जगदलपुर। बस्तर प्रवास पर पहुंचीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शुक्रवार को बस्तर की आराध्य देवी मां दंतेश्वरी के दर्शन कर आशीर्वाद लिया। इसके बाद वे बस्तर की विशिष्ट सांस्कृतिक परंपरा मुरिया दरबार में शामिल हुईं। यहां उन्होंने मांझी-मुखियाओं से संवाद किया, उनकी समस्याएं सुनीं और आदिवासी समाज को शिक्षा, सामाजिक एकजुटता तथा सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण का संदेश दिया। राष्ट्रपति ने कहा कि बच्चों को अच्छी शिक्षा देना समय की जरूरत है, लेकिन इसके साथ अपनी परंपराओं, संस्कृति और सामाजिक मूल्यों को भी सुरक्षित रखना जरूरी है। बदलते समय के साथ आगे बढ़ने के लिए नई पीढ़ी को आधुनिक अवसरों से जोड़ना चाहिए, ताकि वे अपनी सांस्कृतिक पहचान पर गर्व करते हुए जीवन में आगे बढ़ सकें।
मुरिया दरबार में अपने विचार साझा करते हुए राष्ट्रपति ने बस्तर की परंपरागत सामाजिक व्यवस्था से अपने जुड़ाव का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उन्हें यहां की संस्कृति और परंपराओं को करीब से जानने का अवसर मिला है। वे स्वयं भी इसी परंपरा से जुड़ी रही हैं। उनके दादा, पिता और भाई मांझी रहे हैं। आज भले ही वे उनके बीच नहीं हैं, लेकिन उन्हें पारंपरिक संस्कृति और सामाजिक व्यवस्थाओं की जानकारी है। राष्ट्रपति ने कहा कि देश में अब गणतांत्रिक व्यवस्था है और समय के साथ नियम-कायदे बदलते रहते हैं। इसके बावजूद आदिवासी समाज अपनी परंपराओं के साथ सुख-शांति से रहता है और त्योहारों को मिल-जुलकर मनाता है। उन्होंने इस सांस्कृतिक विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
आपसी बातचीत से सुलझाएं विवाद, समाज में बनाए रखें एकजुटता
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने समाज में शांति, प्रेम और भाईचारा बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि समस्याओं का समाधान आपसी बातचीत और सामाजिक व्यवस्था के माध्यम से करने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने कहा कि लोगों को मिल-जुलकर रहना चाहिए और आपसी विवादों को बातचीत से सुलझाना चाहिए। सामाजिक एकजुटता का महत्व समझाते हुए उन्होंने उदाहरण दिया कि जब कोई व्यक्ति अकेले थक जाए, तो सभी को मिलकर उसका बोझ उठाना चाहिए। इस संदेश के जरिए उन्होंने समाज में सहयोग, सामूहिक जिम्मेदारी और एक-दूसरे के प्रति संवेदनशीलता की भावना मजबूत करने की बात कही।
राष्ट्रपति ने कहा कि अपनी पहचान और धरोहर को सुरक्षित रखने के लिए अपनी जड़ों से जुड़े रहना जरूरी है। जीवन में आगे बढ़ने के लिए व्यक्ति को स्वयं निर्णय लेने पड़ते हैं और बदलते समय के साथ सोच में परिवर्तन आना स्वाभाविक है। हालांकि, आधुनिकता को अपनाते समय अच्छी परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को पीछे नहीं छोड़ना चाहिए। उन्होंने आदिवासी समाज से अपनी विशिष्ट पहचान को बनाए रखने और सामाजिक मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का आह्वान किया।
बच्चों की शिक्षा पर विशेष जोर, आधुनिक अवसरों के साथ संस्कृति से भी जुड़ें
राष्ट्रपति ने आदिवासी समाज के लोगों से अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा दिलाने की अपील की। उन्होंने कहा कि समय तेजी से बदल रहा है और नई परिस्थितियों के अनुरूप आगे बढ़ने के लिए शिक्षा बेहद महत्वपूर्ण है। बच्चों को शिक्षित करने से उनके सामने विकास और प्रगति के नए अवसर खुलेंगे। साथ ही, उन्हें अपनी संस्कृति, परंपराओं और सामाजिक मूल्यों की जानकारी देना भी जरूरी है, ताकि वे आधुनिक शिक्षा और अवसरों का लाभ उठाने के साथ अपनी सांस्कृतिक पहचान को समझ सकें।
उन्होंने शिक्षा और परंपरा के बीच संतुलन बनाए रखने का संदेश दिया। नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जुड़े रहते हुए आगे बढ़ना चाहिए। राष्ट्रपति के संदेश का मुख्य भाव यही रहा कि शिक्षा समाज के विकास का आधार है, जबकि संस्कृति और परंपराएं उसकी पहचान हैं। दोनों को साथ लेकर चलने से ही समाज अपनी विरासत को सुरक्षित रखते हुए भविष्य की चुनौतियों का सामना कर सकता है।
600 साल पुरानी बस्तर दशहरा परंपरा का किया गया उल्लेख
कार्यक्रम की शुरुआत में बस्तर दशहरा समिति के अध्यक्ष एवं बस्तर सांसद महेश कश्यप ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का स्वागत किया। उन्होंने बस्तर दशहरा को लगभग 600 वर्षों से चली आ रही गौरवशाली परंपरा बताया। उन्होंने कहा कि इस ऐतिहासिक आयोजन में राष्ट्रपति की उपस्थिति बस्तर के लिए गर्व और प्रसन्नता का विषय है।
महेश कश्यप ने बताया कि बस्तर दशहरा की विशेषता यह है कि इसमें विभिन्न समाजों के लोग मिल-जुलकर अलग-अलग रस्मों और धार्मिक आयोजनों में भाग लेते हैं। यह आयोजन क्षेत्र की सांस्कृतिक विविधता, आपसी सहयोग और सामाजिक एकता का प्रतीक है। बस्तर दशहरा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि यहां की विशिष्ट सामाजिक और सांस्कृतिक परंपराओं को जीवंत बनाए रखने का भी महत्वपूर्ण माध्यम है।
नक्सलवाद का प्रभाव कम होने से क्षेत्र में खुशी : बलराम मांझी
दशहरा समिति के उपाध्यक्ष बलराम मांझी ने कहा कि बस्तर में भय और नक्सलवाद का प्रभाव कम होने से क्षेत्र के लोगों में खुशी का माहौल है। उन्होंने बस्तर दशहरा जैसे ऐतिहासिक आयोजन में राष्ट्रपति के शामिल होने को क्षेत्रवासियों के लिए गौरव की बात बताया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंह देव, मंत्री केदार कश्यप, कमल चंद भंजदेव सहित अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।
मुरिया दरबार में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का संदेश शिक्षा, सामाजिक सद्भाव और सांस्कृतिक संरक्षण पर केंद्रित रहा। उन्होंने समाज को एकजुट रहकर समस्याओं का समाधान करने, बच्चों को शिक्षित बनाने और बदलते समय के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। साथ ही यह भी रेखांकित किया कि विकास की राह पर आगे बढ़ते हुए अपनी परंपराओं, सांस्कृतिक पहचान और गौरवशाली विरासत को सहेजकर रखना उतना ही जरूरी है।
