न्यूयॉर्क। भारत ने संयुक्त राष्ट्र में कहा है कि बाहरी अंतरिक्ष को टकराव की जगह सहयोग का क्षेत्र होना चाहिए। साथ ही, भारत ने अंतरिक्ष में हथियारों की होड़ को रोकने के लिए एक कानूनी रूप से बाध्यकारी अंतरराष्ट्रीय समझौता करने की मांग की है।
सांसद सुधा मूर्ति ने क्या कहा?:
मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा की पहली समिति में बाहरी अंतरिक्ष पर भारत का पक्ष रखते हुए, सांसद सुधा मूर्ति ने कहा, ‘भारत अंतरिक्ष के क्षेत्र में एक प्रमुख देश है। हमारे अंतरिक्ष कार्यक्रम के विकास और सुरक्षा, दोनों पहलू हैं। भारत का मानना है कि बाहरी अंतरिक्ष हम सभी का है। हम एक पृथ्वी, एक परिवार हैं और हमारा भविष्य भी एक है। हमारा मानना है कि बाहरी अंतरिक्ष को टकराव के बजाय सहयोग का क्षेत्र बने रहना चाहिए।’
बाहरी अंतरिक्ष के क्षेत्र में नए पक्षों के आने का जिक्र करते हुए मूर्ति ने कहा कि दोहरे उपयोग वाली अंतरिक्ष तकनीकें और संपत्तियां अब एक वास्तविकता बन गई हैं। उन्होंने कहा, ‘बाहरी अंतरिक्ष में हथियारों की होड़ को रोकने के तरीकों को लेकर अभी भी अलग-अलग राय है। इस बात पर भी मतभेद है कि किस तरीके को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।’
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भारत ने क्या मांग की?:
भारत ने बाहरी अंतरिक्ष में हथियारों की होड़ को रोकने के लिए एक कानूनी रूप से बाध्यकारी समझौते की अपनी मांग दोहराई। भारत का मानना है कि यह समझौता ऐसा होना चाहिए जिसे सभी स्वीकार करें, जिसकी पुष्टि की जा सके, और जिस पर ‘कॉन्फ्रेंस ऑन डिसआर्मामेंट’ (निरस्त्रीकरण सम्मेलन) में कई देशों के बीच बातचीत हुई हो।
नियमों को लेकर मूर्ति ने क्या कहा?:
मूर्ति ने कहा कि भारत ऐसे नियमों का भी स्वागत करता है जो सभी के लिए समान हों, भेदभाव रहित हों और बाध्यकारी न हों। साथ ही, भारत पारदर्शिता और विश्वास बढ़ाने वाले उपायों का भी समर्थन करता है। हालांकि, उन्होंने जोर देकर कहा कि ये उपाय एक कानूनी रूप से बाध्यकारी समझौते के पूरक तो हो सकते हैं, लेकिन उसका विकल्प नहीं बन सकते। उन्होंने कहा कि एक विकासशील देश होने के नाते, भारत का मानना है कि इस पूरी प्रक्रिया का नतीजा ऐसा नहीं होना चाहिए जिससे शांतिपूर्ण और वैध उद्देश्यों के लिए वैज्ञानिक और तकनीकी शोध के आदान-प्रदान में रुकावट आए।
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भविष्य के लक्ष्यों के बारे में क्या कहा?:
मूर्ति ने भारत की अंतरिक्ष उपलब्धियों और भविष्य के लक्ष्यों का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि 2023 में भारत ने चंद्रमा पर अपना अंतरिक्ष यान उतारा था। देश अपने मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम, ‘गगनयान’ की तैयारी कर रहा है। भारत का एक राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन, ‘भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन’ बनाने का भी इरादा है। मूर्ति उन भारतीय सांसदों के दूसरे समूह का हिस्सा हैं, जो संयुक्त राष्ट्र (यूएन) के कामकाज को समझने के लिए वहां पहुंचे हैं।
अपनी इस यात्रा के दौरान, ये सांसद संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय के अधिकारियों, वरिष्ठ यूएनअधिकारियों, विभिन्न देशों के दूतों और वहां रहने वाले भारतीय समुदाय के सदस्यों से मुलाकात करेंगे। विदेश मंत्रालय में उप सचिव बरखा ताम्रकार ने कहा, ‘मानवाधिकारों का इस्तेमाल राजनीतिक दबाव डालने या चुनिंदा देशों को निशाना बनाने के लिए नहीं किया जाना चाहिए। भारत इन आरोपों और अधूरे आंकड़ों के आधार पर दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की ‘नकारात्मक छवि’ पेश करने की कोशिशों का विरोध करता है।
