घी के नमूनों की गुणवत्ता पर कांग्रेस ने उठाए सवाल, खाद्य विभाग से कार्रवाई की जानकारी मांगी

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देवभोग, अमूल समेत 12 ब्रांडों के घी में लेड की मात्रा निर्धारित सीमा से अधिक होने का दावा; त्योहारों के बीच खाद्य सुरक्षा को लेकर पारदर्शिता पर जोर

रायपुर। त्योहारों के मौसम में बाजार में बिकने वाले घी की गुणवत्ता को लेकर छत्तीसगढ़ में राजनीतिक बहस शुरू हो गई है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने देवभोग, अमूल, वचन समेत 12 कंपनियों के घी के नमूनों की जांच रिपोर्ट का हवाला देते हुए खाद्य विभाग की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस ने राज्य के खाद्य मंत्री से संबंधित जांच रिपोर्ट, कंपनियों को जारी नोटिस और अब तक की गई कार्रवाई की जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की है।

प्रदेश कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने दावा किया कि कुछ नामी ब्रांडों के घी के नमूनों में लेड की मात्रा निर्धारित मानकों से अधिक पाई गई है। उन्होंने कहा कि खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता का मामला सीधे आम लोगों के स्वास्थ्य से जुड़ा है। ऐसे में जांच में गड़बड़ी सामने आने पर संबंधित विभाग को नियमानुसार समयबद्ध कार्रवाई करनी चाहिए।

जांच रिपोर्ट और कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट करने की मांग
कांग्रेस ने देवभोग, अमूल, वचन, प्योर काऊ घी, देशी घी धौलपुर, कीर्ति गोल्ड और वास्तु एगमार्क सहित कई ब्रांडों के नमूनों को लेकर सवाल उठाए हैं। पार्टी की ओर से जारी विज्ञप्ति में कुछ उत्पादों में लेड की मात्रा के आंकड़े भी दिए गए हैं। धनंजय सिंह ठाकुर ने खाद्य विभाग से पूछा कि संबंधित कंपनियों को नोटिस जारी किए गए हैं या नहीं, जांच में सामने आए उत्पादों के बैचों की बिक्री रोकने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं और नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होने पर क्या कार्रवाई की गई है।

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हालांकि, इन दावों की पुष्टि के लिए संबंधित प्रयोगशाला की मूल रिपोर्ट, नमूनों की जांच की तारीख, उत्पाद के बैच नंबर और खाद्य सुरक्षा मानकों के संदर्भ में आधिकारिक जानकारी सामने आना जरूरी है।

त्योहारों में खाद्य सुरक्षा पर विशेष ध्यान जरूरी
कांग्रेस ने कहा कि दीपावली जैसे त्योहारों के दौरान घी और अन्य खाद्य पदार्थों की खरीद बढ़ जाती है। ऐसे समय में उपभोक्ता ब्रांडों की प्रतिष्ठा के आधार पर उत्पाद खरीदते हैं। इसलिए खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता सुनिश्चित करना और जांच से जुड़ी जानकारी समय पर उपलब्ध कराना महत्वपूर्ण है। पार्टी ने कहा कि यदि किसी उत्पाद में निर्धारित मानकों से अधिक हानिकारक तत्व पाए जाते हैं, तो उपभोक्ताओं को संभावित जोखिम से बचाने के लिए नियमानुसार आवश्यक कदम उठाए जाने चाहिए। खाद्य सुरक्षा से जुड़े मामलों में कार्रवाई का आधार जांच रिपोर्ट और संबंधित नियम होने चाहिए, न कि कंपनी की प्रतिष्ठा।

आधुनिक प्रयोगशालाओं की क्षमता बढ़ाने पर जोर
कांग्रेस ने राज्य में खाद्य पदार्थों की जांच के लिए आधुनिक प्रयोगशालाओं की क्षमता बढ़ाने की जरूरत भी बताई। धनंजय सिंह ठाकुर के अनुसार, यदि नमूनों को जांच के लिए दूसरे राज्यों में भेजना पड़ता है, तो रिपोर्ट आने में देरी हो सकती है। उन्होंने राज्य में जांच सुविधाओं को मजबूत करने और समय पर रिपोर्ट उपलब्ध कराने की मांग की।

खाद्य पदार्थों की नियमित जांच, नमूनों की पारदर्शी रिपोर्टिंग और शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई से उपभोक्ताओं का भरोसा बढ़ सकता है। इसके लिए विभागीय निगरानी के साथ-साथ कंपनियों की जवाबदेही भी महत्वपूर्ण है।

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आधिकारिक रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई अहम
घी के नमूनों में लेड की मात्रा को लेकर लगाए गए आरोपों पर संबंधित जांच रिपोर्ट और खाद्य विभाग का आधिकारिक पक्ष सामने आना महत्वपूर्ण होगा। नमूनों में किसी तत्व की मात्रा, लागू मानक और उत्पाद की बिक्री पर कार्रवाई का निर्णय प्रमाणित जांच तथा नियमानुसार प्रक्रिया के आधार पर किया जाना चाहिए।

फिलहाल, कांग्रेस ने इस मामले में सरकार से जवाबदेही और कार्रवाई की जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की है। त्योहारों के बीच उपभोक्ताओं को सुरक्षित खाद्य सामग्री उपलब्ध कराना और जांच से जुड़े तथ्यों को स्पष्ट करना खाद्य सुरक्षा व्यवस्था के लिए अहम है।