अमेठी-रायबरेली की 10 सीटों पर कांग्रेस का दावा: सपा नहीं देगी अपनी जीती हुई सीटें

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नई दिल्ली/लखनऊ। उत्तर प्रदेश में सपा व कांग्रेस गठबंधन में सीटों को लेकर उलझनें अब और बढ़ती दिख रही है। कांग्रेस जितनी सीट मांग रही है, सपा उसकी एक तिहाई ही देने के मूड में है। राष्ट्रीय राजनीति में अपनी उभरती ताकत का असर यूपी में होने का दावा करते हुए कांग्रेस ने सीटों की डिमांड बढ़ाई है। खास बात यह कि सपा की जीती सीटों में एक दर्जन पर कांग्रेस ने दावा ठोका है। इसमें सपा के बागी विधायकों वाली सीटें भी हैं। इस सवाल पर कि क्या गठबंधन पनपते अविश्वास व परस्पर विरोधाभासी बयानबाजी से हिचकोले खाने लगा है।

इसका जवाब सपा के वरिष्ठ नेता ने यह कहते हुए दिया कि चाय उतनी गर्म नहीं है जितनी केतली गर्म लग रही है। अमेठी व रायबरेली संसदीय सीटें कांग्रेस की बरसों से गढ़ रही हैं। विधानसभा चुनाव में सपा की स्थिति मजबूत रही है और वह भाजपा को चुनौती देती है। लेकिन कांग्रेस ने इन दोनों जिलों की 10 विधानसभा सीटें मांगी हैं।

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भाजपा का दामन थामने वाले बागी विधायकों को खुद हराएगी सपा:
अमेठी में पिछले चुनाव सपा ने तीन और भाजपा ने दो सीटें जीती थीं। रायबरेली की पांच में चार सपा के पाले में और एक भाजपा के पाले में थीं। सपा ने पहले से तय किया है कि उसके साथ छोड़ कर भाजपा का दामन थामने वाले बागी विधायकों को वह खुद हराएगी। इनमें ऊंचाहार से जीते मनोज पांडेय जो योगी सरकार में मंत्री हैं, खास तौर पर सपा के निशाने पर हैं। राकेश प्रताप सिंह अमेठी से पिछली बार सपा से जीते थे। वह भी भाजपा में जा चुके हैं। सपा ने यह सीटें देने से इन्कार का संदेशा भिजवा दिया है।

दिल्ली की रैली से संदेश देने की कोशिश:
कांग्रेस ने एक नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में होने वाली रैली के लिए ताकत झोंक दी है और इसमें इंडिया ब्लाक के सभी नेताओं के शामिल होने की उम्मीद है। विपक्षी राजनीति में अगुवा की भूमिका में अब रैली के जरिये इंडिया ब्लॉक की एकजुटता का संदेश तो भाजपा को दिया जाएगा ही साथ छुपा हुआ संदेश यूपी चुनाव के लिए भी होगा। इससे अपने पक्ष में माहौल बना कर सपा से अधिक से अधिक सीटें लेने का दबाव बनाया जा सके।

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