में जुड़ी हुई है। ऐसे में किसी एक क्षेत्र में होने वाले संघर्ष या संकट का प्रभाव दूर-दराज के देशों और समाजों पर भी पड़ता है। यह वैश्वीकरण की गहराई को दर्शाता है। विदेश मंत्री ने पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव की ओर इशारा करते हुए कहा कि इस तरह के संघर्षों का असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ा है। खासकर हाइड्रोकार्बन संसाधनों की उपलब्धता प्रभावित हुई है, जिससे दुनिया भर में ईंधन आपूर्ति और कीमतों पर दबाव बना है।
जयशंकर ने जोर देकर कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में देशों के लिए अपनी राष्ट्रीय क्षमताओं को मजबूत करना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि जोखिमों को कम करने और अवसरों का लाभ उठाने का सबसे प्रभावी तरीका यही है कि देश अपनी आर्थिक, तकनीकी और सामरिक ताकत को बढ़ाएं। उन्होंने कहा कि वर्तमान में वैश्विक व्यवस्था तेजी से बदल रही है और विभिन्न देशों की शक्ति और प्रभाव में स्पष्ट बदलाव देखने को मिल रहा है। “दुनिया में जो उथल-पुथल दिखाई दे रही है, वह केवल अस्थायी नहीं बल्कि संरचनात्मक है,” उन्होंने कहा।
जयशंकर ने आगे कहा कि तकनीक, ऊर्जा, सैन्य क्षमता, कनेक्टिविटी और संसाधनों में हो रहे नए विकास ने वैश्विक प्रतिस्पर्धा को और तेज कर दिया है। इस प्रतिस्पर्धी माहौल में देश अधिक जोखिम लेने के लिए प्रेरित हो रहे हैं, जिससे अनिश्चितता और अस्थिरता बढ़ रही है। उन्होंने यह भी कहा कि आज की दुनिया में देशों को अपने हितों की सुरक्षा के लिए नई रणनीतियों पर काम करना होगा। “हेजिंग, जोखिम कम करना और विविधीकरण अब केवल व्यावसायिक रणनीतियाँ नहीं, बल्कि विदेश नीति का भी अहम हिस्सा बन चुके हैं,” उन्होंने कहा।
अपने संबोधन में जयशंकर ने इस दशक की तीन प्रमुख चुनौतियों का भी जिक्र किया—कोविड-19 महामारी, अंतरराष्ट्रीय संघर्ष और जलवायु परिवर्तन। उन्होंने कहा कि इन चुनौतियों से निपटने के लिए समावेशी विकास, प्रतिनिधित्व आधारित राजनीति और मजबूत नेतृत्व की जरूरत है। उन्होंने निष्कर्ष में कहा कि भारत ने इन सभी मोर्चों पर संतुलित और प्रभावी तरीके से काम किया है, जिससे देश ने न केवल संकटों का सामना किया बल्कि एक मजबूत वैश्विक शक्ति के रूप में अपनी स्थिति भी सुदृढ़ की है।
